पहाड़ों की परंपराओं को जीवित रखने के लिए यहां किए जा रहे हैं कई प्रयास

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पौड़ी (संवाददाता- कुलदीप बिष्ट): पहाडों में पारम्परिक होली को मनाने के लिये होली आने से पहले ही इन दिनों होली के होल्यारों की टोली पौड़ी जिले के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का रूख कर पहाडी वेशभूषा और पहाडी होली नृत्यों के जरिये लोगों को पारम्परिक होली की झलकियां दिखा रही है। जिससे लोग अपनी परम्परा की तरफ लौट सके और आने वाले समय में इन्हीं परम्पराओं के अनुसार पहाड़ी त्योहारों को मना पायें।

होली के होल्यारों का दल पिछले 8 सालों से पहाड़ की पारम्परिक होली की इस संस्कृति को बचाने के लिये निरंतर प्रयास कर रहा है जिसमें सफेद पोशाक और काली टोपी पहनकर होली के होल्यारों का दल पहाड़ी होली गायन और नृत्य संग इस पहाडी वेशभूषा में इसी तरह से होली को मना रहा है और होली के लिये चंदा भी एकजुट कर रहा है।

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हर साल होली आने से चंद दिन पूर्व बाजारों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पहाड़ की पारम्परा की ओर आकर्षित करने के लिये इस पारम्परिक होली के रंग बिखेरे जा रहे हैं। पहाडी अंदाज में मनायी जा रही सतपुली से होली के होल्यारों का दल जहां 8 सालों से इस परम्परा की तरफ लोगों का ध्यान केंद्रित कर रहा है तो वहीं जिले के राठ क्षेत्र के लोग भी इस कवायद में जुटे हैं और सफेद पोशाक संग बाजारों में होली के गायन और नृत्यों में झूम कर लोगों को उसी होली की याद दिला रहे हैं जो नये क्लेवर की होली में नजर नहीं आते। ऐसे में लोगों से अपील की जा रही है कि पौराणिक संस्कृति को धरोहर की तरह सजोने के लिये इसका संरक्षण जरूरी है इसलिये हर त्योहरों को पहाड़ी परम्परा के अनुसार लोग जरूर मनाये।

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