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अगर यह हत्या नहीं तो क्या है?’: दिल्ली सत्य निकेतन PG हादसे में IAS-CA बनने के सपने मलबे में दबे

पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत के अचानक ढहने से सात लोगों की मौत ने राजधानी को झकझोर दिया है। हादसे में जान गंवाने वालों में पांच युवा छात्र भी शामिल हैं, जो दिल्ली में बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर रह रहे थे। किसी का सपना IAS अधिकारी बनने का था, कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहता था, तो कोई कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर अपने करियर को नई दिशा देने में जुटा था। लेकिन रविवार को इमारत के मलबे ने इन युवाओं के सपनों के साथ उनके परिवारों की उम्मीदों को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में गहरा आक्रोश है। उनका सवाल है कि यदि किसी जर्जर और असुरक्षित इमारत में युवाओं को रहने दिया गया और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? कुछ परिजनों ने दर्द और गुस्से में सवाल उठाया कि “अगर यह हत्या नहीं तो क्या है?”

दिल्ली में पढ़कर IAS बनने का सपना देख रहा था अक्षतदिल्ली

मृतकों में अक्षत यादव का नाम भी शामिल है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था और भविष्य में IAS अधिकारी बनने का सपना देखता था। परिवार के मुताबिक, पढ़ाई में अच्छा अक्षत दिल्ली इसी उद्देश्य से आया था कि वह अपनी पढ़ाई के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर सके।

अक्षत करीब दो वर्षों से दिल्ली में रह रहा था और लगभग एक साल से इसी PG में रह रहा था। वह PG के पहले तल पर रहता था और इसके लिए करीब 18 हजार रुपये मासिक किराया देता था। हादसे से दो दिन पहले ही वह मध्य प्रदेश स्थित अपने घर से रक्षाबंधन मनाकर दिल्ली लौटा था। हादसे से कुछ घंटे पहले उसने परिवार से वीडियो कॉल पर बात भी की थी। तब सब कुछ सामान्य था। कुछ ही घंटे बाद परिवार को उसके PG के ढहने की खबर मिली।

अक्षत की पहचान AIIMS के शवगृह में उसकी मां ने गर्दन पर मौजूद तिल और पैर की पुरानी सर्जरी के निशान से की। परिवार के लिए यह पहचान का क्षण बेहद पीड़ादायक था। जिस बेटे के भविष्य की योजनाएं परिवार बना रहा था, उसका शव उन्हें पहचानना पड़ा।

युवराज के पीछे रह गया बीमार पिता

20 वर्षीय युवराज सोनी भी हादसे का शिकार हुआ। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स का छात्र था। उसके परिवार के अनुसार वह शांत स्वभाव का और पढ़ाई में गंभीर युवक था।

हादसे के समय युवराज अपने दोस्त गुनजन से फोन पर बात कर रहा था। बातचीत के बीच अचानक फोन कट गया। दोस्त ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद परिवार को हादसे की सूचना मिली और वे दिल्ली पहुंचे।

युवराज के पिता पहले से बीमार हैं और घटना की खबर सुनकर उनकी तबीयत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार ने अभी तक उन्हें यह नहीं बताया है कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिजनों को डर है कि यह सदमा उनकी हालत और खराब कर सकता है।

दिल्ली में CA बनने की तैयारी कर रहा था अर्पित

अर्पित जज के परिवार की कहानी भी उतनी ही दर्दनाक है। अर्पित मध्य प्रदेश के देवास का रहने वाला था और दिल्ली में रहकर पढ़ाई के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहा था। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेज में बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था।

अर्पित रक्षाबंधन के मौके पर अपने परिवार के साथ समय बिताने के बाद रविवार सुबह करीब आठ बजे दिल्ली वापस लौटा था। परिवार के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि कुछ ही घंटों बाद वह उन्हें हमेशा के लिए छोड़ जाएगा।

जब अर्पित की मां के फोन का जवाब नहीं मिला तो परिवार को पहले लगा कि वह सो रहा होगा। बाद में उन्हें PG हादसे की जानकारी मिली। परिवार दिल्ली पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसकी पहचान अस्पताल में मौजूद जन्मचिह्नों से की गई।

परिवार ने अर्पित की आंखों की कॉर्निया दान करने का फैसला किया। परिजनों का कहना था कि शायद उसकी आंखों के जरिए किसी और की जिंदगी में रोशनी आ सके। इस तरह असहनीय दुख के बीच परिवार ने मानवता की एक मिसाल भी पेश की।

अंतिम समय में बदल गया पवन का फैसला

17 वर्षीय पवन कुमार की कहानी हादसे की अनिश्चितता को सामने लाती है। उत्तर प्रदेश के औरैया का रहने वाला पवन कंप्यूटर साइंस और गणित की पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक हैं और परिवार में उसकी चार बहनें हैं।

परिवार के मुताबिक पवन ने शनिवार को अपने चचेरे भाई के घर जाने की योजना बनाई थी और रविवार तक वहीं रहने का विचार था। लेकिन अंतिम समय में उसने अपना कार्यक्रम बदल दिया। वह PG में ही रुक गया। अगले दिन इमारत ढह गई और पवन मलबे में फंस गया।

परिवार घंटों तक इस उम्मीद में इंतजार करता रहा कि शायद उसे जीवित निकाल लिया गया हो। घटनास्थल पर कुछ लोगों से मिली जानकारी ने उनकी उम्मीद भी बनाए रखी। लेकिन रात करीब दस बजे उन्हें पता चला कि पवन की मौत हो चुकी है। अस्पताल में उसके पिता अपने बेटे के शव के सामने टूट गए।

इमारत की हालत और सुरक्षा पर गंभीर सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत की सुरक्षा को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार यह कई दशक पुरानी पांच मंजिला इमारत थी। इसमें कथित तौर पर पर्याप्त संरचनात्मक सपोर्ट नहीं था। इमारत में मरम्मत और बेसमेंट से जुड़े काम भी चल रहे थे। बेसमेंट में लंबे समय से पानी जमा होने की समस्या बताई गई है।

इन परिस्थितियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या PG को छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसकी संरचनात्मक सुरक्षा की पर्याप्त जांच की गई थी। राजधानी के सत्य निकेतन जैसे छात्र इलाकों में बड़ी संख्या में युवा निजी PG में रहते हैं। ऐसे में एक इमारत का गिरना केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे छात्र आवास तंत्र की सुरक्षा पर सवाल है।

भवन मालिक गिरफ्तार, अधिकारियों पर भी कार्रवाई

हादसे के बाद पुलिस ने PG संचालक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता शामिल हैं। अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली।

दूसरी ओर, नगर निगम ने भी कार्रवाई करते हुए दक्षिण क्षेत्र के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर भी शामिल हैं। इससे साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की कोशिश शुरू हो गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस हादसे को लेकर जनहित याचिका पहुंची है। इसमें मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने, छात्र आवासों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

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अब सभी PG इमारतों की सुरक्षा पर नजर

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने PG हब में स्थित इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। सरकार सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों, विशेषकर PG और छात्र आवासों के लिए नई सुरक्षा नीति बनाने पर भी विचार कर रही है।

इस हादसे ने एक बार फिर दिखाया है कि दिल्ली जैसे महानगर में हजारों छात्र जिन निजी आवासों में रहते हैं, उनकी सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। केवल किराया वसूलना पर्याप्त नहीं; भवन की संरचनात्मक मजबूती, आपातकालीन निकासी, अग्नि सुरक्षा और नियमित निरीक्षण भी जरूरी हैं।

निष्कर्ष

सत्य निकेतन की ढही इमारत के मलबे में केवल सात जिंदगियां नहीं दबीं, बल्कि कई परिवारों के सपने भी टूट गए। अक्षत IAS बनना चाहता था, अर्पित CA की तैयारी कर रहा था, युवराज अपने बीमार पिता का सहारा था और पवन अपने भविष्य की पढ़ाई में जुटा था। इन युवाओं की मौत ने दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब जांच और अदालत की कार्रवाई यह तय करेगी कि इस त्रासदी के लिए व्यक्तिगत और प्रशासनिक स्तर पर कौन जिम्मेदार है। लेकिन परिवारों का सवाल इससे भी बड़ा है—क्या इन मौतों को केवल एक हादसा कहकर भुलाया जा सकता है, या ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिसमें किसी दूसरे परिवार को अपने बच्चे की पहचान मलबे और शवगृह में न करनी पड़े?

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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