UTTARAKHAND FOREST FIRE: उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा तापमान अब जंगलों के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। राज्य के कई जनपदों से भीषण वनाग्नि की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनसे न केवल करोड़ों रुपये की वन संपदा नष्ट हो रही है, बल्कि मानव जीवन, वन्यजीवों और रिहायशी इलाकों पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
चमोली, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों में जंगलों में लगी आग ने भयावह रूप धारण कर लिया है। कई स्थानों पर आग गांवों और आबादी तक पहुंच गई, जबकि एक महिला की दर्दनाक मौत और दूसरी महिला के गंभीर रूप से झुलसने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
आदिबदरी में एक महिला की मौत
जनपद चमोली की आदिबदरी तहसील अंतर्गत बूंगा गांव के बदाढ़गाड जंगल में मंगलवार दोपहर से लगी भीषण आग ने एक महिला की जान ले ली। ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार शाम लगभग सात बजे बूंगा गांव निवासी मदन लाल की पत्नी 50 वर्षीय सुरेशी देवी गांव से करीब 200 मीटर दूर स्थित अपनी गौशाला की ओर जा रही थीं।
उसी दौरान तेज हवाओं के कारण जंगल से उठी आग की लपटें तेजी से फैलीं और उन्होंने सुरेशी देवी को चारों ओर से घेर लिया। महिला बुरी तरह झुलस गई। उनकी चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और भारी कठिनाई के बाद उन्हें आग के बीच से बाहर निकालकर घर तक पहुंचाया।
ग्रामीण उपचार के लिए उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना रात में ही पटवारी और वन विभाग को दी गई, जिसके बाद विभागीय टीमें गांव पहुंचीं।

नारायणबगड़ के रेस चोपता गांव की घटना
UTTARAKHAND FOREST FIRE की एक अन्य घटना नारायणबगड़ के रेस चोपता गांव में सामने आई, जहां जंगल की आग की चपेट में आने से कश्मीरा देवी नामक महिला गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें उपचार के लिए कर्णप्रयाग उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
UTTARAKHAND FOREST FIRE: नैनीताल बन रहा है हॉटस्पॉट
उधर नैनीताल के समीप कृष्णापुर क्षेत्र में भी देर शाम जंगलों में अचानक आग भड़क उठी। तेज हवाओं के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और उसकी लपटें तेजी से आबादी वाले क्षेत्रों और घरों के बेहद करीब पहुंच गईं। आग को रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ता देख स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने स्वयं पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
घटना की सूचना पर वन विभाग और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों ने संयुक्त प्रयास कर किसी तरह UTTARAKHAND FOREST FIRE को मुख्य आबादी में प्रवेश करने से रोक दिया। हालांकि आग का रुख सड़क मार्ग और हनुमानगढ़ी क्षेत्र की ओर बढ़ गया था, जिससे खतरा और बढ़ गया।
रेंजर ललित कार्की ने बताया कि आबादी की तरफ फैल रही आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, जबकि जंगल के भीतर धधक रही आग को बुझाने के प्रयास लगातार जारी हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अत्यधिक गर्मी और तेज हवाओं के चलते आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाना बेहद कठिन हो रहा है। हवा के झोंकों से बुझी हुई आग दोबारा सुलग उठ रही है।
देवप्रयाग क्षेत्र में भी जंगलों में लगी आग
जनपद पौड़ी गढ़वाल के देवप्रयाग क्षेत्र में भी UTTARAKHAND FOREST FIRE ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी। जंगलों में लगी आग धीरे-धीरे रिहायशी बस्तियों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर के बेहद करीब पहुंच गई। देर शाम आसमान में उठती ऊंची लपटों और धुएं के कारण पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया।
सूचना मिलने पर वन विभाग, दमकल विभाग और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। कई घंटों की मशक्कत के बाद देर रात UTTARAKHAND FOREST FIRE पर काबू पाया जा सका। बताया गया कि यह आग सौड़ गांव की दिशा से फैलते हुए विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंची थी।

इससे पहले भी नृसिंहाचल पर्वत क्षेत्र में लगी आग को विश्वविद्यालय के शिक्षकों और वन विभाग ने चार घंटे की मेहनत के बाद बुझाया था, लेकिन दो दिन बाद फिर आग भड़क उठी। देवप्रयाग का क्षेत्र अत्यधिक ढालदार और दुर्गम होने के कारण राहत कार्यों में भारी दिक्कत आई।
स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में रह रहे छात्रों और कर्मचारियों को एहतियातन आवास खाली करने के निर्देश दिए। छात्रावास के ऊपर उठती भीषण आग की लपटों को देखकर छात्र और कर्मचारी भयभीत हो गए। कुछ ही देर में आग बाह बाजार के ऊपर स्थित जंगलों से आगे बढ़कर रिहायशी बस्तियों की ओर पहुंचने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोग अपने घरों को बचाने में जुट गए।
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

