तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के हिरासत में लिए जाने, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति और कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। अन्नामलाई ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन आज सवाल उठाने वालों को विदेशी एजेंट तक कह दिया जाता है।
अन्नामलाई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में CJP के प्रदर्शन और उसके नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उनके बयान के बाद बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताना और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना गलत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को राष्ट्रविरोधी या विदेशी ताकतों से प्रभावित बताकर उनके मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने वर्ष 2011 में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें मोदी ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी। अन्नामलाई ने कहा कि उस समय शांतिपूर्ण प्रदर्शन के समर्थन में दिया गया बयान सही था और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना आज भी उतना ही जरूरी है।
अन्नामलाई ने सवाल उठाया कि जब कोई सरकार की कार्रवाई में कानून की उचित प्रक्रिया के उल्लंघन की आशंका जताता है, तो उसके सवालों का जवाब देने के बजाय उसे अलग-अलग नामों से क्यों पुकारा जाता है।
जंतर-मंतर और हिरासत प्रक्रिया पर सवाल
अन्नामलाई ने केंद्र सरकार के सामने कई सवाल रखे। उन्होंने पूछा कि CJP की ओर से प्रदर्शन की अनुमति मांगे जाने के बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला किस आधार पर लिया गया।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने और निवारक हिरासत से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष है।
इसके अलावा, उन्होंने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए CJP सदस्यों की जमानत प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। अन्नामलाई ने पूछा कि जमानत के लिए पेश किए गए आठ जमानतदारों को कथित तौर पर क्यों अस्वीकार किया गया और सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी की भूमिका पर सवाल क्यों नहीं उठने चाहिए।
उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल और मानक संचालन प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोपों पर भी जवाब मांगा। हालांकि, इन आरोपों की स्थिति और जांच के निष्कर्षों को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
CJP के प्रदर्शन के तरीके से सहमत नहीं, लेकिन अधिकार का समर्थन
अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि वह CJP के प्रदर्शन के सभी तरीकों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने संगठन की कुछ रणनीतियों को गलत बताते हुए कहा कि किसी संगठन के तरीकों से असहमति होने का अर्थ यह नहीं है कि उससे विरोध करने का अधिकार छीन लिया जाए।
उनका कहना है कि यदि कोई संगठन किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस करना चाहता है या विरोध प्रदर्शन करना चाहता है, तो उसे लोकतांत्रिक दायरे में अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। सरकार को ऐसे सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि केवल विरोध करने वालों की आलोचना करनी चाहिए।
अन्नामलाई ने यह भी सवाल उठाया कि क्या बीजेपी वास्तव में CJP का विरोध कर रही है या उसकी गतिविधियों को लगातार चर्चा में लाकर उसे मुफ्त प्रचार दे रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इस घटनाक्रम से विपक्षी दलों के वोटों को प्रभावित करने की राजनीतिक रणनीति तो नहीं जुड़ी है।
बीजेपी ने भी दिया जवाब
अन्नामलाई के बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है। पार्टी के तमिलनाडु मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का समर्थन करते थे, लेकिन बीजेपी छोड़ने के बाद उनका रुख बदल गया है।
बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि यदि प्रदर्शनकारी कानून और निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो पुलिस को कार्रवाई करने का अधिकार है। पार्टी ने अन्नामलाई के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
गौरतलब है कि अन्नामलाई ने 5 जून 2026 को बीजेपी छोड़ दी थी। इसके बाद से उनके राजनीतिक बयानों को लेकर पार्टी और उनके बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं।
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लोकतांत्रिक अधिकारों पर नई बहस
इस पूरे मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ अन्नामलाई सरकार से जवाबदेही और कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं बीजेपी का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार के साथ कानून का पालन करना भी जरूरी है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार अन्नामलाई की ओर से उठाए गए सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और CJP से जुड़े मामलों में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

