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उत्तराखंड पर पश्चिम एशिया विवाद का असर, कोलतार सप्लाई बिगड़ी, सड़क निर्माण कार्य रुके

UTTARAKHAND ROADS: पिछले कई महीनों से चल रहे पश्चिम एशियाई तनाव का असर अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम लोगों और विकास कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तारकोल यानी बिटुमेन के दामों में पिछले कुछ समय में जबरदस्त उछाल आया है।

इसी वजह से उत्तराखंड में सड़क निर्माण का काम बेहद महंगा हो गया है और कई अहम परियोजनाएं बीच में ही अटक गई हैं।

UTTARAKHAND ROADS: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास सीधे प्रभावित

क्रूड ऑयल संकट के चलते बिटुमेन की कीमतों में आई तेजी ने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सीधे प्रभावित किया है। सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले तारकोल की कीमत कुछ ही महीनों में करीब 60 फीसदी तक बढ़ गई है। लागत में इस अचानक हुई बढ़ोतरी की वजह से प्रदेश के कई इलाकों में सड़क निर्माण का काम रुक गया है।

निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदारों का कहना है कि पुराने तय रेट पर अब काम करना उनके लिए घाटे का सौदा बन गया है। उनका साफ कहना है कि मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से पुराने कॉन्ट्रैक्ट रेट पर सड़क बनाना संभव नहीं है। इसी कारण उन्होंने सरकार और विभाग से निर्माण दरों में तुरंत संशोधन की मांग की है।

UTTARAKHAND ROADS
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लोक निर्माण विभाग भी सक्रिय

ठेकेदारों के काम रोकने और नई दरों की मांग के बाद लोक निर्माण विभाग भी सक्रिय हो गया है। विभाग ने बढ़ती लागत और मौजूदा हालात को देखते हुए सड़क निर्माण की दरों को संशोधित करने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा जा चुका है।

अब विभाग को सिर्फ अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। जैसे ही वित्त विभाग से हरी झंडी मिलेगी, वैसे ही प्रदेशभर में रुकी हुई UTTARAKHAND ROADS परियोजनाओं का काम दोबारा शुरू किया जा सकेगा। सरकार के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि विकास कार्यों के रुकने का सीधा असर आम लोगों की सुविधाओं पर पड़ रहा है।

मानसून नजदीक होने के कारण यह मामला और ज्यादा गंभीर माना जा रहा है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो बरसात से पहले होने वाले UTTARAKHAND ROADS निर्माण और मरम्मत कार्य बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। हर साल मानसून से पहले सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता है, लेकिन इस बार उस अभियान पर भी संकट मंडराने लगा है।

लोक निर्माण विभाग के अनुसार फिलहाल विभाग के पास कुछ मात्रा में बिटुमेन उपलब्ध है, इसलिए अभी ज्यादा दिक्कत नहीं आ रही। हालांकि उन्होंने माना कि मार्च के बाद बिटुमेन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे आगे इसकी उपलब्धता भी चुनौती बन सकती है। मार्च तक जो रेट थे, अप्रैल और मई में उनमें काफी बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।

सड़क निर्माण के लिए संशोधित रेट

इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े निर्माण कार्यों के लिए केंद्र ने बिटुमेन की नई बढ़ी हुई दरों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद देश के कई अन्य राज्यों ने भी सड़क निर्माण के लिए संशोधित रेट लागू कर दिए हैं।

UTTARAKHAND ROADS
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इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड का लोक निर्माण विभाग भी वित्त विभाग से मंजूरी मांग रहा है, ताकि राज्य में भी नई दरें लागू की जा सकें। खासतौर पर उन ठेकेदारों के लिए अनुमति मांगी गई है, जिनके टेंडर मार्च से पहले जारी हुए थे। विभाग चाहता है कि ऐसे सभी पुराने टेंडरों में भी वर्तमान बाजार रेट के हिसाब से भुगतान की मंजूरी मिले, ताकि रुके हुए UTTARAKHAND ROADS काम फिर से पटरी पर लौट सकें।

चार हजार किलोमीटर सड़कों पर मरम्मत और गड्ढा मुक्त करने का अभियान चल रहा

लोक निर्माण विभाग के हवाले से UTTARAKHAND ROADS निर्माण की पूरी प्रक्रिया में बिटुमेन सिर्फ एक हिस्सा होता है। सड़क की सबसे ऊपरी परत, जिसे तकनीकी भाषा में ब्लैक टॉप कहा जाता है, उसी में मुख्य रूप से बिटुमेन का इस्तेमाल होता है। इसलिए पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ता, लेकिन बिटुमेन की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी इतनी जरूर है कि उससे काम प्रभावित हो रहा है।

बता दें इस समय प्रदेशभर में करीब चार हजार किलोमीटर सड़कों पर मरम्मत और गड्ढा मुक्त करने का अभियान चल रहा है। विभाग ने 15 मई तक सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन बीच में बारिश और बिटुमेन के महंगे होने की वजह से यह अभियान थोड़ा पीछे चल रहा है। हालांकि जिन सड़कों के टेंडर नई कीमतें लागू होने के बाद जारी किए गए थे, वहां काम बिना किसी रुकावट के जारी है क्योंकि उनमें संशोधित रेट पहले से शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई UTTARAKHAND ROADS से संबंधित जानकारी विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, गूगल सर्च, अलग-अलग वेबसाइट्स तथा मीडिया/न्यूज़ रिपोर्ट्स के आधार पर संकलित की गई है। जानकारी को अधिकतम सावधानी के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, हालांकि समय-समय पर आंकड़ों और रिपोर्ट्स में बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक निर्णय या निष्कर्ष के लिए संबंधित सरकारी संस्थानों और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि अवश्य करें।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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