संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शरीफ ने कश्मीर, 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया, जबकि भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद और दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी कूटनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया और 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की। भारत ने पाकिस्तान के इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की कथित “दोहरी नीति” से न तो उसे लाभ होगा और न ही दुनिया को।
शहबाज शरीफ ने UN में क्या कहा?
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप ने स्थिति को व्यापक युद्ध में बदलने से रोकने में मदद की।
शरीफ ने ट्रंप के “समय पर हस्तक्षेप” की सराहना करते हुए कहा कि इससे दक्षिण एशिया में बड़ी संख्या में लोगों की जान बची। पाकिस्तान सरकार के अनुसार, उन्होंने भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अपने देश के “आत्मरक्षा के अधिकार” से भी जोड़ा। भारत इन घटनाओं की पाकिस्तान की व्याख्या को स्वीकार नहीं करता।
कश्मीर का मुद्दा फिर UN में उठाया
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विवाद का “न्यायसंगत और उचित समाधान” जरूरी है, ताकि दक्षिण एशिया दोबारा संघर्ष के खतरे की ओर न लौटे।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने का विरोध करता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या क्षेत्रीय मुद्दे के समाधान के साधन के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत ने आतंकवाद को बनाया जवाब का केंद्र
भारत की ओर से जवाब में पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता दी गई। नई दिल्ली का आरोप है कि पाकिस्तान लंबे समय से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने या समर्थन देने वाली ताकतों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करता।
भारत ने पाकिस्तान के उस रुख पर भी सवाल उठाया जिसमें वह एक तरफ UN मंच से शांति और कूटनीति की बात करता है और दूसरी तरफ भारत के खिलाफ गंभीर आरोप लगाता है।
भारत पहले भी UN के विभिन्न मंचों पर यह कह चुका है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में दोनों देशों के बीच भरोसे पर आधारित सहयोग मुश्किल है। भारत के UN मिशन ने पहले कहा है कि आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के बीच सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती।
सिंधु जल संधि पर भी शरीफ की चेतावनी
शहबाज शरीफ ने अपने UN संबोधन में पानी के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को मोड़ने की कोई भी कोशिश “युद्ध की कार्रवाई” मानी जाएगी। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक गंभीर विवाद के रूप में पेश किया है।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि लंबे समय से दोनों देशों के जल संबंधों की आधारशिला रही है। हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के साथ इसके भविष्य और क्रियान्वयन को लेकर विवाद भी गहरा हुआ है।
पाकिस्तान ने खुद को शांति समर्थक बताया
दिलचस्प बात यह है कि UNGA में तीखे भारत-विरोधी बयानों के साथ पाकिस्तान ने खुद को संवाद और कूटनीति का समर्थक भी बताया। शहबाज शरीफ ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात के दौरान कहा कि क्षेत्रीय तनावों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बहुपक्षवाद और UN चार्टर के सिद्धांतों के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ाई में अपने योगदान और क्षेत्रीय शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया है
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भारत-पाकिस्तान के बीच पुराना कूटनीतिक टकराव जारी
UNGA में हुई ताजा बयानबाजी से साफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, आतंकवाद, पानी और 2025 के सैन्य संघर्ष को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है।
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर और क्षेत्रीय सुरक्षा को उठाता रहा है, जबकि भारत आतंकवाद और सीमा पार हिंसा को द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख चुनौती बताता है। दोनों देशों के बीच इन मुद्दों पर दावे और प्रतिदावे जारी हैं।
ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच एक बार फिर भारत और पाकिस्तान की अलग-अलग कूटनीतिक व्याख्याओं का केंद्र बना है। शहबाज शरीफ के भाषण के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के बयानों को उसके आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड के संदर्भ में देखने पर जोर दिया। आगे दोनों देशों के बीच संवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इन विवादित मुद्दों को किस तरह संबोधित करते हैं।

