नागालैंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। राज्य के मोन जिले में रविवार तड़के कई स्थानों पर हुए भीषण भूस्खलनों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य घायल हो गए। कई मकान मलबे में दब गए और अनेक परिवार बेघर हो गए। प्रशासन ने आशंका जताई है कि कुछ लोग अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है।
नागालैंड में भारी बारिश बनी आपदा की वजह
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई दिनों से मोन जिले और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही थी। बारिश के कारण पहाड़ियों की मिट्टी कमजोर हो गई और रविवार सुबह कई स्थानों पर अचानक भूस्खलन शुरू हो गया।
कुछ ही मिनटों में भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टानें और पेड़ नीचे की ओर आ गए, जिससे कई घर और सड़कें प्रभावित हुईं। स्थानीय लोगों को संभलने का भी समय नहीं मिला और कई परिवार मलबे में दब गए।
नागालैंड में कई घर पूरी तरह तबाह
भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में दर्जनों मकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कुछ घर पूरी तरह मलबे में समा गए, जबकि कई अन्य आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, भारी बारिश के कारण 40 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
राहत एवं बचाव अभियान जारी
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, स्थानीय स्वयंसेवकों और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
बचावकर्मी जेसीबी मशीनों, खुदाई उपकरणों और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं। लगातार बारिश और अस्थिर पहाड़ी ढलानों के कारण राहत अभियान में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
अस्पतालों में भर्ती घायल
भूस्खलन में घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि अन्य का उपचार जारी है।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है और अतिरिक्त चिकित्सा दलों को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
प्रशासन का कहना है कि अभी भी कुछ लोगों के लापता होने की सूचना है। कई स्थानों पर मलबा काफी गहरा होने के कारण खोज अभियान में समय लग रहा है।
अधिकारियों ने आशंका जताई है कि जैसे-जैसे मलबा हटेगा, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। इसी कारण बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया है।
नागालैंड में सड़क संपर्क प्रभावित
भूस्खलन के कारण कई प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। पहाड़ियों से गिरे पत्थरों और मिट्टी ने यातायात पूरी तरह रोक दिया है।लोक निर्माण विभाग की टीमें सड़कों को साफ करने में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण काम प्रभावित हो रहा है।
सड़क संपर्क टूटने से राहत सामग्री और भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में भी कठिनाई आ रही है।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है।
मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
नागालैंड सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें और खराब मौसम के दौरान पहाड़ी मार्गों पर यात्रा न करें।
स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून का असर
पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में इस वर्ष मानसून सामान्य से अधिक सक्रिय रहा है। नागालैंड, असम, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई और अत्यधिक वर्षा के कारण ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
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विशेषज्ञों की राय
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों की मिट्टी पानी से संतृप्त हो जाती है, जिससे उसकी पकड़ कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में हल्का कंपन या अतिरिक्त वर्षा भी बड़े भूस्खलन का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों की वैज्ञानिक मैपिंग, मजबूत जल निकासी व्यवस्था, ढलानों का संरक्षण और समय पर चेतावनी प्रणाली विकसित करना भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक है।
निष्कर्ष
नागालैंड के मोन जिले में लगातार बारिश के कारण हुए भीषण भूस्खलन ने एक बार फिर पहाड़ी राज्यों में मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाले खतरे की गंभीरता को उजागर कर दिया है। इस हादसे में अब तक आठ लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है। प्रशासन को आशंका है कि मलबे में और लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए खोज अभियान तेज कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में वैज्ञानिक योजना, बेहतर आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी प्रणाली और सुरक्षित निर्माण मानकों को अपनाना भविष्य में ऐसी त्रासदियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बेहद आवश्यक होगा।

