UTTARAKHAND FOREST FIRE: उत्तराखंड में गर्मी के साथ ही ‘फायर सीजन’ (15 फरवरी-15 जून) अपने पीक पर आता दिख रहा है। वर्तमान में राज्य के कई जिले भीषण वनाग्नि की चपेट में हैं। नैनीताल के गेठिया क्षेत्र में पिछले 30 घंटों से आग धधक रही है, वहीं पौड़ी, अल्मोड़ा, चमोली और बागेश्वर के जंगलों से भी विकराल आग की खबरें आ रही हैं। अलग-अलग जिलों से सामने आ रही घटनाएं न केवल वन संपदा बल्कि पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
UTTARAKHAND FOREST FIRE: 30 घंटों से जंगल धधक रहे हैं
नैनीताल जिले के गेठिया-अलूखेत क्षेत्र में बीते करीब 30 घंटों से जंगल धधक रहे हैं। भीषण गर्मी और हीट वेव के चलते आग ने विकराल रूप ले लिया है। यह आग दो अलग-अलग स्थानों से शुरू होकर तेजी से बड़े इलाके में फैल गई। रविवार सुबह पायलेट बाबा आश्रम के पास और उससे करीब एक किलोमीटर आगे जंगल में आग भड़की थी।
स्थानीय लोगों और वन विभाग ने मिलकर आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ती UTTARAKHAND FOREST FIRE को रोकने की कोशिश की, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाका और सूखी वनस्पति आग के तेजी से फैलने का कारण बन गई। पूरे क्षेत्र में धुएं का घना गुबार छाया हुआ है, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग, एसडीआरएफ और दमकल विभाग की टीमें मौके पर डटी हुई हैं।
30 से अधिक फायर वाचर, कर्मचारी और ग्रामीण मिलकर फायर लाइन बनाकर आग को फैलने से रोकने में जुटे हैं। खुर्पाताल के पास जगुड़ा गांव में भी आग आवासीय क्षेत्र तक पहुंच गई थी, जिसे ग्रामीणों ने समय रहते बुझा दिया। वहीं एरीज के पास लगी आग को हनुमानगढ़ मंदिर और रिहायशी इलाके तक फैलने से रोक लिया गया।

अल्मोड़ा और बागेश्वर भी UTTARAKHAND FOREST FIRE की चपेट में
इसी तरह अल्मोड़ा जिले के रानीखेत क्षेत्र के ताड़ीखेत ब्लॉक के पनियाली के पास सड़क के ऊपर जंगल में शनिवार देर रात आग लग गई थी। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन सूचना मिलते ही फायर स्टेशन रानीखेत की टीम मौके पर पहुंची और होज रील के जरिए पंपिंग कर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। समय पर कार्रवाई होने से बड़ा नुकसान टल गया। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी गणेश चंद्र के अनुसार त्वरित कार्रवाई के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और स्थिति नियंत्रण में रही।
बागेश्वर जिले में भी UTTARAKHAND FOREST FIRE के हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जहां धरमघर से कपकोट तक कई जंगल आग की चपेट में हैं। होराली, दारसिंग, नाघरसाहू, चिरपतकोट, असों, जालेख, पोथिंग, चीरा बगड़, उत्तरौड़ा और रताइस जैसे क्षेत्रों में जंगल लगातार जल रहे हैं। तेज हवाओं और सूखे पत्तों के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। धुएं के कारण घाटियों में दृश्यता कम हो गई है और वन्यजीवों के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
कॉर्बेट भी आ रहा है जद में
रामनगर वन प्रभाग में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों में भी UTTARAKHAND FOREST FIRE ने चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। टेढ़ा क्षेत्र के टिलमठ मंदिर के पास अचानक लगी आग ने तेज हवा और सूखी वनस्पति के कारण कुछ ही समय में बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार देखते ही देखते कई स्थानों से धुआं उठने लगा। वन विभाग को आशंका है कि आग किसी शरारती तत्व द्वारा लगाई गई हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। सूचना मिलते ही विभागीय टीमें मौके पर पहुंच गईं और लगातार आग बुझाने के प्रयास जारी हैं।
पौड़ी गढ़वाल में भीषण आग
पौड़ी गढ़वाल जिले की श्रीनगर रेंज के सुमाड़ी और आसपास के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है। तेज हवाओं के चलते आग ने विकराल रूप ले लिया है। बताया जा रहा है कि पहले आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन बाद में कुछ शरारती तत्वों द्वारा दोबारा आग लगाए जाने से स्थिति और गंभीर हो गई। डीएफओ पवन नेगी खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। अब तक चार वनाग्नि की घटनाओं में करीब 2.31 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जबकि नाप भूमि और खेतों में भी UTTARAKHAND FOREST FIRE की कई घटनाएं सामने आई हैं।
चमोली 2 महीनों से जल रहा
चमोली जिले में भी महीने की शुरुआत में ही कई क्षेत्रों लाखी, चुनाकोट, केदारूखाल और बेनीताल में जंगल जलते रहे, जिन पर बाद में काबू पा लिया गया। इस दौरान भारी मात्रा में वन संपदा को नुकसान हुआ और धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हुई। UTTARAKHAND FOREST FIRE के कारण कुछ वन्यजीवों के नुकसान की भी आशंका जताई गई। वन विभाग ने लगातार प्रयास के बाद आग को नियंत्रित किया और अब शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है।

मार्च में भी जिले के सीमावर्ती गांव मलारी के ऊपर स्थित जंगलों में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। भुजगढ़ नाले के पास सिविल क्षेत्र में लगी इस आग को बुझाने के लिए वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। एक छोर से आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में अभी भी प्रयास जारी हैं। सेना शिविर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
वन विभाग लगातार अलर्ट मोड में
दरअसल, उत्तराखंड में हर साल 15 फरवरी से 15 जून तक का समय फायर सीजन माना जाता है, जब जंगलों में UTTARAKHAND FOREST FIRE लगने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। इस बार शुरुआती महीनों में बारिश और बर्फबारी के कारण राहत रही, लेकिन अब तापमान बढ़ने और सूखे मौसम के चलते हालात तेजी से बिगड़ने लगे हैं।
वन विभाग लगातार अलर्ट मोड में काम कर रहा है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों, सूखी वनस्पति और तेज हवाओं के कारण आग बुझाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग न लगाएं, खेतों में कूड़ा जलाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सके।
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