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PM मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता से पहले बढ़ी उम्मीदें, रक्षा-व्यापार से परमाणु ऊर्जा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को नई गति देने के उद्देश्य से PM मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात 12-13 सितंबर को राजधानी में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले होगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बैठक की पुष्टि करते हुए कहा है कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग समेत द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होगी।

पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव के बीच भारत और रूस अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखने के साथ-साथ सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में मोदी-पुतिन बैठक को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रक्षा सहयोग पर रहेगी खास नजरPM

दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने की संभावना है। हालिया चर्चाओं में रूस के Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़ी तकनीकी साझेदारी और संभावित सहयोग प्रमुखता से सामने आया है। भारत उच्च तकनीक वाले रक्षा प्लेटफॉर्म के साथ-साथ तकनीकी हस्तांतरण और घरेलू विनिर्माण के अवसरों पर भी जोर दे रहा है।

भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध कई दशकों पुराने हैं। भारतीय सशस्त्र बलों के पास रूसी मूल या रूसी तकनीक पर आधारित कई प्रमुख सैन्य प्रणालियां हैं। हालांकि, बदलते सुरक्षा वातावरण में भारत अब केवल तैयार रक्षा उपकरण खरीदने के बजाय तकनीक, संयुक्त उत्पादन और घरेलू निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है।

Su-57 को लेकर संभावित सहयोग इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि इस क्षेत्र में कोई ठोस प्रगति होती है, तो इससे भारतीय वायुसेना की भविष्य की लड़ाकू क्षमता और देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने की तैयारी

रक्षा के अलावा परमाणु ऊर्जा भी बैठक के अहम एजेंडे में शामिल हो सकती है। भारत और रूस पहले से ही परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं और दोनों पक्ष भविष्य में अतिरिक्त परियोजनाओं तथा तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा कर सकते हैं।

भारत के लिए परमाणु ऊर्जा ऊर्जा सुरक्षा और कम-कार्बन विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रूस के साथ सहयोग इस क्षेत्र में दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।

PM मोदी – पुतिन में व्यापार और भुगतान व्यवस्था पर भी चर्चा

मोदी-पुतिन बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और भुगतान से जुड़ी चुनौतियों पर भी बातचीत होने की संभावना है। पश्चिमी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में बदलाव के कारण भारत और रूस के बीच व्यापार भुगतान के वैकल्पिक तरीकों की जरूरत बढ़ी है।

क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा है कि रूस किसी खास मुद्रा से दूरी बनाने की नीति नहीं अपना रहा, बल्कि स्वीकार्य भुगतान प्रणालियों के लिए खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश राष्ट्रीय मुद्राओं को राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।भारत के लिए रूस से ऊर्जा, उर्वरक और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति भी आर्थिक दृष्टि से अहम है। रूस ने हाल में भारत को उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखने का आश्वासन भी दिया है।

यूक्रेन युद्ध भी बातचीत में अहम मुद्दा

मोदी-पुतिन वार्ता में रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी हालिया SCO बैठक में पुतिन से मुलाकात के दौरान स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि दुनिया को “अनंत युद्ध” से “युद्ध के अंत” की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा था कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है और भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

भारत ने लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए यूक्रेन संघर्ष के समाधान की वकालत की है। हालांकि, नई दिल्ली ने रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को भी बनाए रखा है। मोदी-पुतिन की आगामी बैठक में इस संतुलन को लेकर भी बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।

BRICS में भारत की बड़ी भूमिका

भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भारत ने समूह के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण को थीम बनाया है।

BRICS अब 11 पूर्ण सदस्यों वाला विस्तारित समूह बन चुका है। भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान व्यापार, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, स्टार्टअप और वैश्विक शासन में सुधार जैसे विषयों पर व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

रूस ने BRICS के विभिन्न सहयोग प्रारूपों में नए देशों को शामिल करने के विचार का भी समर्थन किया है। ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से नहीं, बल्कि BRICS के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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भारत-रूस संबंधों का नया चरण

मोदी और पुतिन के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क भारत-रूस संबंधों की खास पहचान रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, उर्वरक और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग जारी है। अगस्त के अंत में बिश्केक में हुई पिछली बैठक में भी दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की थी।

अब नई दिल्ली में होने वाली बैठक से उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ नए समझौतों और सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।

निष्कर्ष

PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की आगामी द्विपक्षीय बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत और रूस दोनों बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपने रणनीतिक हितों को मजबूत करना चाहते हैं। रक्षा में Su-57 जैसी उन्नत तकनीक, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, भुगतान व्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे बैठक के केंद्र में रह सकते हैं।

इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक शांति पर भारत का रुख भी चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले होने वाली यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों के अगले चरण की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। दोनों देशों की नजर जहां पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखने पर है, वहीं नई दिल्ली और मॉस्को अब रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापार में सहयोग को और व्यापक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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