LUCKNOW SMART METER PROTEST: लखनऊ में प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। शहर के कई इलाकों में लोग इन मीटरों को लेकर नाराज हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक 20 से ज्यादा प्रदर्शन हो चुके हैं, वहीं परेशान उपभोक्ता पार्षदों का घेराव कर अपनी शिकायतें भी दर्ज करा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली की रीडिंग अचानक बहुत ज्यादा आने लगी है, बिना किसी सूचना के कभी भी बिजली काट दी जाती है और पैसा जमा करने के बाद भी घंटों तक सप्लाई बहाल नहीं होती।
सोलर पैनल वाले उपभोक्ता को 60 हजार का बिल
राजाजीपुरम की एलडीए कॉलोनी में रहने वाले यश गुप्ता ने बताया कि उनके घर में पहले से सोलर पैनल लगा हुआ है, जिसकी वजह से उनका बिजली बिल आमतौर पर करीब 300 रुपए ही आता था। लेकिन जब से उनके यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाया गया, तब से स्थिति पूरी तरह बदल गई।
उन्होंने बताया कि अचानक उनके खाते में 60 हजार रुपए का बिल दिखने लगा, जिसे देखकर वह हैरान रह गए। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने 10 हजार रुपए जमा भी किए, लेकिन सिर्फ 15 दिनों के भीतर ही उनके खाते में लगभग 350 रुपए का बैलेंस बचा। यश गुप्ता का कहना है कि मीटर में गड़बड़ी है और इसे तुरंत बदला जाना चाहिए।

LUCKNOW SMART METER PROTEST
राजधानी लखनऊ में प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में उपभोक्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कांशीराम कॉलोनी, लौलाई उपकेंद्र (इंदिरा नगर), चिनहट क्षेत्र, आशियाना के पकरी गांव और मध्यांचल विद्युत मुख्यालय के बाहर लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
LUCKNOW SMART METER PROTEST में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। लोगों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना और उनकी सहमति के पुराने पोस्टपेड मीटर हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा दिए गए, जिसके बाद से बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं।
इतना ही नहीं, भुगतान करने के बावजूद बिजली कट जाती है और मोबाइल ऐप में बैलेंस भी समय पर अपडेट नहीं होता।
क्या है वजह?
दरअसल, LUCKNOW SMART METER PROTEST का कारण ये है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी UPPCL ने रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत पूरे प्रदेश में करीब 3.5 करोड़ पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदलने की योजना शुरू की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य AT&C लॉस कम करना, बिजली चोरी रोकना और राजस्व बढ़ाना बताया गया।
अप्रैल 2026 तक प्रदेश में लगभग 78 लाख से 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जिनमें 70 लाख से अधिक मीटर प्रीपेड मोड में थे। सितंबर 2025 में UPPCL ने नए बिजली कनेक्शनों के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य कर दिया था।

हालांकि 1 अप्रैल 2026 को सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी यानी Central Electricity Authority ने नियमों में बदलाव किया। नए नियमों के अनुसार अब स्मार्ट मीटर प्रीपेड या पोस्टपेड दोनों विकल्पों में हो सकते हैं और इसका निर्णय उपभोक्ता की पसंद के आधार पर होना चाहिए।
लेकिन इसके बावजूद UPPCL ने नए कनेक्शनों पर प्रीपेड व्यवस्था जारी रखी, जबकि पुराने पोस्टपेड मीटरों को बदलने को लेकर विवाद और विरोध तेजी से बढ़ने लगा।
लखनऊ में अब तक लगभग 7000 उपभोक्ताओं ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर हटाकर फिर से पोस्टपेड मीटर लगाने के लिए आवेदन दिया है। लगातार बढ़ते LUCKNOW SMART METER PROTEST और जनदबाव के बीच बिजली विभाग पर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
फिलहाल उपभोक्ता यही मांग कर रहे हैं कि उन्हें अपनी पसंद का विकल्प मिले और बिना सहमति किसी भी तरह की व्यवस्था उन पर न थोपी जाए।
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

