VALMIK THAPAR: भारत के मशहूर वन्यजीव विशेषज्ञ और लेखक वाल्मिक थापर का शनिवार सुबह नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 73 साल के थे और लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनका निधन उनके कौटिल्य मार्ग स्थित घर पर हुआ। वे ‘टाइगर मैन’ के नाम से मशहूर थे और उनके जाने से भारत के वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है। वाल्मिक थापर एक प्रतिष्ठित परिवार से थे। उनके पिता रोमेश थापर मशहूर पत्रकार थे, उनकी चाची रोमिला थापर जानी-मानी इतिहासकार हैं और उनके चचेरे भाई करण थापर देश के जाने-माने पत्रकार हैं।

VALMIK THAPAR का जीवन
वाल्मिक थापर ने अपने जीवन के चार दशकों से ज्यादा समय भारत में बाघों के संरक्षण के लिए समर्पित किया। उन्होंने खासतौर पर राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघों के रहन-सहन और संरक्षण पर गहरा काम किया। वर्ष 1988 में उन्होंने ‘रणथंभौर फाउंडेशन’ की सह-स्थापना की थी। थापर ने 150 से ज्यादा सरकारी समितियों और टास्क फोर्स में अपनी सेवाएं दीं। इनमें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला ‘नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ’ भी शामिल था। उन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान के दम पर कई नीतिगत बदलावों में योगदान दिया, जो बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण में मददगार साबित हुए।

वे एक प्रख्यात लेखक और वृत्तचित्र निर्माता भी थे। उन्होंने बाघों और भारत की जैव-विविधता पर कई किताबें और फिल्में बनाई थीं, जो आज भी इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए एक अहम स्रोत मानी जाती हैं। थापर ने हमेशा अवैध शिकार के खिलाफ सख्त कदमों की जरूरत बताई और सरकार से नीतियों में सख्ती की मांग की। उनका अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली के लोधी इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में किया गया। इसमें परिवार के सदस्य, करीबी लोग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई लोग शामिल हुए।

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