उत्तर प्रदेश(UP)में लगातार तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य में 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 56 लोगों की मौत और 46 लोग घायल हुए हैं। भारी बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राहत विभाग के मुताबिक, इस दौरान 1,021 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि कई इलाकों में फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
UP के 56 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 75 में से 56 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक राज्य में 66.5 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 7.6 मिमी होती है। यानी बारिश सामान्य से कई गुना अधिक रही।
कुछ जिलों में बारिश का अंतर बेहद बड़ा रहा। फर्रुखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत अधिक, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
UP के सीतापुर में सबसे ज्यादा मौतें
बारिश और आंधी से जुड़ी घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें सीतापुर में सात दर्ज की गईं। इसके बाद लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच लोगों की मौत हुई। अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार मौतें दर्ज की गईं।
भारी बारिश के दौरान कई इलाकों में पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। सड़कें और गांव जलमग्न हो गए, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। राहत टीमों ने जलभराव वाले क्षेत्रों में अभियान चलाकर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
UP में घाघरा और राप्ती नदियों का जलस्तर बढ़ा
बारिश के बाद अब नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के मुताबिक घाघरा और राप्ती नदियां कई निगरानी केंद्रों पर बढ़ रही हैं।
बाराबंकी के एल्गिनब्रिज में घाघरा का जलस्तर 106.14 मीटर दर्ज किया गया, जो 106.07 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर था। अयोध्या में भी घाघरा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया। वहीं बलरामपुर में राप्ती नदी का जलस्तर 104 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 103.62 मीटर है।
नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से तेज बहाव वाली नदियों, नालों और जलधाराओं से दूर रहने की अपील की है।
UP में लखनऊ से कानपुर तक बारिश का असर
भारी बारिश का असर राज्य के कई बड़े शहरों में भी देखने को मिला। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और बरेली समेत कई क्षेत्रों में तेज बारिश हुई। बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।
लखनऊ में एक सड़क का हिस्सा धंसने और कई चौराहों पर जलभराव की खबर सामने आई। ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा। कानपुर-इटावा हाईवे के एक हिस्से को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के पास एक रैंप पर जलभराव हुआ, हालांकि परियोजना प्रबंधन के अनुसार एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य रहा और पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए।
UP में मौसम प्रणाली कमजोर, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले तीन दिनों की भारी बारिश के लिए जिम्मेदार डिप्रेशन कमजोर होकर अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में बदल गया है। यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में उत्तर प्रदेश के ऊपर आगे बढ़ रहा है और इसके धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।
सिस्टम के कमजोर पड़ने से बारिश की तीव्रता में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन नदियों का जलस्तर बढ़ने और पहले से जलमग्न क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ने का खतरा अभी बना हुआ है।
आगे और समाचार पढ़े:
- LPU Protest: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल के बाद 10 दिन के लिए कक्षाएं बंद, मिड-टर्म परीक्षा स्थगित
- बैंक हड़ताल टली: IBA और यूनियनों के बीच बातचीत के बाद 28-30 सितंबर का प्रस्तावित स्ट्राइक स्थगित
UP में राहत और बचाव अभियान तेज
राज्य के राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के सीधे संपर्क में रहने और जरूरतमंदों तक जल्द सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन को क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन करने, जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने और फसलों के नुकसान का सर्वे कर नियमानुसार मुआवजा देने को कहा गया है।
लोगों से अपील की गई है कि वे बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा न करें। आपात स्थिति में राहत आयुक्त कार्यालय की 1070 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।
फिलहाल यूपी में बारिश का दौर कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है, लेकिन 56 मौतों, हजार से अधिक क्षतिग्रस्त मकानों और बढ़ते नदी जलस्तर ने राज्य के कई जिलों में राहत और पुनर्वास की चुनौती बढ़ा दी है।

