नई दिल्ली में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे’ और ‘SIR बंद करो’ जैसे नारे लगाए। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस घटना ने मतदाता सूची में बदलाव और नागरिकों के मतदान अधिकारों को लेकर जारी विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
क्या है पूरा मामला?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से गलत तरीके से हटा दिया जाता है, तो वह चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित हो सकता है। इसी चिंता को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और अन्य कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं। इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच और संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही की जा सकती है।
चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय तक पहुंचने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारे लगाए और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की। प्रदर्शन में छात्र, युवा, किसान और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पुलिसकर्मियों और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात किया गया। अधिकारियों ने लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
धारा 163 लागू, पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
प्रदर्शन के मद्देनजर नई दिल्ली के संबंधित इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए थे। इन प्रतिबंधों के तहत निर्धारित परिस्थितियों में लोगों के एकत्र होने और जुलूस निकालने पर रोक लगाई जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी अप्रिय घटना को रोकना होता है।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाताओं की आवाज से जुड़ा मुद्दा बताया। इस घटनाक्रम ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मृत मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य गलतियों की पहचान करने का प्रयास किया जाता है। निर्वाचन सूची को सही और अद्यतन रखना निष्पक्ष चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी होने पर पात्र मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा पैदा हो सकता है। उनका आग्रह है कि नाम हटाने से पहले उचित सत्यापन किया जाए और प्रभावित लोगों को अपनी पात्रता साबित करने तथा सुधार करवाने का पर्याप्त अवसर मिले।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच कराने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
इन मांगों के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों का निपटारा प्रमाणों, निर्धारित प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाए।
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निष्कर्ष
SIR के खिलाफ दिल्ली में हुआ प्रदर्शन मतदाता सूची और मतदान के अधिकार को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। जहां प्रदर्शनकारी नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना भी निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है। अब इस विवाद में निर्वाचन आयोग की ओर से स्पष्ट जानकारी, शिकायतों का प्रभावी निपटारा और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होगी। लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

