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बाजार गिरने पर SIP बंद करें या जारी रखें? यह फैसला आपकी पूरी वेल्थ बदल सकता है

पोर्टफोलियो का रंग लाल दिखते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक ही ख्याल आता है — “अभी SIP रोक देता हूं, हालात ठीक होने दो, फिर शुरू कर दूंगा।” यह सोच बिल्कुल स्वाभाविक लगती है, पर SIP in Market Crash से जुड़ा असली डेटा कुछ और ही कहानी बताता है।

2008 में सेंसेक्स अपने पीक से 60% तक गिर गया था। 2020 में COVID के दौरान निफ्टी सिर्फ 40 दिनों में 38% टूट गया। दोनों बार, बहुत से लोगों ने घबराकर SIP बंद की, और यही उनकी सबसे महंगी गलती साबित हुई।

चलिए समझते हैं कि SIP in Market Crash के दौरान असल में क्या होता है, और क्यों रुकना अक्सर आगे बढ़ने से ज्यादा नुकसानदेह साबित होता है।

SIP in Market Crash: गिरावट असल में आपके फायदे में काम करती है

SIP का पूरा गणित एक सीधी बात पर टिका है — हर महीने एक तय रकम, चाहे मार्केट ऊपर हो या नीचे। जब NAV गिरती है, वही रकम ज्यादा यूनिट्स खरीद लेती है। इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं।  मान लीजिए ₹10,000 महीने की SIP है, और NAV कुछ इस तरह बदलती है:

महीना 1: NAV ₹100 → 100 यूनिट्स
महीना 2: NAV ₹85 → 117.65 यूनिट्स
महीना 3: NAV ₹70 → 142.86 यूनिट्स
महीना 4: NAV ₹60 (सबसे बड़ी गिरावट) → 166.67 यूनिट्स
महीना 5: NAV ₹75 → 133.33 यूनिट्स
महीना 6: NAV ₹90 → 111.11 यूनिट्स
महीना 7: NAV वापस ₹100 → 100 यूनिट्स

कुल निवेश: ₹70,000। कुल यूनिट्स: 871.62। जब NAV वापस अपने शुरुआती ₹100 पर आई, तो पोर्टफोलियो की वैल्यू बनी ₹87,162 — यानी ₹17,162 का सीधा फायदा, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि NAV वापस वहीं पहुंची जहां से शुरू हुई थी, ज्यादा नहीं गई।

अगर यही ₹70,000 एक साथ महीने 1 में लगाए होते, तो NAV वापस ₹100 पर आने पर सिर्फ ₹70,000 ही वापस मिलते — कोई फायदा नहीं। SIP in Market Crash के दौरान चलती रहे, तो यही असली “मैजिक” है।

SIP in Market Crash ka recovery calculation notebook ke saath

SIP in Market Crash: 2008 और 2020 का इतिहास

2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस में सेंसेक्स जनवरी 2008 से मार्च 2009 तक 60% गिरा। जिन्होंने SIP जारी रखी, उन्होंने शेयर्स 40-50% डिस्काउंट पर खरीदे। 2013 तक वो निवेश न सिर्फ रिकवर हुआ, बल्कि मजबूत रिटर्न भी दिया। 2020 का COVID क्रैश तो और भी तेज था, निफ्टी सिर्फ 40 दिनों में 38% गिरा। लेकिन दिसंबर 2020 तक, यानी सिर्फ 9 महीनों में, मार्केट पूरी तरह रिकवर हो चुका था। जिन्होंने घबराकर SIP रोक दी थी, उन्हें इस तेज रिकवरी का पूरा फायदा नहीं मिल पाया।

SIP in Market Crash: रुकने की असली कीमत क्या है

एक स्टडी के मुताबिक, ₹10,000 महीने की SIP अगर 20 साल तक बिना रुके चले (12% CAGR मानकर), तो कॉर्पस करीब ₹1 करोड़ बनता है। लेकिन अगर हर साल सिर्फ 5 महीने की SIP (करेक्शन के दौरान) मिस हो जाए, तो यह कॉर्पस ₹35-40 लाख तक कम हो सकता है।

यह फर्क सिर्फ मिस की गई किस्तों से नहीं आता, असली नुकसान उन सस्ते यूनिट्स से होता है जो कभी खरीदे ही नहीं गए, और जो अगले सालों में कंपाउंड होकर बड़ी रकम बन सकते थे।

SIP in Market Crash: पोर्टफोलियो लाल दिखना नॉर्मल है

क्रैश के दौरान पोर्टफोलियो लाल दिखना बिल्कुल स्वाभाविक है। यह नुकसान तभी “असली” बनता है जब आप बेचते हैं। जब तक यूनिट्स होल्ड हैं, यह सिर्फ एक कागजी नंबर है जो मार्केट के साथ ऊपर-नीचे होता रहेगा।

डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स ने अब तक हर बड़े क्रैश से रिकवरी की है। 2008 में करीब 2 साल लगे, 2020 में सिर्फ 8-9 महीने। लेकिन नैरो सेक्टोरल या थीमैटिक फंड्स में यह समय ज्यादा भी लग सकता है, इसलिए फंड चुनते वक्त यह ध्यान रखना जरूरी है। अगर आप SIP का पूरा गणित शुरू से समझना चाहते हैं, तो Mutual Fund Basics वाला आर्टिकल जरूर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. SIP in Market Crash के दौरान बंद करनी चाहिए या नहीं?
आमतौर पर नहीं — गिरावट के दौरान SIP जारी रखने से सस्ते NAV पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो रिकवरी के बाद बेहतर रिटर्न देती हैं।

2. रुपी कॉस्ट एवरेजिंग क्या है?
यह वह तरीका है जिसमें एक तय रकम हर महीने निवेश करने पर, NAV गिरने पर ज्यादा और NAV बढ़ने पर कम यूनिट्स मिलती हैं, जिससे औसत खरीद कीमत संतुलित हो जाती है।

3. 2008 और 2020 के क्रैश से रिकवर होने में कितना समय लगा?
2008 के क्रैश से रिकवरी में करीब 2 साल लगे, जबकि 2020 के COVID क्रैश से सिर्फ 8-9 महीनों में रिकवरी हो गई।

4. SIP रोकने पर असली नुकसान क्या होता है?
सिर्फ मिस की गई किस्त का नहीं, बल्कि उन सस्ते यूनिट्स का भी जो कभी खरीदे नहीं गए और जो सालों तक कंपाउंड हो सकते थे।

5. क्या हर फंड क्रैश से रिकवर हो जाता है?
डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा रहा है, लेकिन नैरो सेक्टोरल या थीमैटिक फंड्स में रिकवरी में ज्यादा समय भी लग सकता है।

आगे और समाचार पढ़ें:

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह कोई निवेश सलाह नहीं है। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता, इसलिए फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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