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नेपाल में तबाही मचाने वाली बाढ़ से 579 मौतें, 2,400 से ज्यादा लापता; ग्लेशियर टूटने के बाद बनी झील ने बढ़ाई नई चिंता,भारत ने 10 टन सहायता और भेजी

नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 26 अगस्त को शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल में अब तक 579 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी मौतें दर्ज की गई हैं। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और करीब 320 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। बचाव दल लगातार मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

यह आपदा नेपाल के रासुवा जिले और भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र के आसपास सबसे ज्यादा विनाशकारी रही। तेज पानी, बर्फ, चट्टानों और भारी मलबे के बहाव ने सड़कें, पुल, इमारतें और सीमा व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे तबाह कर दिए। नेपाल-चीन का प्रमुख रसुवागढ़ी सीमा क्रॉसिंग भी बुरी तरह नष्ट हो गया है। उपग्रह तस्वीरों में बाढ़ के बाद पूरे इलाके की भौगोलिक स्थिति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।

ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही की श्रृंखलानेपाल

वैज्ञानिकों और उपग्रह विश्लेषण के अनुसार इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने से हुई। ग्लेशियर का एक विशाल हिस्सा करीब 1.2 किलोमीटर नीचे गिरा और उसके साथ बर्फ, चट्टान तथा तलछट नदी क्षेत्र में जमा हो गए। इससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ और कुछ समय के लिए एक अस्थायी जलाशय जैसी स्थिति बन गई। बाद में यह अवरोध टूटा और भारी मात्रा में पानी व मलबा नीचे की ओर तेजी से बह निकला।

इस अचानक आए मलबे और पानी के सैलाब ने नदी के रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस घटना की भयावहता केवल भारी बारिश से नहीं, बल्कि ग्लेशियर टूटने, मलबे के जमा होने और अचानक पानी के मुक्त होने की संयुक्त प्रक्रिया से बढ़ी।

नई झील ने बढ़ाई दूसरी बाढ़ की आशंका

पहली आपदा के बाद अब एक नई चुनौती सामने आ गई है। बाढ़ और मलबे के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक नई बैरियर झील बन गई है। इसमें लाखों घन मीटर पानी जमा होने की जानकारी है। शुक्रवार को झील के किनारे से पानी बाहर निकलने की खबर के बाद कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। इसके अलावा ऊपरी क्षेत्र में एक दूसरी झील के तेजी से फैलने की भी जानकारी सामने आई है।

विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि इन झीलों का प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है, तो नीचे के इलाकों में फिर से तेज बाढ़ आ सकती है। इसी खतरे के कारण प्रभावित इलाकों में लोगों और बचाव दलों को ऊंचे तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

बचाव अभियान में मौसम बना सबसे बड़ी बाधा

हजारों सुरक्षाकर्मी और आपदा राहतकर्मी बचाव अभियान में जुटे हैं। लेकिन हिमालयी क्षेत्र में खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें, मलबा और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत कार्य बेहद मुश्किल हो गया है। हेलीकॉप्टरों के जरिए बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश भी मौसम के कारण कई बार प्रभावित हुई है।

रासुवा जिले में एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका ने भी बचाव एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। सुरंगों में एक से डेढ़ मीटर तक मलबा जमा होने की रिपोर्ट है। बचाव दल रस्सियों, टोकरियों और ड्रोन जैसे साधनों की मदद से प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता

नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, तीर्थयात्री और कारोबारी भी मौजूद थे। आपदा के बाद कई भारतीयों से संपर्क टूट गया था। सरकार और भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित नागरिकों का पता लगाने में जुटे हैं।

ताजा रिपोर्टों में 320 भारतीयों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले नेपाल में फंसे पर्यटकों को निकालने के लिए अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल थे। एक अलग बचाव अभियान में त्रिशूली-1 परियोजना से भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया।

भारत सरकार ने नेपाल को राहत और बचाव कार्य में सहायता की पेशकश की है। दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंचा असर

नेपाल में आई इस भयावह बाढ़ का असर सीमा पार भारत में भी देखने को मिला है। बाढ़ के तेज बहाव में बहकर कुछ शव करीब 200 किलोमीटर दूर तक पहुंच गए। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए, जिनके नेपाल से बहकर आने की आशंका जताई गई।

इसके अलावा नेपाल में बाढ़ के कारण भारत-नेपाल सीमा पर व्यापारिक आवाजाही भी प्रभावित हुई है। उत्तर प्रदेश के सोनौली बॉर्डर पर ट्रकों की लंबी कतार लग गई है और यह जाम करीब 16 किलोमीटर तक पहुंच गया। सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने से नेपाल जाने वाले माल की आवाजाही बाधित हुई है।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई हिमालयी आपदाओं की चिंता

इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की बढ़ती संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियरों के पिघलने और अस्थिर होने की घटनाओं पर वैज्ञानिक लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय में ग्लेशियल झीलों की निगरानी, समय पर चेतावनी प्रणाली और सीमा पार आपदा-सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है। ऐसी घटनाओं में कुछ ही मिनटों में नदी का जलस्तर कई मीटर बढ़ सकता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का समय बहुत कम मिलता है।

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नेपाल के सामने बड़ी चुनौती

नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित आबादी तक भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता पहुंचाना है। बाढ़ ने कई क्षेत्रों में सड़क और संचार संपर्क काट दिया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाना कठिन हो रहा है।

सरकार के सामने दूसरी बड़ी चुनौती संभावित दूसरी बाढ़ से निपटना है। नई बनी झीलों और अस्थिर पहाड़ी ढलानों की निगरानी लगातार की जा रही है।

निष्कर्ष

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई यह फ्लैश फ्लड हिमालयी क्षेत्र की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में शामिल हो चुकी है। नेपाल में 579 मौतों और करीब 1,900 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 तक पहुंच गई है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और लगभग 320 भारतीय भी शामिल हैं।

ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही के बाद अब नई बनी झीलें और खराब मौसम राहत अभियान के सामने नई चुनौती बन गए हैं। ऐसे में नेपाल के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। बचाव अभियान के साथ-साथ संभावित दूसरी बाढ़ को रोकने और लाखों प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने बनी हुई है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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