UTTARAKHAND CENSUS AND SIR: उत्तराखंड समेत देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आगामी अप्रैल का महीना बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। राज्य में लंबे समय से प्रतीक्षित जनगणना के पहले चरण और निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया एक साथ शुरू होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, अभी तक दोनों प्रक्रियाओं के लिए आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी नहीं हुई है, लेकिन जनगणना कार्य निदेशालय और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अपनी प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

UTTARAKHAND CENSUS AND SIR: मानव संसाधन और प्रशिक्षण की स्थिति
जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित ‘जनगणना कोऑर्डिनेशन कमेटी’ ने मानव संसाधन की उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा की गई है। वर्तमान में चार्ज अधिकारियों की ट्रेनिंग चल रही है, जो बाद में प्रगणकों (Enumerators) और सुपरवाइजरों की नियुक्ति करेंगे। वहीं, निर्वाचन विभाग की ओर से उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के लिए उनके पास बीएलओ (BLO) और ईआरओ (ERO) के रूप में पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध है और तैयारियों के संबंध में जिला स्तर पर बैठकें पूरी कर ली गई हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की SIR की तैयारियों की समीक्षा की
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम ने सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों में मतदाताओं की मैपिंग की कम प्रगति पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि एसआईआर कार्य में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सभी जनपदों में बूथ अवेयरनेस ग्रुप (BAG) के गठन और हेल्प डेस्क के लिए अतिरिक्त कार्मिकों की तैनाती के आदेश भी दिए गए हैं।

राजनीतिक दलों के साथ समन्वय और बीएलए की तैनाती
समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि वर्तमान में 77 प्रतिशत बूथों पर बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की तैनाती हो चुकी है। शत-प्रतिशत तैनाती के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारियों को राजनीतिक दलों के साथ पुनः बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं ताकि अप्रैल में अधिसूचना जारी होते ही कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।

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