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रेलवे कर्मचारियों को दिवाली का बोनस, भर्ती समेत मोदी कैबिनेट के तीन बड़े फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने लिए अहम निर्णय। रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को पांच साल का विस्तार और IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी।

केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का असर रेलवे कर्मचारियों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों और बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ेगा। सरकार ने रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के उत्पादकता आधारित बोनस को मंजूरी दी है। इसके अलावा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल तक बढ़ाने और IDBI बैंक में हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश को भी मंजूरी दी गई है।

1. रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनसमोदी

कैबिनेट के सबसे अहम फैसलों में रेलवे कर्मचारियों को दिवाली बोनस देना शामिल है। सरकार के मुताबिक, इस निर्णय से करीब 11.40 लाख पात्र रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। बोनस के लिए कुल 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

यह बोनस उत्पादकता से जुड़ा भुगतान यानी प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर बोनस दिया जाएगा। निर्धारित गणना के अनुसार, एक कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपये तक मिल सकते हैं।

इस फैसले का उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों के काम को प्रोत्साहित करना और त्योहार से पहले उन्हें आर्थिक राहत देना है। रेलवे देश में यात्री परिवहन और माल ढुलाई की अहम जिम्मेदारी निभाता है। ट्रेन संचालन, ट्रैक रखरखाव, स्टेशन प्रबंधन और तकनीकी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका रेलवे व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है।

बोनस से कर्मचारियों को त्योहार के दौरान अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। हालांकि, वास्तविक भुगतान संबंधित पात्रता और सरकारी नियमों के अनुसार किया जाएगा।

2. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को पांच साल का विस्तार

कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) से जुड़ा है। सरकार ने इस कार्यक्रम को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत देश के लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसमें बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों जैसे जरूरतमंद वर्गों के लिए पेंशन तथा अन्य सामाजिक सहायता शामिल है।

इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू दिव्यांगजनों की सहायता से संबंधित नियमों में बदलाव है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दिव्यांगता सहायता के लिए पहले लागू 18 वर्ष की आयु संबंधी शर्त को हटाकर जन्म से पात्रता का प्रावधान किया गया है। इससे पात्र बच्चों को भी निर्धारित नियमों के तहत सहायता मिल सकेगी।

इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम और इससे जुड़ी प्रमुख योजनाओं के नाम बदलने को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य सामाजिक सहायता के दायरे को बेहतर बनाना और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

3. IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी

कैबिनेट का तीसरा बड़ा फैसला बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ा है। सरकार ने IDBI बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings को 52,877 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

इस रणनीतिक विनिवेश का उद्देश्य बैंक में नए निवेश और पूंजी की उपलब्धता को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार, इससे वित्तीय सेवा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और कारोबार के विस्तार में मदद मिल सकती है।

IDBI बैंक का भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस फैसले का असर बैंक के स्वामित्व ढांचे और भविष्य की कारोबारी रणनीति पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) संयुक्त रूप से पुनर्गठित बैंक में 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेंगे।

हालांकि, हिस्सेदारी बिक्री की मंजूरी और सौदे की अंतिम प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं। सौदे के पूरा होने से संबंधित आगे की औपचारिकताएं निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएंगी।

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आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

कैबिनेट के ये तीनों फैसले अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। रेलवे बोनस से लाखों कर्मचारियों को त्योहार से पहले आर्थिक सहायता मिलेगी। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार से बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों सहित जरूरतमंद लोगों को सहायता जारी रखने में मदद मिलेगी। वहीं, IDBI बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री से बैंकिंग क्षेत्र में निवेश और पूंजी जुटाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

कुल मिलाकर, मोदी कैबिनेट के इन फैसलों में कर्मचारियों को राहत देने, सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने और वित्तीय क्षेत्र में बदलाव लाने पर जोर दिया गया है। आने वाले समय में इन निर्णयों का वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने पर निर्भर करेगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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