Business चलाने वालों को अक्सर एक कन्फ्यूजन रहता है कि TAN Number आखिर होता क्या है और यह PAN से कैसे अलग है। बिना इस नंबर के TDS काटना और उसे सरकार तक जमा कराना कानूनी रूप से संभव ही नहीं है।
TAN Number क्या है?
TAN Number यानी Tax Deduction and Collection Account Number एक 10 अंकों का यूनीक कोड होता है। यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से हर उस व्यक्ति या कंपनी को दिया जाता है जो सैलरी, किराया या कमीशन पर टीडीएस काटती है। बिना इस कोड के TDS रिटर्न फाइल करना और चालान जमा करना संभव नहीं होता।
यह कैसे काम करता है?
जब कोई कंपनी या फर्म किसी को पेमेंट करती है, तो नियम के अनुसार उसमें से एक तय हिस्सा टैक्स के रूप में काटा जाता है। यह कटा हुआ पैसा सरकार के पास जमा कराने के लिए इसी यूनीक कोड का इस्तेमाल किया जाता है। हर TDS चालान, सर्टिफिकेट और रिटर्न में इसे दर्ज करना अनिवार्य होता है, वरना बैंक भुगतान स्वीकार नहीं करता।
TAN Number और PAN में अंतर?
PAN व्यक्ति या कंपनी की पहचान के लिए होता है, जबकि यह कोड सिर्फ टीडीएस काटने और जमा करने के मकसद से जारी होता है। एक ही व्यक्ति के पास PAN और TAN Number दोनों हो सकते हैं, अगर वह टैक्स काटने वाला डिडक्टर भी है। दोनों नंबर अलग-अलग मकसद से बनते हैं, इसलिए इन्हें आपस में बदला नहीं जा सकता।
आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज़
TAN Number के लिए फॉर्म 49B भरना होता है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा किया जा सकता है। इसमें बिजनेस का नाम, पता और जिम्मेदार व्यक्ति की डिटेल भरनी होती है। फॉर्म जमा करने के कुछ दिनों बाद ही यह यूनीक कोड जारी कर दिया जाता है।
इसकी जरूरत किसे होती है?
सैलरी देने वाली हर कंपनी, प्रॉपर्टी किराए पर देने वाला बड़ा किरायेदार और कमीशन देने वाला बिजनेस, इन सबको यह नंबर लेना जरूरी होता है। छोटे प्रोपराइटर से लेकर बड़ी कंपनियों तक, अगर टीडीएस काटने की जिम्मेदारी है तो यह कोड जरूरी हो जाता है। इसके बिना काम करने पर जुर्माना लगने का भी प्रावधान है।

यह न होने पर नुकसान अगर कोई डिडक्टर इसे नहीं लेता और फिर भी टीडीएस काटता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। बैंक भी बिना इस कोड के टीडीएस चालान स्वीकार नहीं करते, जिससे कंपनी की कंप्लायंस रुक जाती है। इसलिए बिजनेस शुरू करते समय ही इसे बनवा लेना सबसे सही तरीका माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. TAN Number कितने अंकों का होता है?
यह 10 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिसमें अक्षर और नंबर दोनों शामिल होते हैं।
2. क्या फ्रीलांसर को भी यह नंबर लेना जरूरी है?
अगर फ्रीलांसर किसी को पेमेंट करते हुए टीडीएस काटता है, तभी उसे इसे लेना जरूरी होता है।
3. यह कोड बनवाने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर आवेदन के 7 से 10 कार्य दिवसों के अंदर यह जारी हो जाता है।
4. क्या इसके लिए फीस लगती है?
हां, आवेदन के समय एक तय शुल्क सरकार को जमा करना होता है, जो समय-समय पर बदल सकता है।
5. TAN Number का स्टेटस कहां चेक करें?
आवेदन की स्थिति और अन्य जानकारी आधिकारिक incometax पोर्टल पर जाकर चेक की जा सकती है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। कोई भी बिजनेस या टैक्स संबंधी फैसला लेने से पहले प्रमाणित सीए या वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

