UTTARAKHAND MONSOON: उत्तराखंड में मानसून ने दस्तक दे दी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया है। हरिद्वार को छोड़कर सभी 12 जिलों में मानसून की सक्रियता दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उत्तराखंड में मानसून का प्रवेश सामान्य समय पर हुआ है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विभाग ने आने वाले 48 घंटों के लिए राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, भूस्खलन और आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी की है। इसको देखते हुए येलो और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।

UTTARAKHAND MONSOON: इन जिलों में बारिश की अलर्ट जारी
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह ने बताया कि 21 और 22 जून को देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत और अल्मोड़ा जिलों में भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे पहाड़ी इलाकों की यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें और नदियों या तेज बहाव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचें। खुले मैदानों या ऊंची जगहों पर खड़े रहने से भी परहेज़ करने की सलाह दी गई है क्योंकि आकाशीय बिजली का खतरा बना हुआ है।

चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। बारिश के चलते यात्रा मार्गों पर भूस्खलन की संभावना बढ़ गई है, जिससे यात्री फंस सकते हैं या उन्हें रास्ता बदलना पड़ सकता है। मौसम के बदलाव और संभावित आपदा को देखते हुए प्रदेश प्रशासन अलर्ट मोड में है। राज्य सरकार ने सभी जिलों में आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात कर दी हैं। खासकर बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी गई है और राहत सामग्री एवं उपकरणों की व्यवस्था की गई है।

देहरादून, मसूरी, नैनीताल और बागेश्वर में शुक्रवार से ही रुक-रुक कर झमाझम बारिश हो रही है। भारी बारिश की चेतावनी के कारण 21 जून को केदारनाथ और बद्रीनाथ के लिए चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई हैं। मौसम विज्ञान विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और नई जानकारी के अनुसार अपडेट साझा कर रहा है। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की कोशिश है कि लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जाएगी।

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