UTTARAKHAND SIR: उत्तराखंड में आगामी चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य में स्पेशल रिवीजन (SR) यानी प्री-एसआईआर के तहत मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम चल रहा है। निर्वाचन आयोग का पूरा जोर इस बात पर है कि सभी पात्र नागरिकों का नाम इसमें शामिल हो सके। इसी क्रम में राज्यभर में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटा रहे हैं, ताकि नाम, पता और परिवार से जुड़े विवरणों में मौजूद गलतियों को समय रहते सुधारा जा सके।

UTTARAKHAND SIR: राज्य में 75 प्रतिशत मैपिंग का कार्य पूरा
देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (ACEO) डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने इस अभियान की प्रगति रिपोर्ट साझा की। उन्होंने बताया कि राज्यभर में चल रहे मतदाता मैपिंग अभियान के तहत अब तक लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। निर्वाचन विभाग के अनुसार यह प्रगति संतोषजनक है और अधिकारी लगातार इस बात की निगरानी कर रहे हैं कि शेष कार्य भी तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए। डॉ. जोगदंडे ने स्पष्ट किया कि वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है, ताकि पारिवारिक कड़ियों को सही तरीके से जोड़ा जा सके।
देहरादून और ऊधमसिंह नगर में रफ्तार धीमी
भले ही राज्य स्तर पर आंकड़ों में सुधार दिख रहा हो, लेकिन दो प्रमुख मैदानी जिलों की रफ्तार ने विभाग की चिंता थोड़ी बढ़ाई है। डॉ. जोगदंडे ने बताया कि मतदाता मैपिंग के मामले में राजधानी देहरादून और ऊधमसिंह नगर जिले अभी अन्य जिलों की तुलना में पीछे चल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून में अब तक केवल 57 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर में 59 प्रतिशत मैपिंग का काम ही पूरा हो पाया है। इस धीमी गति को देखते हुए निर्वाचन विभाग ने इन दोनों जिलों के अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने और कार्य की गति बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि राज्य के औसत को और बेहतर किया जा सके।

UTTARAKHAND SIR: 1 फरवरी से 15 फरवरी तक चलेगा विशेष अभियान
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने घोषणा की है कि 1 फरवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह बीएलओ आउटरीच अभियान का दूसरा चरण होगा। इस पखवाड़े के दौरान मुख्य फोकस उन युवा और महिला मतदाताओं की पहचान करने पर होगा, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में दर्ज था। इस दौरान बीएलओ घर-घर जाकर विवाहित महिलाओं के मायके से जुड़े विवरण और युवाओं की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाएंगे। इसे तकनीकी भाषा में ‘एज ए प्रोजेनी’ मैपिंग कहा जा रहा है।

बीएलओ ऐप और बीएलए की भूमिका
डॉ. जोगदंडे ने बताया कि सभी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) विशेष ऐप के माध्यम से मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। इस ऐप के जरिए न सिर्फ डेटा की मैपिंग की जा रही है, बल्कि मतदाताओं को सूची में नाम जुड़वाने और जरूरी सुधार करने के तरीकों के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। इसके अलावा, राज्य में बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) की नियुक्ति भी तेजी से हो रही है। अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से करीब 12,070 बीएलए नामित किए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा नामांकन भाजपा और कांग्रेस की तरफ से आए हैं। विभाग को उम्मीद है कि अगले एक महीने में सभी बूथों पर बीएलए की तैनाती पूरी हो जाएगी।

समझिए क्या है एसआर और प्री-एसआईआर का मतलब
आम जनता के लिए यह समझना भी जरूरी है कि अभी चल रही प्रक्रिया आखिर है क्या। दरअसल, उत्तराखंड में चल रहे स्पेशल रिवीजन (SR) को ही प्री-एसआईआर माना जा रहा है। यह मतदाता सूची की सफाई और तैयारी का पहला और बुनियादी चरण है। इसमें बीएलओ घर-घर जाकर यह सत्यापित करते हैं कि वोटर लिस्ट में दर्ज नाम, पते और अन्य जानकारियां धरातल पर सही हैं या नहीं। अगर इस चरण में गलत नाम, डुप्लीकेट एंट्री या अधूरी जानकारी रह जाती है, तो आगे की प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है। इसलिए एसआर के जरिए वोटर लिस्ट को मोटे तौर पर ठीक किया जाता है, जो आगे चलकर एसआईआर की बेस फाइल बनती है।

उत्तराखंड में ‘SIR’ की तैयारी तेज, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिए ‘BLO आउटरीच’ के निर्देश
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