UCC: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने के लिए अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में घोषणा की थी कि सरकार 9 नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस पर UCC लागू करना चाहती है, जिससे उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

क्या है UCC?
सरकार ने विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान जनता से ये बिल लाने का वादा किया था। बिल को 7 फरवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने इसे विधानसभा में प्रस्तुत किया था। बिल ध्वनि मत से पारित किया गया था। 13 मार्च को बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी मिली थी।
- इस बिल के कानून बनने के बाद उत्तराखंड में लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे लोगों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। ऐसा न करने पर उन्हें छह महीने तक की सजा हो सकती है।
- इसके अलावा, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी गैर-कानूनी मानी जाएगी।
- इसमें समान संपत्ति अधिकार का प्रावधान होगा, जिससे बेटों और बेटियों दोनों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। मौत के बाद संपत्ति के वितरण में भी समानता होगी।
- तलाक के मामलों में समान कारणों की आवश्यकता होगी और लिव इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। यदि ऐसे संबंधों से बच्चे पैदा होते हैं, तो उनकी जिम्मेदारी कपल की होगी, जिससे हर बच्चे को पहचान मिलेगी।

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एक्सपर्ट कमेटी ने लगभग 800 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 400 सेक्शन हैं और 2.31 लाख सुझाव शामिल किए गए हैं। इस प्रक्रिया में 20 हजार लोगों से सीधे संपर्क किया गया और सभी धर्म गुरुओं, संगठनों, राजनीतिक दलों और कानूनविदों से बातचीत की गई है। यह कानून उत्तराखंड की जनजातियों पर लागू नहीं होगा, जिसमें थारू, बोक्सा, राजी, भोटिया और जौनसारी समुदाय शामिल हैं।
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