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‘अमेरिका किसे ब्लैकमेल कर रहा है?’ एपस्टीन–पुरी की तस्वीर पर राहुल गांधी का सवाल, फोटो जारी होने के समय पर उठे विवाद

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की तस्वीर को लेकर केंद्र सरकार तथा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने इस मामले को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि आखिर अमेरिका किसे ब्लैकमेल कर रहा है? उनके इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि रुबियो मुंबई आते हैं और अमेरिकी न्याय विभाग एपस्टीन तथा हरदीप पुरी की तस्वीर जारी करता है। इसके बाद उन्होंने बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं से सवाल किया कि उनके हिसाब से अमेरिका किस देशविरोधी गद्दार को ब्लैकमेल कर रहा है?

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के संबंधों, संभावित व्यापार समझौते तथा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों को लेकर चर्चा जारी है। कांग्रेस इस घटनाक्रम के समय और इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठा रही है।

हालांकि, राहुल गांधी के बयान में ब्लैकमेलिंग की आशंका जताई गई है, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि अमेरिका किसी भारतीय नेता को ब्लैकमेल कर रहा है।

क्या है एपस्टीन–पुरी तस्वीर का मामला?राहुल

जेफ्री एपस्टीन अमेरिका का एक वित्तीय कारोबारी था, जिसके खिलाफ नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और यौन तस्करी से जुड़े गंभीर मामले सामने आए थे। वर्ष 2019 में मुकदमे की प्रतीक्षा के दौरान न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई थी।

एपस्टीन के संपर्क में कई प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों, कारोबारियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के होने की जानकारी सामने आई थी। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए दस्तावेजों, ईमेल और अन्य रिकॉर्ड को आम तौर पर ‘एपस्टीन फाइल्स’ कहा जाता है।

इन्हीं दस्तावेजों से जुड़ी हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन की एक तस्वीर हाल में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह तस्वीर अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जनवरी में जारी की गई सामग्री का हिस्सा थी, जबकि अक्टूबर में इसके दोबारा व्यापक रूप से चर्चा में आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।

इसलिए तस्वीर के पहली बार जारी होने और हाल में उसके वायरल होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

हरदीप सिंह पुरी ने क्या सफाई दी थी?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इससे पहले एपस्टीन से मुलाकातों की बात स्वीकार की थी। उन्होंने फरवरी में कहा था कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें सीमित थीं और उनका संबंध पेशेवर गतिविधियों से था।

पुरी के अनुसार, न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट) से जुड़े अपने काम के दौरान उनकी एपस्टीन से कुछ मुलाकातें हुई थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इन मुलाकातों का एपस्टीन के आपराधिक कृत्यों से कोई संबंध नहीं था।

कांग्रेस ने हालांकि इन स्पष्टीकरणों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं ने कथित ईमेल संवादों और मुलाकातों की संख्या का हवाला देते हुए सरकार से पूरे मामले पर विस्तृत जवाब देने की मांग की है।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर में दिखाई देना या उससे मुलाकात करना अपने आप में उसके अपराधों में शामिल होने का प्रमाण नहीं है।

कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और पुरी के एपस्टीन से संबंधों की स्वतंत्र जांच पर विचार करना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या इस घटनाक्रम का भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर कोई असर पड़ सकता है। हालांकि, तस्वीर, रुबियो की यात्रा और व्यापार समझौते के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

आगे क्या होगा?

राहुल गांधी के बयान ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब प्रमुख सवाल यह है कि सरकार और संबंधित मंत्री इन आरोपों तथा विपक्ष की मांगों पर क्या जवाब देते हैं।

पूरे मामले को समझने के लिए तीन बातों में अंतर करना जरूरी है—तस्वीर में दिखाई देने वाले तथ्य, पुरी द्वारा दी गई सफाई और ब्लैकमेलिंग या अंतरराष्ट्रीय दबाव से जुड़े राजनीतिक आरोप।

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निष्कर्ष:

राहुल गांधी ने एपस्टीन–पुरी तस्वीर और मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा के समय को लेकर गंभीर राजनीतिक सवाल उठाए हैं। लेकिन किसी संभावित ब्लैकमेलिंग, व्यापार समझौते पर दबाव या किसी नेता की संलिप्तता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए ठोस सबूत और आधिकारिक स्पष्टीकरण आवश्यक हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद पर सरकार की प्रतिक्रिया और नए दस्तावेज सामने आते हैं या नहीं, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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