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संसद का मानसून सत्र हंगामेदार: NEET पेपर लीक, राम मंदिर दान विवाद और CJP आंदोलन पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने 

संसद का मानसून सत्र 2026 लगातार राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने NEET पेपर लीक, राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी, दिल्ली में CJP आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई, महिला आरक्षण, परिसीमन, E20 पेट्रोल नीति और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं केंद्र सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय मुद्दों पर चर्चा में भाग लेने की अपील की।

मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें निर्धारित की गई हैं। सरकार ने इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी की है, जबकि विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगा।

संसद में शुरुआत से ही हंगामे की स्थितिसंसद

 

सत्र के पहले दिन से ही विपक्षी सांसदों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस, वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों ने NEET पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। साथ ही राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई गई।

लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और कई बार सदनों को स्थगित करना पड़ा।

CJP आंदोलन की गूंज संसद तक

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP आंदोलन का असर संसद के भीतर भी दिखाई दिया। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार की आलोचना की। कई सांसदों ने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान किया जाता है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

संसद में प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा संदेश

सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों को गंभीर बताते हुए घोषणा की कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों को शीघ्र और कठोर सजा दिलाई जाएगी।

प्रधानमंत्री के इस बयान को सरकार की ओर से युवाओं को आश्वस्त करने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सरकार का विधायी एजेंडा

मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) संशोधन विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, आयकर संशोधन विधेयक, एमएसएमई संशोधन विधेयक और अन्य प्रस्तावित कानून शामिल हैं।

इसके अलावा ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने वाला संशोधन विधेयक भी सरकार के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है।

संसद में विपक्ष की रणनीति

विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल विधेयकों पर चर्चा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सरकार को उन मुद्दों पर भी जवाब देना होगा जिनका सीधा संबंध आम जनता और युवाओं से है।

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने राम मंदिर दान मामले पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया। विपक्ष का कहना है कि संसद जनता की समस्याओं पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकार ने विपक्ष पर लगाया आरोप

केंद्र सरकार ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष पहले से शर्तें रखकर सदन नहीं चलने देना चाहता।

सरकार का कहना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए सदन का सुचारु संचालन आवश्यक है और लगातार व्यवधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

संसद के बाहर भी जारी प्रदर्शन

संसद के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। CJP समर्थकों और विभिन्न छात्र संगठनों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। सुरक्षा के मद्देनज़र संसद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।

दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की, जबकि कुछ मेट्रो स्टेशनों पर भी सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाए गए।

महत्वपूर्ण विधेयकों पर रहेगी नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मानसून सत्र में सरकार जिन विधेयकों को पारित कराना चाहती है, वे आने वाले समय में नीति निर्माण की दिशा तय करेंगे। वहीं विपक्ष की कोशिश रहेगी कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरा जाए।

विशेष रूप से वंदे मातरम् संशोधन विधेयक, शिक्षा सुधारों से जुड़े प्रस्ताव और आर्थिक सुधारों पर संसद में तीखी बहस होने की संभावना है।

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अब आगे क्या?

मानसून सत्र अभी कई सप्ताह तक जारी रहेगा और आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि उसकी मांगों पर चर्चा नहीं होती तो विरोध जारी रहेगा। वहीं सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा कर रही है।

निष्कर्ष

संसद का मानसून सत्र 2026 शुरुआत से ही अत्यंत हंगामेदार रहा है। एक ओर सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष NEET पेपर लीक, राम मंदिर दान विवाद, CJP आंदोलन, महिला आरक्षण और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटा है।

लगातार स्थगन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर बहस और टकराव दोनों जारी रहेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का रास्ता निकलता है या मानसून सत्र इसी तरह विरोध और व्यवधान के बीच आगे बढ़ता है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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