/ Apr 02, 2025
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WAQF AMENDMENT BILL 2025: केंद्र सरकार आज लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पेश करने जा रही है, जिसे दोपहर 12 बजे सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। इस पर 8 घंटे की चर्चा होगी, जिसकी जानकारी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दी। विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में पारदर्शिता लाना और वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना बताया जा रहा है। इसे लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस की उम्मीद है।
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास लोकसभा में 293 सांसदों का समर्थन है, जो विधेयक को पारित करने के लिए पर्याप्त है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सहयोगी दलों तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने विधेयक के समर्थन की घोषणा की है। टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसदों ने अपने नेताओं के निर्देश पर इसे समर्थन देने का फैसला किया है। टीडीपी प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के हित में है। जनसेना पार्टी के नेता पवन कल्याण ने भी अपने दो सांसदों को विधेयक के पक्ष में वोट देने का निर्देश दिया है।
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने WAQF AMENDMENT BILL 2025 का विरोध करने का फैसला किया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (एसपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सहित कई दलों ने अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है। एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “वक्फ बर्बाद बिल” करार दिया। विपक्ष के पास लोकसभा में 241 सांसद हैं, जो एनडीए से कम है।
देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की नींव 1954 में रखी गई थी, जब ‘वक्फ एक्ट’ के तहत ‘सेंट्रल वक्फ काउंसिल’ का गठन किया गया। इसके बाद 1955 में इस कानून में संशोधन कर हर राज्य में वक्फ बोर्ड बनाए गए। वर्तमान में भारत में लगभग 32 वक्फ बोर्ड कार्यरत हैं, जो मुस्लिम धर्मस्थलों और संबंधित संपत्तियों की देखरेख करते हैं। बिहार समेत कुछ राज्यों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। 1964 में पहली बार सेंट्रल वक्फ काउंसिल की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों की निगरानी करना था।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024, जिसे अब 2025 में पेश किया जा रहा है, में 40 संशोधन प्रस्तावित हैं। इसमें वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम और मुस्लिम महिलाओं को शामिल करने, जिला कलेक्टर को सर्वे का अधिकार देने और संपत्ति पंजीकरण को अनिवार्य करने जैसे बदलाव शामिल हैं। सरकार का दावा है कि यह पुराने वक्फ अधिनियम 1995 की कमियों को दूर करेगा। हालांकि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम संगठनों ने इसे वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश बताया है।
लोकसभा में विधेयक के पेश होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। विधेयक को लेकर पहले भी अगस्त 2024 में विरोध हुआ था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया था। जेपीसी ने 25 सुझावों को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट 31 जनवरी 2025 को सौंपी थी। अब यह विधेयक 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में चर्चा के लिए आएगा।
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