USA INDIA TARIFF: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 26% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने इसे “रेसिप्रोकल टैरिफ” करार दिया है और कहा है कि यह अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने और उन देशों को जवाब देने के लिए उठाया गया कदम है, जो अमेरिकी उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाते हैं। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर औसतन 52% शुल्क लगाता है। ट्रंप प्रशासन ने इस टैरिफ को “डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ” के रूप में लागू किया है, जो अन्य देशों की तुलना में भारत के लिए कम दर से प्रभावी होगा।

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ToggleUSA INDIA TARIFF: अन्य एशियाई देशों पर अधिक टैरिफ
USA INDIA TARIFF की यह नई दर भारत की तुलना में अन्य एशियाई देशों पर अधिक लगाई गई है, जिसमें चीन (34%) और वियतनाम (46%) शामिल हैं। भारत हर साल अमेरिका को लगभग 74 बिलियन डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात करता है, जिसमें रत्न और आभूषण (8.5 बिलियन डॉलर), फार्मास्यूटिकल्स (8 बिलियन डॉलर) और पेट्रोकेमिकल्स (4 बिलियन डॉलर) शामिल हैं। भारतीय निर्यातकों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. राल्हन ने कहा कि भले ही यह टैरिफ अन्य देशों की तुलना में कम है, लेकिन यह भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती पेश करेगा और कई उद्योगों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

टैरिफ 9 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह टैरिफ 9 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा, जबकि 5 अप्रैल 2025 से सभी आयातों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ भी लागू कर दिया जाएगा। भारत सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस फैसले के प्रभाव का आकलन कर रहा है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार युद्ध को और बढ़ा सकता है, क्योंकि चीन और यूरोपीय संघ पहले ही इस तरह के फैसलों का विरोध कर चुके हैं और जवाबी कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले की आलोचना की है और इसे “गैर-जिम्मेदाराना” और “आत्मघाती” करार दिया है।

क्या होता है टैरिफ?
टैरिफ मूल रूप से एक बॉर्डर टैक्स या शुल्क होता है, जो किसी देश द्वारा विदेशों से आयातित वस्तुओं पर लगाया जाता है। यह टैक्स आयात करने वाली कंपनियों को चुकाना पड़ता है और सरकारें इसे व्यापार नीतियों के तहत नियंत्रित करती हैं। यह शुल्क घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और विदेशी प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। अब यह देखना होगा कि भारत इस टैरिफ का जवाब किस तरह देता है और यह अमेरिका-भारत व्यापारिक संबंधों को किस हद तक प्रभावित करता है।

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