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Post Office Savings Account: 2011 से एक ही ब्याज दर, फिर भी बैंकों से बेहतर क्यों

Post Office Savings Account की ब्याज दर 2011 से एक बार भी नहीं बदली, फिर भी यह आज कई बड़े बैंकों से बेहतर साबित हो रही है। 30 जून 2026 को वित्त मंत्रालय ने FY 2026-27 की जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए भी Post Office Savings Account की दर बिना बदलाव के जारी रखी। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि Post Office Savings Account की ब्याज दर इतने सालों से स्थिर क्यों है, और यह बैंकों से बेहतर क्यों साबित हो रही है।

Post Office Savings Account की ब्याज दर 2011 से क्यों नहीं बदली?

यह अकाउंट 2011 से लगातार 4% सालाना ब्याज दे रहा है, बिना किसी बदलाव के। ब्याज महीने की 10 तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच के सबसे कम बैलेंस पर कैलकुलेट होता है, और सालाना क्रेडिट होता है।

बैंकों के मुकाबले Post Office Savings Account बेहतर क्यों है?

2025 में RBI ने रेपो रेट में 1.25% की कटौती की, जिसके बाद SBI, HDFC और ICICI जैसे बैंकों ने अपने सेविंग्स अकाउंट रेट भी घटा दिए।

आज SBI करीब 2.70%, HDFC और ICICI करीब 3% ब्याज दे रहे हैं, जबकि Post Office Savings Account अभी भी 4% पर बना हुआ है।

यही फर्क Post Office Savings Account को छोटे शहरों और गांवों में सबसे भरोसेमंद विकल्प बनाता है।

देश भर में 1.5 लाख से ज्यादा पोस्ट ऑफिस ब्रांचों के जरिए यह अकाउंट आसानी से खोला जा सकता है, यही वजह है कि हर साल करीब 1.5 करोड़ नए अकाउंट खुलते हैं।

जरूरी नियम और शर्तें

अकाउंट एक्टिव रखने के लिए कम से कम ₹500 का बैलेंस बनाए रखना जरूरी है, वरना Minimum Balance Penalty जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। एक व्यक्ति सिर्फ एक ही Post Office Savings Account खोल सकता है, चाहे सिंगल हो या जॉइंट।

10 साल से बड़ा नाबालिग भी अपने नाम से यह अकाउंट खुलवा सकता है, या फिर गार्जियन के जरिए भी खुलवाया जा सकता है।

टैक्स छूट का फायदा

Section 80TTA के तहत सालाना ₹10,000 तक का ब्याज गैर-सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स-फ्री रहता है।

अपने बड़े Financial Goals के हिसाब से पैसा प्लान करते वक्त इस टैक्स छूट को भी ध्यान में रखा जा सकता है। यह अकाउंट सिर्फ बचत तक सीमित नहीं है, PPF, NSC, RD और SCSS जैसी दूसरी पोस्ट ऑफिस स्कीम्स में निवेश के लिए भी यही अकाउंट गेटवे का काम करता है।

Post Office Savings Account vs IPPB — क्या फर्क है?

India Post Payments Bank यानी IPPB में ब्याज दर सिर्फ 2% से 2.25% के आसपास मिलती है, लेकिन UPI, इंस्टेंट ऐप और डोरस्टेप बैंकिंग जैसी डिजिटल सुविधाएं ज्यादा मिलती हैं। बेहतर रिटर्न के लिए Post Office Savings Account और रोजमर्रा के डिजिटल लेन-देन के लिए IPPB — दोनों को साथ लिंक करना सबसे समझदारी वाला तरीका माना जाता है। ज्यादा आधिकारिक जानकारी के लिए India Post की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. Post Office Savings Account की ब्याज दर कितनी है?
4% सालाना, जो 2011 से बिना बदलाव के जारी है।

2. क्या यह बैंक सेविंग्स अकाउंट से बेहतर है?
ब्याज के लिहाज से हां, ज्यादातर बड़े बैंक अभी 2.5% से 3% के बीच ही ब्याज दे रहे हैं।

3. न्यूनतम बैलेंस कितना रखना जरूरी है?
₹500, वरना अकाउंट इनएक्टिव हो सकता है।

4. क्या ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है?
हां, Section 80TTA के तहत सालाना ₹10,000 तक का ब्याज टैक्स-फ्री है।

5. एक व्यक्ति कितने अकाउंट खोल सकता है?
सिर्फ एक, चाहे सिंगल हो या जॉइंट।

उपरोक्त जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। ब्याज दरें तिमाही आधार पर सरकार द्वारा तय होती हैं और बदल सकती हैं।

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