SRIKANTH BOLLA: ‘शार्क टैंक इंडिया’ को एक नया शार्क मिल गया है, और यह कोई और नहीं बल्कि बोलेंट इंडस्ट्रीज के संस्थापक और चेयरमैन श्रीकांत बोला हैं। उन्होंने खुद इस खबर को सोशल मीडिया पर साझा किया। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने शो के सेट से कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “शार्क्स के तालाब में जीवित रहने के लिए आपको खुद एक शार्क बनना पड़ता है।” अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में श्रीकांत बोला ने लिखा, “ईमानदारी से कहूं तो भारत में उद्यमिता को ‘शार्क टैंक’ ने एक बेहद सकारात्मक बढ़ावा दिया है। यहां लोग कुछ पुराने और कुछ आधुनिक सामाजिक समस्याओं को हल करने की दिशा में काम कर रहे हैं और अपनी दूरदर्शिता का परिचय दे रहे हैं।”

कौन हैं SRIKANTH BOLLA?
श्रीकांत बोला एक प्रसिद्ध भारतीय उद्यमी हैं, जो बोलेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ, सह-संस्थापक और चेयरमैन हैं। दृष्टिहीन होने के बावजूद, उन्होंने न केवल कॉरपोरेट जगत में अपनी पहचान बनाई बल्कि समाज सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्रीकांत बोला पहले दृष्टिहीन छात्र थे, जिन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रतिष्ठित Sloan School of Management में प्रवेश लिया। उनकी कंपनी बोलेंट इंडस्ट्रीज सालाना 150 मिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व अर्जित करती है और 500 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती है।

7 जुलाई 1991 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के सीतरामपुरम गांव में जन्मे श्रीकांत बोला एक तेलुगू भाषी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके माता-पिता किसान थे और औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। दृष्टिहीनता के कारण श्रीकांत बोला को पढ़ाई में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 12वीं की परीक्षा में 98% अंक हासिल करने के बाद उन्होंने छह महीने की कानूनी लड़ाई के बाद कॉलेज में प्रवेश पाया। वह इंजीनियर बनना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड, बर्कले और कार्नेगी मेलॉन सहित दुनिया के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में आवेदन किया और अंततः MIT में दाखिला लिया।

SRIKANTH BOLLA और बोलेंट इंडस्ट्रीज
श्रीकांत बोला न केवल एक बेहतरीन छात्र थे, बल्कि खेलों में भी उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने भारत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ब्लाइंड क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज में देश का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा, उन्होंने बेसबॉल और तैराकी में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। MIT में पढ़ाई के दौरान उन्होंने दृष्टिहीन छात्रों के लिए एक कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद 2005 में श्रीकांत बोला भारत लौट आए और लीड इंडिया प्रोग्राम में एक युवा नेता की भूमिका निभाई। उन्होंने 8 लाख से अधिक युवाओं को नेतृत्व, नैतिक मूल्यों और रोजगार कौशल की ट्रेनिंग दी।

2011 में उन्होंने बहु-विकलांग बच्चों के लिए ‘समान्वय सेंटर’ की स्थापना की। इसके तहत उन्होंने ब्रेल प्रिंटिंग प्रेस भी शुरू किया, जिससे विकलांग छात्रों को शिक्षा और सहायता सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। 2012 में श्रीकांत बोला ने अपने सह-संस्थापक रवि मंथा के साथ मिलकर ‘बोलेंट इंडस्ट्रीज’ की शुरुआत की। इस कंपनी को प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा का समर्थन प्राप्त है। बोलेंट इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से सुपारी के पत्तों से बने उत्पादों का निर्माण करती है और दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर प्रदान करती है। 2017 में श्रीकांत बोला को एशिया के लिए ‘फोर्ब्स 30 अंडर 30’ लिस्ट में जगह मिली, जिसमें वह चुने जाने वाले तीन भारतीयों में से एक थे।

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