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ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में होने वाला है बड़ा बदलाव, जानिए क्या-क्या हो जाएगा मुफ्त और कहां होगी सख्ती?

देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और उसमें बदलाव कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें लाइसेंस से जुड़ी कुछ सेवाओं को मुफ्त करने, आवेदन के निपटारे की समयसीमा तय करने और सुरक्षित ड्राइविंग की परीक्षा को अधिक कठिन बनाने जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं।

ध्यान दें: 28 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये बदलाव प्रस्तावित नियमों का हिस्सा हैं। इन्हें अंतिम रूप देकर आधिकारिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही लागू किया जाएगा। इसलिए फिलहाल इन्हें लागू नियम समझना सही नहीं होगा।

ड्राइविंग लाइसेंस में कौन-कौन सी सेवाएं होंगी मुफ्त?ड्राइविंग लाइसेंस

नाम, पता और मोबाइल नंबर बदलने पर राहत

प्रस्ताव के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस में दर्ज नाम या अन्य व्यक्तिगत विवरण में बदलाव कराने पर लगने वाला शुल्क समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, लाइसेंस में पता बदलने, मोबाइल नंबर अपडेट करने और ईमेल आईडी में सुधार कराने की सुविधा भी बिना शुल्क उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

आधार से ऑनलाइन सेवाओं पर नहीं लगेगा शुल्क

मसौदे में आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त की जाने वाली निर्धारित सेवाओं पर शुल्क समाप्त करने का भी प्रस्ताव है। इससे लोगों को लाइसेंस संबंधी काम कराने के लिए अनावश्यक खर्च से राहत मिल सकती है।

वाहन के पंजीकरण रिकॉर्ड में निवास स्थान बदलने से संबंधित कुछ शुल्क और एनओसी जमा करने में देरी पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, नवीनीकरण कराने या हर प्रकार की परिवहन सेवा के लिए सभी शुल्क समाप्त हो जाएंगे। मुफ्त सेवाओं का दायरा अंतिम नियमों से स्पष्ट होगा।

आवेदन के निपटारे के लिए तय होगी समयसीमा

15 दिनों में देना होगा जवाब

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, लाइसेंस में व्यक्तिगत विवरण बदलने के आवेदन पर संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि आवेदन अस्वीकार किया जाता है, तो उसके कारण लिखित रूप में बताने होंगे और आवेदक को इसकी सूचना देनी होगी।

पता बदलने के आवेदन पर 30 दिनों का नियम

यदि पते में बदलाव के आवेदन पर 30 दिनों तक न तो मंजूरी दी जाती है और न ही उसे अस्वीकार किया जाता है, तो प्रस्ताव के अनुसार उसे स्वीकृत माना जा सकता है।

इस व्यवस्था से आरटीओ कार्यालयों में लंबित आवेदनों की समस्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह सुविधा विशेष रूप से पते में बदलाव के आवेदन से संबंधित है, न कि प्रत्येक प्रकार के आवेदन से।

 लर्निंग लाइसेंस की प्रक्रिया होगी सख्त

पास होने के लिए लाने होंगे 75 प्रतिशत अंक

नए प्रस्ताव में सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन ट्यूटोरियल की परीक्षा का न्यूनतम उत्तीर्ण अंक 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की बात कही गई है। यानी आवेदकों को पहले की तुलना में अधिक अंक प्राप्त करने होंगे।

कम से कम 30 मिनट का ट्यूटोरियल

प्रस्ताव के अनुसार, सुरक्षित ड्राइविंग का ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट का होना चाहिए। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और जिम्मेदार ड्राइविंग के प्रति लोगों की समझ बढ़ाना है।

लर्निंग लाइसेंस के लिए निर्धारित ट्यूटोरियल पूरा करने की समयसीमा में भी बदलाव प्रस्तावित है। इससे आवेदन प्रक्रिया में समयसीमा से जुड़े नियम संशोधित हो सकते हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड में भी होंगे बदलाव

क्यूआर कोड और नई जानकारी

प्रस्ताव में लाइसेंस को लैमिनेटेड या पीवीसी कार्ड के रूप में जारी करने और नवीनीकरण के दौरान भी निर्धारित प्रारूप अपनाने की बात कही गई है। लाइसेंस के मशीन-रीडेबल हिस्से को क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था में बदलने का प्रस्ताव है।

नए प्रारूप में रक्त समूह, मोबाइल नंबर, आपातकालीन संपर्क और अंगदान से संबंधित जानकारी जैसी अतिरिक्त जानकारियां शामिल करने की योजना है। भारतीय और विदेशी नागरिकों के लाइसेंस कार्ड के लिए अलग-अलग प्रारूप भी प्रस्तावित हैं।

इससे पहचान और आवश्यक जानकारी तक पहुंचने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। हालांकि, व्यक्तिगत और चिकित्सकीय जानकारी के इस्तेमाल से संबंधित अंतिम प्रावधानों को समझना भी जरूरी होगा।

 दस्तावेजों के नियमों में भी होगा बदलाव

पहचान और पते के प्रमाण के लिए विकल्प

मसौदे में पहचान, उम्र और पते के प्रमाण के लिए स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची में बदलाव प्रस्तावित है। इसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पैन कार्ड और कुछ सरकारी पहचान पत्र शामिल हैं।

इसके अलावा, तीन महीने से अधिक पुराने न होने वाले बिजली और घरेलू गैस बिल को पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव है। विदेशी आवेदकों के लिए भारत में वैध रूप से रहने का प्रमाण भी आवश्यक हो सकता है।

आवेदकों को आवेदन करने से पहले संबंधित सेवा के लिए मान्य दस्तावेजों की अंतिम सूची की जांच करनी चाहिए।

वाहन की श्रेणी सरेंडर करने पर लगेगी पाबंदी

प्रस्ताव में ड्राइविंग लाइसेंस से किसी वाहन श्रेणी को स्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया भी शामिल है। आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित श्रेणी को लाइसेंस से हटाने का प्रावधान प्रस्तावित है।

इसके साथ ही, जिस श्रेणी को स्थायी रूप से सरेंडर किया गया है, उसके लिए एक वर्ष तक दोबारा लर्निंग लाइसेंस या ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

कब से लागू होंगे नए नियम?

मंत्रालय ने मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। निर्धारित अवधि में प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार नियमों को अंतिम रूप दे सकती है। अंतिम अधिसूचना में निर्धारित तारीख से ही संबंधित बदलाव लागू होंगे।

निष्कर्ष

ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में प्रस्तावित बदलाव आम लोगों को कुछ सेवाओं में शुल्क से राहत दे सकते हैं और आरटीओ में आवेदन निपटाने की प्रक्रिया को तेज बना सकते हैं। दूसरी ओर, सुरक्षित ड्राइविंग ट्यूटोरियल में 75 प्रतिशत अंक की शर्त और अन्य प्रावधानों से प्रक्रिया अधिक सख्त हो सकती है।

फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि वाहन चालक और लाइसेंस बनवाने वाले लोग इन प्रस्तावों को अंतिम नियम न समझें। आवेदन या नवीनीकरण कराने से पहले सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और संबंधित परिवहन विभाग की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।

 

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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