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भारत में डार्क वेब चलाने के क्या नियम हैं? जानिए कानून क्या कहता है?

इंटरनेट पर प्राइवेसी और गुमनामी को लेकर लोगों की जिज्ञासा लगातार बढ़ रही है, और इसी बीच डार्क वेब को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि क्या यह कानूनी है। Dark Web Access Illegal in India है या नहीं, यह जानना हर इंटरनेट यूजर के लिए जरूरी हो गया है।

बहुत से लोग यह मानकर चलते हैं कि टोर ब्राउज़र खोलना या डार्क वेब पर जाना अपने आप में एक अपराध है, जबकि असल कानूनी स्थिति कुछ और ही है। अगर आप भी इस भ्रम को दूर करना चाहते हैं, तो यह गाइड आपके लिए ही है।

Dark Web है क्या?

सीधे शब्दों में कहें तो इंटरनेट का वह हिस्सा जो सामान्य सर्च इंजन पर नजर नहीं आता और सिर्फ टोर जैसे खास ब्राउज़र से खुलता है, उसे डार्क वेब कहा जाता है। यहां यूजर की पहचान और लोकेशन दोनों छिपी रहती है। इसका इस्तेमाल पत्रकार, शोधकर्ता और प्राइवेसी को लेकर सतर्क लोग भी करते हैं, वहीं कुछ लोग इसे गलत मकसद के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।

क्या Dark Web Access India में Illegal है?

साफ शब्दों में जवाब है नहीं। सिर्फ टोर ब्राउज़र खोलना या डार्क वेब पर जाना भारत में गैरकानूनी नहीं माना जाता। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इंटरनेट तक पहुंच को भी मौलिक अधिकार का हिस्सा माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में यह साफ कर दिया था कि इंटरनेट इस्तेमाल करने का अधिकार अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है। इसी तरह पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में निजता के अधिकार को भी मान्यता दी गई थी।

Dark Web कब गैरकानूनी बन जाता है?

यहीं पर असली फर्क समझना जरूरी है। डार्क वेब सिर्फ एक तकनीक है, लेकिन उस पर की जाने वाली कुछ गतिविधियां भारतीय कानून के तहत सख्त अपराध मानी जाती हैं। नशीले पदार्थ या हथियार खरीदना, हैकिंग सेवाएं लेना, चोरी का डेटा खरीदना और बाल शोषण से जुड़ा कंटेंट देखना, ये सभी गतिविधियां सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और एनडीपीएस एक्ट जैसे कानूनों के तहत दंडनीय हैं।

यानी सीधी भाषा में समझें तो मोबाइल फोन रखना जैसे गैरकानूनी नहीं है, लेकिन उसी फोन से धोखाधड़ी करना अपराध है। डार्क वेब के साथ भी कानून का यही सिद्धांत लागू होता है।

Dark Web
Dark Web

सुरक्षित रहने के लिए क्या ध्यान रखें

सबसे पहली बात, किसी भी अनजान मार्केटप्लेस से सामान खरीदने या बेचने से बचें। दूसरी बात, ऐसी किसी भी वेबसाइट पर न जाएं जो बच्चों के शोषण से जुड़ा कंटेंट दिखाती हो, क्योंकि सिर्फ इसे देखना भी गंभीर अपराध माना जाता है। अगर कभी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो साइबर क्राइम पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज करना ही सबसे सही कदम है।

अगर आप इंटरनेट सुरक्षा से जुड़े इस तरह के विषयों में रुचि रखते हैं, तो VPN क्या है वाला लेख भी आपके काम आएगा। ऑनलाइन प्राइवेसी को बेहतर समझने के लिए Online Privacy कैसे सुरक्षित रखें, यह पढ़ना भी फायदेमंद रहेगा। वहीं प्रॉक्सी सर्वर की जानकारी के लिए Proxy Server क्या है वाला लेख भी काम का साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या Dark Web डाउनलोड करना भारत में गैरकानूनी है?

नहीं, टोर ब्राउज़र डाउनलोड करना और इस्तेमाल करना भारत में पूरी तरह कानूनी है।

2. क्या पुलिस सिर्फ Dark Web खोलने पर गिरफ्तार कर सकती है?

नहीं, सिर्फ डार्क वेब खोलने पर कार्रवाई नहीं होती, लेकिन उस पर की गई गैरकानूनी गतिविधि के सबूत मिलने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

3. क्या वीपीएन के साथ Dark Web इस्तेमाल करना ज्यादा जोखिम भरा है?

नहीं, वीपीएन प्राइवेसी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन गैरकानूनी गतिविधि किसी भी टूल के साथ की जाए, वह अपराध ही रहती है।

4. भारत में डार्क वेब से जुड़े मामलों की जांच कौन करता है?

साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच आमतौर पर राज्य पुलिस की साइबर सेल और गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली टीमें करती हैं। इस विषय पर और विस्तृत कानूनी जानकारी इस लेख में दी गई है।

आगे और समाचार पढ़ें

Dark Web Access Illegal in India से जुड़ी जानकारी के अलावा, ये अन्य बड़ी खबरें भी पढ़ें: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से जुड़ी ताजा खबर, Cloud Computing Types से जुड़ी पूरी गाइड, और मुंबई के Jio World Plaza में फर्जी पहचान मामले की खबर

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट्स/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे कानूनी सलाह न समझा जाए।

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