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स्मार्टफोन में 100x जूम का असली सच क्या है, आसान भाषा में समझिए!

Periscope Camera स्मार्टफोन का एक खास टेलीफोटो कैमरा है, जो रोशनी को 90 डिग्री मोड़कर फोन के अंदर लेटे हुए लेंस तक पहुंचाता है। इसी तरीके से पतले फोन में भी दूर की चीजों को बिना क्वालिटी खोए करीब से कैप्चर किया जा सकता है। आजकल फोन के विज्ञापनों में 10x और 100x जूम जैसे बड़े नंबर खूब दिखते हैं। लेकिन असल में जूम करने पर कई बार तस्वीर धुंधली नजर आती है। तो आखिर कौन सा जूम असली है और कौन सा सिर्फ दिखावा?

स्मार्टफोन में जूम के तीन प्रकार

फोन में जूम मुख्य रूप से तीन तरह का होता है: ऑप्टिकल जूम, डिजिटल जूम और हाइब्रिड जूम। ऑप्टिकल जूम में लेंस खुद दूर की चीज को बड़ा करके सेंसर तक पहुंचाता है। इसमें फोटो की डिटेल्स खराब नहीं होतीं, इसलिए इसे सबसे भरोसेमंद जूम माना जाता है।

डिजिटल जूम असल में फोटो का एक हिस्सा काटकर उसे बड़ा कर देता है। इसलिए इसमें क्वालिटी गिर जाती है। हाइब्रिड जूम इन दोनों का मेल है। इसमें ऑप्टिकल लेंस, हाई रेजोल्यूशन सेंसर और एआई सॉफ्टवेयर मिलकर बेहतर तस्वीर बनाने की कोशिश करते हैं।

सामान्य टेलीफोटो लेंस की दिक्कत क्या है?

ज्यादा ऑप्टिकल जूम के लिए लेंस और सेंसर के बीच ज्यादा दूरी चाहिए, जिसे फोकल लेंथ कहते हैं। स्मार्टफोन की मोटाई सिर्फ 8 से 9 मिलीमीटर होती है। ऐसे में सीधे खड़े लेंस से 2x या 3x से ज्यादा जूम निकालना मुश्किल हो जाता है।

Periscope Camera कैसे काम करता है?

Periscope Camera का नाम पनडुब्बी में लगने वाले पेरिस्कोप से आया है, जिसमें शीशों की मदद से रोशनी को मोड़ा जाता है। सबसे पहले रोशनी फोन के पीछे बनी छोटी खिड़की से अंदर आती है। वहां लगा एक प्रिज्म या शीशा उसे 90 डिग्री मोड़कर फोन की लंबाई की दिशा में भेज देता है। अब लेंस फोन के अंदर लेटे हुए रखे जाते हैं, इसलिए उन्हें काफी ज्यादा जगह मिल जाती है।

इसी लंबी दूरी की वजह से 5x या उससे ज्यादा ऑप्टिकल जूम संभव हो पाता है। आखिर में रोशनी सेंसर पर पहुंचती है और साफ, डिटेल वाली जूम फोटो तैयार होती है। 100x जूम का असली सच जिन फोन में 100x जूम लिखा होता है, उनमें आमतौर पर 5x या 10x तक ही असली ऑप्टिकल जूम होता है।

Periscope Camera के आगे का पूरा जूम डिजिटल और एआई प्रोसेसिंग से बनता है। इसलिए 30x के बाद की फोटो अक्सर पेंटिंग जैसी दिखने लगती है। फोन खरीदते समय हमेशा “ऑप्टिकल जूम” का नंबर देखें, न कि सबसे बड़ा जूम नंबर।

किन फोन में मिलता है यह कैमरा?

Samsung Galaxy S सीरीज के Ultra मॉडल, Google Pixel के Pro मॉडल और iPhone के Pro Max मॉडल में Periscope Camera तकनीक मिलती है। Vivo, OPPO और Xiaomi के फ्लैगशिप फोन भी इसके लिए जाने जाते हैं। अब यह फीचर धीरे धीरे मिड रेंज फोन तक भी पहुंचने लगा है।

Periscope Camera तकनीक की कुछ कमियां भी हैं

Periscope Camera की वजह से फोन के पीछे बड़ा कैमरा बंप बनता है और फोन की कीमत भी बढ़ जाती है। लंबे रास्ते की वजह से कम रोशनी में इसकी फोटो मुख्य कैमरे जितनी अच्छी नहीं आती। ज्यादा जूम पर हल्का सा हाथ हिलने से भी फोटो बिगड़ सकती है। इसलिए अच्छे फोन में इस लेंस के साथ ओआईएस यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन दिया जाता है।

Periscope Camera
Periscope Camera

स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी से जुड़ी और जानकारी

फोन में फोटो प्रोसेसिंग और एआई फीचर्स के पीछे का दिमाग समझने के लिए Phone में NPU क्या होता है वाली गाइड पढ़ें। फोन की स्क्रीन को बेहतर समझने के लिए Smartphone Display Guide देखें। अगर आप हिलते हाथों के बिना स्मूथ वीडियो बनाना चाहते हैं, तो Gimbal कैसे काम करता है भी जरूर पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या Periscope Camera और टेलीफोटो कैमरा एक ही हैं?

दोनों का काम दूर की चीजों को जूम करना है। फर्क बस इतना है कि इसमें लेंस फोन के अंदर लेटे हुए होते हैं, इसलिए ज्यादा ऑप्टिकल जूम मिलता है।

2. ऑप्टिकल जूम और डिजिटल जूम में कौन बेहतर है?

ऑप्टिकल जूम हमेशा बेहतर होता है, क्योंकि इसमें फोटो की डिटेल्स सुरक्षित रहती हैं। डिजिटल जूम में फोटो को सिर्फ बड़ा किया जाता है।

3. क्या ज्यादा जूम वाला फोन हमेशा अच्छा होता है?

जरूरी नहीं, अगर आप ज्यादातर सेल्फी या सामान्य फोटो लेते हैं तो अच्छा मुख्य कैमरा ज्यादा काम का है। जूम लेंस वाइल्डलाइफ, कॉन्सर्ट और पोर्ट्रेट फोटो के शौकीनों के लिए ज्यादा फायदेमंद है।

4. टेलीफोटो लेंस के बारे में ज्यादा जानकारी कहां मिलेगी?

टेलीफोटो लेंस के काम करने के तरीके और इतिहास की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ सकते हैं।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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