भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद शुरू हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंच चुके हैं। वह मंगलवार, 25 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री और सीमा वार्ता तंत्र में अपने समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) की 25वीं बैठक में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब 2020 के गलवान संघर्ष के बाद संबंधों में आई खटास को कम करने की कोशिशें जारी हैं।
डोभाल की बीजिंग यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS सम्मेलन में भारत आने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में डोभाल-वांग बैठक दोनों देशों के बीच संभावित राजनीतिक संवाद की जमीन तैयार करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
बीजिंग में 25वीं बार आमने-सामने होंगे डोभाल और वांग यी
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधियों का तंत्र वर्ष 2003 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य केवल सीमा पर तत्काल तनाव कम करना ही नहीं, बल्कि सीमा प्रश्न का व्यापक और दीर्घकालिक समाधान तलाशना है। भारत की ओर से अजीत डोभाल इस तंत्र में विशेष प्रतिनिधि हैं, जबकि चीन की ओर से वांग यी यह जिम्मेदारी संभालते हैं।
25वीं बैठक में दोनों पक्ष सीमा विवाद के साथ-साथ सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। हालिया कूटनीतिक संकेतों से यह भी स्पष्ट है कि दोनों देश सीमा पर तनाव को नियंत्रित करने के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
गलवान के बाद रिश्तों में आया था बड़ा तनाव
भारत-चीन संबंधों में सबसे बड़ा संकट जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद आया था। इस घटना में दोनों देशों के सैनिक हताहत हुए और इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय तक भारी सैन्य तैनाती रही।
पूर्वी लद्दाख में लंबे सैन्य गतिरोध ने दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी प्रभावित किया। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की गई। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच LAC पर पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर एक समझ बनी, जिसके बाद कई क्षेत्रों में सैन्य तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
इसके बावजूद सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है। भारत और चीन के बीच लगभग 3,400 किलोमीटर से अधिक लंबी विवादित सीमा है, जिसके विभिन्न हिस्सों को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं।
अरुणाचल प्रदेश भी रहेगा महत्वपूर्ण मुद्दा
डोभाल-वांग वार्ता में अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दे के भी प्रमुखता से उठने की संभावना है। हाल के समय में अरुणाचल सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर भारत ने चिंता जताई है।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य होने के लिए आवश्यक है। दूसरी ओर, चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर अपने दावे करता रहा है, जिसे भारत स्पष्ट रूप से खारिज करता है।
ऐसे में विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत का एक अहम उद्देश्य सीमा पर किसी नए तनाव या टकराव की संभावना को कम करने के लिए प्रभावी संवाद व्यवस्था बनाए रखना हो सकता है।
बीजिंग में डोभाल ने चीनी उपराष्ट्रपति से भी की मुलाकात
25 अगस्त को डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर बातचीत हुई। भारतीय दूतावास के अनुसार, बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति को बढ़ावा देने और भारत-चीन साझेदारी को आगे मजबूत करने पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डोभाल की यात्रा केवल सीमा वार्ता तक सीमित नहीं दिखाई देती। दोनों पक्ष व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को भी स्थिर करने के प्रयास में हैं।
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले अहम बैठक
भारत इस वर्ष BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इसमें शामिल होने की संभावना है। यदि उनकी भारत यात्रा होती है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर हो सकती है।
मोदी और शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और सीमा पर शांति बनाए रखने के महत्व पर चर्चा की थी।
इस पृष्ठभूमि में डोभाल-वांग वार्ता को संभावित शीर्षस्तरीय संपर्क की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
सीमा के साथ आर्थिक रिश्ते भी महत्वपूर्ण
भारत और चीन के संबंध केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और उनके बीच आर्थिक संबंधों का आकार काफी बड़ा है। हालांकि, 2020 के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चीन से जुड़े निवेश और तकनीकी क्षेत्रों में कई तरह के नियंत्रण और जांच व्यवस्थाएं लागू कीं।
हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कुछ आर्थिक और जनसंपर्क संबंधों को सामान्य करने के संकेत मिले हैं। सीधे संपर्क और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी धीरे-धीरे संवाद बढ़ा है। ऐसे में सीमा पर स्थिरता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को सामान्य बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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क्या इस बैठक से निकलेगा कोई बड़ा समाधान?
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 25वीं विशेष प्रतिनिधि बैठक सीमा विवाद के अंतिम समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति कर पाएगी। सीमा विवाद बेहद जटिल है और दोनों देशों के दावे ऐतिहासिक तथा रणनीतिक मुद्दों से जुड़े हुए हैं।
इसलिए तत्काल किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। हालांकि, सीमा पर शांति बनाए रखने, सैन्य टकराव रोकने और संवाद के माध्यम से मतभेदों को नियंत्रित करने के लिहाज से ऐसी बैठकें महत्वपूर्ण हैं।
भारत की प्राथमिकता यह भी रहेगी कि LAC पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो तथा 2020 जैसी स्थिति दोबारा पैदा न हो। चीन के लिए भी भारत के साथ स्थिर संबंध क्षेत्रीय और आर्थिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
NSA अजीत डोभाल का बीजिंग पहुंचना भारत-चीन संबंधों में जारी कूटनीतिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 25 अगस्त को डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में सीमा विवाद, LAC पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
डोभाल की चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से हुई मुलाकात ने भी यह संकेत दिया है कि दोनों पक्ष सीमा सुरक्षा के साथ व्यापक संबंधों पर संवाद बढ़ाना चाहते हैं।
गलवान संघर्ष के छह साल बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन सीमा विवाद अब भी मूल चुनौती बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डोभाल-वांग वार्ता LAC पर स्थायी शांति और दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में कितनी ठोस प्रगति करती है। सितंबर में होने वाला BRICS सम्मेलन और शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अगला बड़ा अवसर हो सकती है।

