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सुपर अल नीनो का कहर: अगले 5 महीनों में भीषण गर्मी से 3.5 लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान, भारत पर भी बड़ा खतरा

दुनिया में एक बार फिर मौसम को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली अल नीनो आने वाले महीनों में तापमान बढ़ाने और मौसम के असामान्य बदलावों को तेज करने की आशंका पैदा कर रहा है। वैज्ञानिकों के अनुमानों के मुताबिक, इस घटना से जुड़ी भीषण गर्मी के कारण दुनिया भर में लाखों लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से जुड़े क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच दुनिया में गर्मी से लगभग 3.73 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यह आंकड़ा मॉडल आधारित अनुमान है, न कि पहले से तय मौतों की संख्या। भारत भी इससे प्रभावित होने वाले प्रमुख देशों में शामिल है।

क्या है सुपर अल नीनो?सुपर अल नीनो

प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण समुद्री हवाओं, वायुमंडलीय दबाव और बारिश के वैश्विक पैटर्न में बदलाव आते हैं।

जब यह घटना बहुत अधिक शक्तिशाली हो जाती है, तो इसे आम तौर पर ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है। हालांकि, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) इस शब्द का इस्तेमाल किसी औपचारिक मानक श्रेणी के रूप में नहीं करता।

इस बार अल नीनो के मजबूत होने से दुनिया के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने, सूखे की स्थिति बनने और बारिश के पैटर्न में बदलाव का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर हर देश में एक जैसा नहीं होगा।

अगले छह महीनों में 3.73 लाख मौतों का अनुमान

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के नवीनतम हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के दौरान दुनिया भर में लगभग 3.73 लाख अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों का अनुमान है। यह सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षित मौतों की तुलना में अतिरिक्त मृत्यु का अनुमान है।

इससे पहले सितंबर में प्रकाशित एक अध्ययन में सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच लगभग 2.39 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया था। नए ट्रैकर में अलग समयावधि और अद्यतन आंकड़ों के आधार पर अनुमान सामने आया है।

यह समझना जरूरी है कि इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि इतनी मौतें निश्चित रूप से होंगी। वास्तविक प्रभाव तापमान, लोगों की स्वास्थ्य स्थिति, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और सरकारों की तैयारी पर निर्भर करेगा।

भारत में भी बढ़ सकता है गर्मी से मौतों का खतरा

मार्च में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

भारत में गर्मी का प्रभाव विशेष रूप से गंभीर हो सकता है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी खुले वातावरण में काम करती है। निर्माण मजदूर, किसान, रेहड़ी-पटरी वाले और अन्य बाहरी काम करने वाले लोग लंबे समय तक तेज धूप के संपर्क में रहते हैं।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के नवीनतम ट्रैकर के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच भारत में गर्मी से लगभग 55,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इस अनुमान में मार्च के दौरान होने वाली मौतों का हिस्सा विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है।

यह आंकड़ा पहले जारी रिपोर्ट के सितंबर 2026 से फरवरी 2027 की अवधि के लिए दिए गए लगभग 15,800 अतिरिक्त मौतों के अनुमान से अलग है। दोनों आंकड़ों की समयावधि और मॉडल अपडेट अलग हैं, इसलिए उनकी तुलना करते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

बुजुर्गों और मजदूरों पर पड़ सकता है अधिक असर

भीषण गर्मी का खतरा सभी लोगों के लिए समान नहीं होता। बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का अधिक जोखिम हो सकता है।

तेज गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी, चक्कर, थकान, बेहोशी और हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अत्यधिक तापमान हृदय और गुर्दों पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

कम आय वाले परिवारों के लिए खतरा अधिक हो सकता है, क्योंकि उनके पास एयर कंडीशनर, ठंडे स्थानों या पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित हो सकती है।

भारत में बचाव के लिए क्या करना जरूरी?

समय रहते तैयारी से बचाई जा सकती हैं जानें

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है। प्रशासन को मौसम संबंधी चेतावनियों को प्रभावी बनाने, अस्पतालों की तैयारी बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए।

नागरिकों को भी कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए:

निष्कर्ष:

चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी

सुपर अल नीनो से जुड़ी गर्मी के अनुमानों ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। भारत में भी संभावित जोखिम को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं, मौसम चेतावनी प्रणालियों और राहत उपायों को मजबूत करना जरूरी है।

हालांकि, 3.73 लाख अतिरिक्त मौतों का वैश्विक अनुमान निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। इसका उद्देश्य संभावित खतरे का आकलन करके समय रहते कार्रवाई करने में मदद करना है। सही तैयारी, जागरूकता और प्रभावी सरकारी कदमों से गर्मी के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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