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दिल्ली में बढ़ रहा डेंगू का खतरा, 311 मामले सामने आने से चिंता बढ़ी; मच्छर के काटने के कितने दिन बाद दिखते हैं लक्षण?

राजधानी दिल्ली में मानसून के बीच मच्छरजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में वृद्धि ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली में अब तक डेंगू के 311, मलेरिया के 119 और चिकनगुनिया के 22 मामले सामने आ चुके हैं। बढ़ते मामलों के बीच नगर निगम की फॉगिंग और दवा छिड़काव व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव और जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। यही वजह है कि बारिश के साथ डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर एडीज एजिप्टी मच्छर डेंगू वायरस के प्रसार में अहम भूमिका निभाता है। घरों के आसपास जमा साफ पानी, कूलर, टंकी, गमले, पुराने टायर और खुले कंटेनर मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकते हैं।

दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलेदिल्ली

राजधानी में डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में पार्षदों ने फॉगिंग और दवा छिड़काव को लेकर अधिकारियों पर सवाल उठाए। कुछ पार्षदों का आरोप है कि कई इलाकों में नियमित फॉगिंग नहीं हो रही है और उपलब्ध मशीनों में से कई खराब हैं। दवाओं और उन्हें संचालित करने वाले कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।

MCD अधिकारियों ने हालांकि जमीनी स्तर पर मच्छर नियंत्रण अभियान चलाए जाने की बात कही है। लेकिन पार्षदों की ओर से इन दावों पर सवाल उठाए जाने के बाद यह स्पष्ट है कि राजधानी में मच्छर नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर और अधिक प्रयास की जरूरत महसूस की जा रही है।

मच्छर के काटने के कितने दिन बाद दिखते हैं डेंगू के लक्षण?

डेंगू को लेकर सबसे आम सवाल यही है कि संक्रमित मच्छर के काटने के तुरंत बाद बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं या कुछ दिनों बाद। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद सामने आते हैं।

इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को संक्रमित मच्छर ने काट लिया है तो जरूरी नहीं कि उसी दिन या अगले दिन बुखार शुरू हो जाए। वायरस को शरीर में अपनी संख्या बढ़ाने और बीमारी के लक्षण पैदा करने में कुछ समय लग सकता है।

इसीलिए मच्छर के काटने के बाद आने वाले दिनों में यदि तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द या शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डेंगू के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

डेंगू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी लग सकती है। WHO के अनुसार तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मतली या उल्टी, ग्रंथियों में सूजन, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

हर संक्रमित व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में संक्रमण हल्का रह सकता है, जबकि कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए लगातार तेज बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

कब बढ़ जाता है खतरा?

डेंगू में कुछ चेतावनी संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार पेट में तेज दर्द या दबाव, लगातार उल्टी, शरीर में तरल पदार्थ जमा होना, श्लेष्म झिल्ली से खून आना, अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी और लिवर बढ़ना गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत हो सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

प्लेटलेट कम होना ही डेंगू की पहचान नहीं

डेंगू को लेकर आम लोगों में एक धारणा है कि प्लेटलेट कम होना ही बीमारी की सबसे बड़ी पहचान है। हालांकि केवल प्लेटलेट की संख्या के आधार पर डेंगू की गंभीरता तय नहीं की जा सकती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, जांच रिपोर्ट और बीमारी की पूरी स्थिति को देखकर उपचार की दिशा तय करते हैं।

इसलिए बुखार होने पर खुद से दवा लेना या केवल प्लेटलेट जांच के आधार पर बीमारी का आकलन करना उचित नहीं है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच कराना अधिक सुरक्षित तरीका है।

घर के आसपास जमा पानी सबसे बड़ा खतरा

डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। इसके लिए घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलना, पानी की टंकियों को ढककर रखना, गमलों और पुराने बर्तनों में पानी जमा नहीं होने देना और कबाड़ में पड़े टायर या कंटेनर हटाना जरूरी है।

मच्छर से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और जरूरत के अनुसार मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करना भी उपयोगी हो सकता है।

दिल्ली में स्कूलों और संस्थानों को भी सतर्क रहने की सलाह

मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच MCD ने हाल में दिल्ली के सरकारी और निजी स्कूलों को भी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के उपाय तेज करने की सलाह दी है। स्कूल परिसरों में पानी जमा न होने देने और मच्छरों के प्रजनन स्थल बनने से रोकने पर जोर दिया गया है।

इससे स्पष्ट है कि डेंगू की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। घर, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

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बारिश के बाद और बढ़ सकता है खतरा

दिल्ली में बारिश के बाद खाली प्लॉट, निर्माण स्थलों और घरों के आसपास जमा पानी मच्छरों की संख्या बढ़ा सकता है। इसलिए बारिश रुकने के बाद भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी स्थान पर पानी कई दिनों तक जमा रहता है तो वहां मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू की रोकथाम में केवल फॉगिंग पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मच्छरों के लार्वा को खत्म करना और उनके प्रजनन स्थल को समाप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलों ने मानसून के बीच स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में 311 डेंगू मामले सामने आ चुके हैं, जबकि मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले भी दर्ज किए गए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संक्रमित मच्छर के काटने के तुरंत बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। WHO के अनुसार बीमारी के लक्षण आम तौर पर 4 से 10 दिन बाद सामने आते हैं।

इसलिए तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, उल्टी या चकत्ते जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी या रक्तस्राव जैसे चेतावनी संकेत दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

मानसून में डेंगू से बचाव की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सामूहिक है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करना और बीमारी के शुरुआती संकेतों पर समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना ही गंभीर संक्रमण के खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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