UCC DAY CELEBRATION: देहरादून स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर, गढ़ी कैंट में आज प्रथम ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ (UCC Day) समारोह मनाया गया। ठीक एक वर्ष पूर्व आज ही के दिन उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधिवत रूप से लागू हुई थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति के सदस्यों, कानून को कुशलतापूर्वक लागू करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वीएलसी (विलेज लेवल कम्युनिटी) को सम्मानित किया। CM ने यूसीसी की एक साल की यात्रा पर आधारित एक फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

UCC DAY CELEBRATION: यूसीसी से लिखी गई समानता और न्याय की नई इबारत
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों को साकार करते हुए उत्तराखंड ने देश में एक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त कर सभी नागरिकों के बीच ‘समानता से समरसता’ स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है।

मुस्लिम महिलाओं को मिली कुप्रथाओं से मुक्ति
समारोह में मुख्यमंत्री ने यूसीसी के सामाजिक प्रभाव पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण जिस साहस की कमी थी, उसे उत्तराखंड ने पूरा किया है। यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में हलाला, इद्दत, तीन तलाक, बहुविवाह और बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर लगाम लगी है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कानून लागू होने के बाद से राज्य में हलाला या बहुविवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि मुस्लिम समाज की माताओं और बहनों ने इस कानून का खुले दिल से स्वागत किया है।

आंकड़ों में दिखी यूसीसी की सफलता
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी लागू होने से पहले राज्य में औसतन प्रतिदिन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 1400 प्रतिदिन से अधिक हो गई है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत का सफल निस्तारण किया जा चुका है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल और 7,500 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से इन सुविधाओं को जनता के द्वार तक पहुंचाया है।

UCC DAY CELEBRATION: लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति में अधिकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसमें माता-पिता को सूचित करने का प्रावधान सुरक्षा की दृष्टि से रखा गया है, लेकिन जानकारी को गोपनीय रखा जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को जैविक संतान के समान ही संपत्ति में अधिकार दिए गए हैं। इसके अलावा, संपत्ति के बंटवारे में पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार देकर पारिवारिक विवादों को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। (UCC DAY CELEBRATION)

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