Toilet Seat Tax: हिमाचल प्रदेश में टॉयलेट शीट के आधार पर टैक्स लगाए जाने की खबरों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश में कोई ‘टॉयलेट टैक्स’ नहीं लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विवाद है, जिसे हरियाणा चुनाव के चलते उछाला गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी अक्सर चुनाव के समय धार्मिक या अन्य संवेदनशील मुद्दों को उठाती रहती है, ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।

Toilet Seat Tax: जल शक्ति विभाग ने भी इन खबरों का खंडन किया
इस मामले को पूरी तरह से झूठा बताते हुए कहा कि जल शक्ति विभाग ने भी इस तरह के किसी भी टैक्स लगाने का खंडन किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वे केवल पानी का बिल ले रहे हैं और इसके अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है। जल शक्ति विभाग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि 21 सितंबर 2024 को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विभिन्न शुल्कों से संबंधित एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें बताया गया था कि जिन क्षेत्रों में विभाग ने सीवरेज की सुविधा दी है, वहां पानी के बिल का 30% सीवरेज शुल्क के रूप में लिया जाता है।(Toilet Seat Tax)

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विभाग ने बताया कि कुछ ऐसे प्रतिष्ठान थे जो अपनी निजी जल प्रणाली होने के बावजूद विभाग के सीवरेज सिस्टम का उपयोग कर रहे थे। ऐसे मामलों में टॉयलेट सीटों की संख्या के आधार पर सीवरेज शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया था। यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि इन प्रतिष्ठानों से उचित रूप से शुल्क वसूला जा सके, लेकिन जब इस फैसले पर जनता की ओर से विरोध और फीडबैक आया, तो सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया।(Toilet Seat Tax)
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