विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी UGC-NET जून 2026 को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बड़ा फैसला लिया है। एजेंसी ने अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों के प्रश्नपत्रों में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद इन तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का ऐलान किया है। NTA ने माना कि इन प्रश्नपत्रों में गलतियां इतनी व्यापक थीं कि केवल कुछ प्रश्नों को हटाकर या उत्तर-कुंजी में सुधार करके समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता था।
NTA के इस फैसले से तीनों विषयों के उन अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, जिन्होंने जून में आयोजित परीक्षा में हिस्सा लिया था। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं, UGC-NET के बाकी विषयों की परीक्षा और परिणाम प्रक्रिया पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा।
क्या मिलीं प्रश्नपत्रों में खामियां?
NTA के अनुसार, तीनों प्रश्नपत्रों की शिकायतों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। समिति की समीक्षा में कई तरह की गंभीर त्रुटियां सामने आईं। इनमें तथ्यात्मक गलतियां, टाइपिंग की त्रुटियां, अनुवाद संबंधी समस्याएं, व्याकरण संबंधी गलतियां और प्रश्नों की भाषा में अस्पष्टता शामिल थीं।
समिति ने पाया कि कुछ प्रश्नों में प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे गए थे, कई पुस्तकों के शीर्षक बिगड़े हुए थे और प्रश्नों की मूल भाषा में भी गलतियां थीं। इसके अलावा लिंग और वचन के मेल से जुड़ी व्याकरणिक समस्याएं, विराम चिह्नों की गलतियां और स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों के इस्तेमाल जैसी समस्याएं भी सामने आईं।
सबसे गंभीर बात यह रही कि तीनों प्रश्नपत्रों में पहले आयोजित परीक्षाओं में पूछे जा चुके कई प्रश्न दोहराए गए थे। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार समीक्षा समिति ने कुल मिलाकर 67 दोहराए गए प्रश्नों की पहचान की।
NTA ने क्यों लिया दोबारा परीक्षा का फैसला?
सामान्य स्थिति में यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा में कुछ प्रश्न गलत पाए जाते हैं तो उन्हें उत्तर-कुंजी के स्तर पर हटाया जा सकता है। लेकिन UGC-NET के इन तीन विषयों में समस्याएं सीमित प्रश्नों तक नहीं थीं।
NTA ने कहा कि प्रश्नपत्रों में मिली खामियों की प्रकृति और संख्या को देखते हुए केवल गलत प्रश्नों को हटाना पर्याप्त नहीं होगा। इससे परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के बीच समानता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। इसलिए एजेंसी ने तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया।
यह निर्णय परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
कब होगी दोबारा परीक्षा?
NTA ने तीनों विषयों के लिए अलग-अलग तारीख और समय निर्धारित किया है।
अंग्रेजी: 9 सितंबर 2026, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक।
कॉमर्स: 9 सितंबर 2026, दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक।
समाजशास्त्र: 10 सितंबर 2026, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक।
परीक्षा केंद्रों और एडमिट कार्ड से संबंधित विस्तृत जानकारी NTA की ओर से बाद में जारी की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।
बाकी 84 विषयों पर कोई असर नहीं
UGC-NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन कुल 87 विषयों में किया गया था। यह परीक्षा 22 से 30 जून के बीच आयोजित हुई थी और इसका उद्देश्य जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF), असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्रता तथा PhD में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों की पात्रता निर्धारित करना है।
NTA ने साफ किया है कि दोबारा परीक्षा का फैसला केवल अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र तक सीमित है। बाकी 84 विषयों की परीक्षा प्रक्रिया जारी रहेगी। इन विषयों के लिए उत्तर-कुंजी चुनौती प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है और परिणाम, JRF आवंटन तथा ई-सर्टिफिकेट की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।इससे बाकी विषयों के लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, क्योंकि उन्हें दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी।
UGC NET के अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता
NTA के फैसले से जहां प्रश्नपत्र की गुणवत्ता को लेकर उठी शिकायतों को गंभीरता से लिए जाने की उम्मीद जगी है, वहीं प्रभावित तीन विषयों के अभ्यर्थियों के सामने एक बार फिर परीक्षा की तैयारी की चुनौती आ गई है।
कई उम्मीदवार पहले ही परीक्षा के बाद उत्तर-कुंजी, प्रश्नों की भाषा और प्रश्नपत्र की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर चुके थे। अब उन्हें सितंबर में फिर से परीक्षा देनी होगी। हालांकि, अतिरिक्त शुल्क नहीं लिए जाने का फैसला अभ्यर्थियों के लिए कुछ राहत जरूर प्रदान करता है।
अभ्यर्थियों के लिए एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि दोबारा परीक्षा के बाद परिणाम और JRF प्रक्रिया की समयसीमा पर क्या असर पड़ेगा। NTA ने फिलहाल परीक्षा की नई तारीखें घोषित की हैं, जबकि परिणाम संबंधी विस्तृत कार्यक्रम बाद में स्पष्ट किया जाएगा।
NTA की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
UGC-NET के तीन प्रश्नपत्रों को दोबारा कराने का फैसला ऐसे समय आया है जब NTA की परीक्षा व्यवस्था पहले से ही लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक जांच के दायरे में रही है। प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने जैसे मुद्दों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
UGC-NET के मामले में इस बार समस्या सुरक्षा या पेपर लीक से अलग थी। यहां मुख्य मुद्दा प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया को लेकर सामने आया है।
विशेषज्ञों द्वारा तथ्यात्मक, भाषाई और अनुवाद संबंधी त्रुटियों की पहचान यह सवाल भी उठाती है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की पर्याप्त स्तर पर समीक्षा और प्रूफरीडिंग क्यों नहीं हुई।
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निष्पक्ष परीक्षा की चुनौती
UGC-NET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में एक छोटी सी गलती भी हजारों अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। किसी प्रश्न में गलत तथ्य, अस्पष्ट विकल्प या भाषा की समस्या उम्मीदवार की वास्तविक योग्यता का सही आकलन नहीं होने दे सकती।
इसी वजह से NTA का दोबारा परीक्षा कराने का फैसला परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में विशेषज्ञ समीक्षा, तथ्य-जांच और बहुभाषी अनुवाद की गुणवत्ता को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियों को स्वीकार करते हुए NTA ने तीनों परीक्षाएं दोबारा कराने का फैसला किया है। विशेषज्ञ समिति ने तथ्यात्मक और टाइपिंग की गलतियों से लेकर अनुवाद, व्याकरण, प्रश्नों की भाषा और पुराने प्रश्नों की पुनरावृत्ति तक कई खामियां पाईं।
अंग्रेजी और कॉमर्स की पुनर्परीक्षा 9 सितंबर, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर 2026 को होगी। उम्मीदवारों से इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बाकी 84 विषयों की परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। अब NTA के सामने चुनौती केवल इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने की नहीं, बल्कि यह भरोसा कायम करने की भी है कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और निष्पक्षता से समझौता नहीं होगा।

