UTTARAKHAND MELA: उत्तराखंड की सांस्कृतिक समृद्धि इस समय गढ़वाल से लेकर कुमाऊँ तक अपने पूरे उफान पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के दो सबसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मेलों का उद्घाटन किया। एक ओर जहाँ गढ़वाल के चमोली में ऐतिहासिक गौचर मेले का आगाज हुआ, वहीं दूसरी ओर कुमाऊँ में भारत-नेपाल सीमा पर ऐतिहासिक जौलजीबी मेले की भी भव्य शुरुआत हुई। ये दोनों मेले न सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव हैं, बल्कि सदियों पुरानी व्यापारिक विरासत के प्रतीक भी हैं।

UTTARAKHAND MELA: सीएम धामी ने गौचर और जौलजीबी मेले का किया शुभारंभ
चमोली के गौचर में शुरू हुआ मेला सात दिनों तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। किसी जमाने में इसे उत्तराखंड का सबसे बड़ा मेला माना जाता था, जो अपने कृषि उत्पादों और व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। इस मेले की शुरुआत 1943 में तिब्बत से व्यापार करने वाले भोटिया जनजाति के लोगों की पहल पर एक व्यापारिक हाट के रूप में हुई थी, जिसने धीरे-धीरे औद्योगिक और सांस्कृतिक रूप ले लिया। मेले के लिए गौचर बाजार का विशेष सौंदर्यीकरण करने के साथ ही पार्किंग, परिवहन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

वहीं, कुमाऊँ में जौलजीबी मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री धामी और विधायक हरीश धामी ने संयुक्त रूप से किया। यह मेला भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत का प्रतीक है। उद्घाटन समारोह में नेपाल से आए प्रतिनिधियों के साथ-साथ अनवाल समुदाय, गोरखा समुदाय और रंङ कल्याण संस्था ने पारंपरिक वेशभूषा व लोकनृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने जौलजीबी में स्थानीय हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों के स्टॉलों का निरीक्षण किया और कहा कि यह मेला सदियों से भारत-नेपाल की मैत्री और सांस्कृतिक एकता का आधार स्तंभ रहा है।

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