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सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर PM मोदी सख्त, बोले- ‘क्या चौथी पार्टी से भी ऑडिट कराना पड़ेगा?’

PM मोदी ने देश में चल रही सार्वजनिक निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। मंगलवार को हुई मासिक प्रगति (PRAGATI) बैठक में प्रधानमंत्री ने निर्माण कार्यों में सामने आ रही गुणवत्ता संबंधी खामियों पर चिंता जताते हुए अधिकारियों से सवाल किया कि जब परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तीसरे पक्ष का ऑडिट पहले से होता है, तो फिर ऐसी कमियां क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने तीखे अंदाज में पूछा, “क्या अब हमें चौथी पार्टी से भी ऑडिट कराना पड़ेगा?”

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है, लेकिन केवल तेजी से काम पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा, निगरानी और लंबे समय तक उपयोगिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के मुताबिक, मोदी ने मंत्रालयों, राज्यों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीक अपनाने तथा हर चरण पर गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी मजबूत करने को कहा।

PM मोदी द्वारा छह परियोजनाओं की हुई समीक्षाPM मोदी

प्रगति बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़ी छह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के तौर पर नहीं, बल्कि एक एकीकृत परियोजना के रूप में देखा और मॉनिटर किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी परियोजना का एक हिस्सा पूरा हो जाना अपने आप में सफलता नहीं माना जा सकता, यदि उससे जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार नहीं है।

PM मोदी–‘रफ्तार के साथ गुणवत्ता भी जरूरी’

PMO के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बैठक में जोर देकर कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति के साथ गुणवत्ता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों से गुणवत्ता आश्वासन और पर्यवेक्षण की व्यवस्था को मजबूत करने को कहा।

प्रधानमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक निर्माण की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सड़क, पुल, सुरंग, रेलवे और अन्य परियोजनाओं में निर्माण के बाद सामने आने वाली खामियां न केवल सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं, बल्कि कई बार नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं।

तीसरे पक्ष के ऑडिट पर सवाल

सरकारी परियोजनाओं में थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट एक सामान्य व्यवस्था है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परियोजना निर्धारित तकनीकी मानकों, डिजाइन और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप बनाई जा रही है।

लेकिन प्रधानमंत्री की ‘चौथी पार्टी’ वाली टिप्पणी का मूल सवाल यही था कि यदि तीसरे पक्ष की निगरानी के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता में खामियां सामने आती हैं, तो मौजूदा ऑडिट प्रणाली कितनी प्रभावी है।

PM मोदी का बिजली परियोजनाओं पर भी विशेष जोर

बैठक के दौरान बिजली क्षेत्र से जुड़ी एक परियोजना की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि केवल बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, यदि उसके अनुरूप ट्रांसमिशन क्षमता विकसित नहीं की जाए।

उन्होंने इसकी तुलना इस बात से की कि बांध बना दिया जाए, लेकिन नहरें न बनाई जाएं, तो उसका पूरा लाभ नहीं मिल सकता। यानी किसी भी बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट को उसके व्यापक सिस्टम और अंतिम उपयोगिता के संदर्भ में देखना जरूरी है।

इस टिप्पणी के जरिए प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को यह संदेश दिया कि परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण पूरा होने के आंकड़े से नहीं मापी जानी चाहिए। वास्तविक सफलता तब होगी जब उसका अपेक्षित लाभ नागरिकों और अर्थव्यवस्था तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।

तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

प्रधानमंत्री ने गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। निर्माण क्षेत्र में डिजिटल मॉनिटरिंग, रियल-टाइम डेटा, ड्रोन आधारित निरीक्षण, सेंसर और अन्य तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल परियोजनाओं की निगरानी में किया जा सकता है।

सरकार के लिए चुनौती यह है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित न रहे, बल्कि यदि किसी निर्माण स्थल पर गुणवत्ता संबंधी समस्या दिखाई देती है तो उस पर समय रहते कार्रवाई भी हो।

साइबर फ्रॉड पर भी हुई चर्चा

प्रगति बैठक में केवल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता पर ही चर्चा नहीं हुई। प्रधानमंत्री ने साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों की रोकथाम की भी समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा को मजबूत किया जाना चाहिए। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए लगातार और लक्षित जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई गई।

निर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता को लेकर व्यापक चिंता

प्रधानमंत्री की टिप्पणी को हाल के दिनों में सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर चल रही व्यापक बहस के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। सड़क और हाईवे निर्माण में ठेकेदारी की कई परतों तथा अत्यधिक कम कीमत पर ठेके हासिल करने के कारण गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका पहले भी उठती रही है।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि मंत्रालय जीएसटी रिकॉर्ड के जरिए ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले मल्टी-लेयर सब-कॉन्ट्रैक्टिंग पर नजर रखेगा। उन्होंने चेतावनी दी थी कि कई स्तरों पर काम सौंपे जाने से निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने भी हाल में 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सार्वजनिक परियोजनाओं के विस्तृत गुणवत्ता ऑडिट की घोषणा की है, जिसमें IIT विशेषज्ञों की मदद लेने की योजना है।

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जवाबदेही तय करने की चुनौती

विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल केवल ऑडिट की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ऑडिट में सामने आने वाली खामियों पर जिम्मेदारी तय हो। यदि किसी परियोजना में तकनीकी कमी पाई जाती है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि गलती डिजाइन में थी, सामग्री में, ठेकेदार के काम में, पर्यवेक्षण में या संबंधित अधिकारियों की निगरानी में।

प्रधानमंत्री की ‘चौथी पार्टी’ वाली टिप्पणी इसी जवाबदेही के सवाल को रेखांकित करती है। यदि मौजूदा व्यवस्था में कई स्तरों की जांच के बावजूद खराब गुणवत्ता का काम सामने आता है, तो केवल एक और ऑडिट जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। निगरानी प्रणाली को अधिक पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाना भी जरूरी होगा।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति बैठक में सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि काम तेजी से पूरा करना और काम अच्छी गुणवत्ता का होना—दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।

छह परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान ‘चौथी पार्टी ऑडिट’ पर उनका सवाल मौजूदा थर्ड-पार्टी गुणवत्ता जांच व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर चिंता को सामने लाता है। हालांकि, अभी चौथे पक्ष के किसी औपचारिक ऑडिट सिस्टम की घोषणा नहीं हुई है।

सरकार का अगला लक्ष्य अब संभवतः गुणवत्ता नियंत्रण को केवल कागजी जांच तक सीमित रखने के बजाय निर्माण के प्रत्येक चरण में मजबूत करना होगा। आधुनिक तकनीक, स्वतंत्र विशेषज्ञता, बेहतर निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही के जरिए ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सार्वजनिक धन से बनी परियोजनाएं लंबे समय तक सुरक्षित, टिकाऊ और नागरिकों के लिए उपयोगी रहें।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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