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ऑनलाइन सामान भेजने में कितना खर्च आता है? Shipping Cost निकालने का आसान तरीका

Shipping Cost किसी भी ऑनलाइन कारोबार का ऐसा खर्च है, जो सही से न समझा जाए तो मुनाफे का बड़ा हिस्सा चुपचाप खा जाता है। ग्राहक को भले ही फ्री डिलीवरी दिखे, लेकिन पार्सल पहुंचाने का खर्च किसी न किसी को तो चुकाना ही पड़ता है। नए ऑनलाइन विक्रेता अक्सर सिर्फ पार्सल का वजन देखकर खर्च का अंदाजा लगाते हैं और बाद में कूरियर का बिल देखकर हैरान रह जाते हैं।

किन बातों पर निर्भर करता है Shipping Cost?

कूरियर कंपनियां मुख्य रूप से चार बातों के आधार पर शुल्क तय करती हैं। ये हैं पार्सल का वजन, उसका आकार, भेजने और पहुंचाने की जगह के बीच की दूरी और भुगतान का तरीका। इसके अलावा डिलीवरी की स्पीड भी मायने रखती है। एयर से भेजा गया पार्सल सड़क मार्ग वाले पार्सल से महंगा पड़ता है, लेकिन जल्दी पहुंचता है।

असली वजन और वॉल्यूमेट्रिक वजन

पार्सल को तराजू पर तौलने से जो वजन आता है, उसे असली वजन कहते हैं। लेकिन हल्का सामान अगर बड़े डिब्बे में भेजा जाए, तो वह गाड़ी या विमान में ज्यादा जगह घेरता है। इसी वजह से कूरियर कंपनियां वॉल्यूमेट्रिक वजन भी निकालती हैं।

इसके लिए डिब्बे की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई को सेंटीमीटर में गुणा करके आमतौर पर 5000 से भाग दिया जाता है। कुछ कंपनियां सड़क मार्ग के लिए अलग भाजक भी इस्तेमाल करती हैं, इसलिए अपने कूरियर पार्टनर का नियम जरूर देखें। असली और वॉल्यूमेट्रिक वजन में से जो ज्यादा होता है, उसी पर शुल्क लगता है।

वजन के स्लैब और जोन का खेल

ज्यादातर कूरियर कंपनियां आधा किलो के स्लैब में शुल्क लेती हैं। यानी अगर पार्सल का वजन 1.1 किलो है, तो उससे 1.5 किलो का पैसा लिया जाएगा। दूरी के हिसाब से देश को अलग अलग जोन में बांटा जाता है, जैसे एक ही शहर के भीतर, एक ही राज्य या आसपास का क्षेत्र, एक मेट्रो शहर से दूसरे मेट्रो शहर और बाकी भारत। पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू कश्मीर और कुछ दूरदराज इलाके विशेष जोन में आते हैं, जहां डिलीवरी सबसे महंगी पड़ती है।

Shipping Cost निकालने का आसान उदाहरण

मान लीजिए आपने 30 सेंटीमीटर लंबे, 20 सेंटीमीटर चौड़े और 15 सेंटीमीटर ऊंचे डिब्बे में एक कुर्ता भेजा, जिसका असली वजन 1.2 किलो है। इस डिब्बे का वॉल्यूमेट्रिक वजन 30 गुणा 20 गुणा 15 भाग 5000 यानी 1.8 किलो होगा। चूंकि 1.8 किलो असली वजन से ज्यादा है, इसलिए इसी पर शुल्क लगेगा और स्लैब के हिसाब से यह 2 किलो माना जाएगा।

अगर किसी जोन में हर आधा किलो का रेट 40 रुपये है, तो बेस शुल्क 160 रुपये बनेगा। अब इसमें फ्यूल सरचार्ज, कैश ऑन डिलीवरी शुल्क और 18 प्रतिशत जीएसटी जुड़ने के बाद असली खर्च सामने आता है। यही डिब्बा अगर 25 गुणा 20 गुणा 10 सेंटीमीटर का होता, तो वॉल्यूमेट्रिक वजन सिर्फ 1 किलो रहता और शुल्क असली वजन के आधार पर कम लगता।

COD, RTO और दूसरे अतिरिक्त शुल्क

कैश ऑन डिलीवरी वाले ऑर्डर पर कूरियर कंपनी अलग से शुल्क लेती है, जो कभी तय रकम और कभी ऑर्डर वैल्यू का कुछ प्रतिशत होता है। ग्राहक के ऑर्डर लेने से मना करने पर पार्सल वापस आता है, जिसे RTO कहते हैं और इसका खर्च भी विक्रेता को ही उठाना पड़ता है।

इसके अलावा पैकेजिंग का सामान, गलत पता या दोबारा डिलीवरी की कोशिश जैसे खर्च भी जुड़ जाते हैं। मार्केटप्लेस पर बेचने वालों को प्लेटफॉर्म की अपनी शिपिंग फीस और कमीशन का भी ध्यान रखना होता है।

खर्च कम करने के स्मार्ट तरीके

सामान के आकार के हिसाब से सही नाप का डिब्बा चुनें, ताकि बेवजह वॉल्यूमेट्रिक वजन न बढ़े। कपड़ों जैसे हल्के सामान के लिए डिब्बे की जगह मजबूत पॉलीबैग बेहतर विकल्प हो सकता है। कई कूरियर कंपनियों के रेट की तुलना करने वाले शिपिंग एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।

Shipping Cost
Shipping Cost

ज्यादा ऑर्डर होने पर कूरियर कंपनी से अलग रेट पर बातचीत भी की जा सकती है। ऑनलाइन भुगतान पर छोटी छूट देकर COD ऑर्डर कम करें और ऑर्डर कन्फर्मेशन कॉल या मैसेज से RTO घटाएं। फ्री डिलीवरी की न्यूनतम ऑर्डर सीमा भी अपने औसत Shipping Cost को ध्यान में रखकर तय करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. Shipping Cost के लिए वॉल्यूमेट्रिक वजन कैसे निकालते हैं?

डिब्बे की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई को सेंटीमीटर में गुणा करके आमतौर पर 5000 से भाग दिया जाता है। जवाब किलो में आता है, लेकिन भाजक कूरियर कंपनी के हिसाब से अलग हो सकता है।

2. Shipping Cost पर जीएसटी लगता है क्या?

हां, कूरियर सेवा पर आमतौर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। जीएसटी में रजिस्टर्ड विक्रेता नियमों के मुताबिक इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं।

3. फ्री डिलीवरी का Shipping Cost कौन उठाता है?

फ्री डिलीवरी का खर्च आमतौर पर विक्रेता या प्लेटफॉर्म उठाता है। कई बार यह खर्च पहले से ही सामान की कीमत में जोड़ दिया जाता है।

4. Shipping Cost से जुड़े आधिकारिक उपभोक्ता नियम कहां पढ़ें?

ई-कॉमर्स से जुड़े उपभोक्ता संरक्षण नियम और शिकायत की जानकारी उपभोक्ता मामले विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उपरोक्त Shipping Cost की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

आगे और समाचार पढ़े:

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