/ Mar 24, 2026
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LOK SABHA: केंद्र सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण देने की दिशा में एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इसी संसद सत्र में दो महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है, जिसका उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने की मौजूदा जटिल शर्तों में बदलाव करना है। इस नए प्रस्ताव के लागू होने से भारतीय लोकतंत्र का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है।
2023 में पारित 106वें संविधान संशोधन कानून के मुताबिक, महिला आरक्षण नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) के बाद ही लागू होना था। हालांकि, नई जनगणना में हो रही देरी को देखते हुए सरकार अब बीच का रास्ता निकालने जा रही है। नया प्रस्ताव: सरकार का विचार है कि नई जनगणना का इंतज़ार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आधार मानकर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इससे 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करना संभव हो सकेगा।

मौजूदा सांसदों की नाराजगी दूर करने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार LOK SABHA की कुल सीटों में लगभग 50% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव कर रही है।
कुल सीटें: 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना।
आरक्षित सीटें: बढ़ी हुई 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
बहुमत का आंकड़ा: सदन का आकार बढ़ने के बाद बहुमत का जादुई आंकड़ा भी 272 से बढ़कर 409 हो जाएगा।
राज्यों पर असर: उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल जैसे बड़े राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में 50% तक का इजाफा देखा जा सकता है।
सरकार को इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए संसद में दो अलग-अलग विधेयक पेश करने होंगे:
नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन बिल: आरक्षण लागू करने की शर्तों (जनगणना) में बदलाव के लिए।
परिसीमन कानून संशोधन बिल: सीटों की संख्या बढ़ाने और उनके निर्धारण के लिए।
चूंकि ये संवैधानिक संशोधन से जुड़े मामले हैं, इसलिए इन्हें पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य होगा। इसी सिलसिले में गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को एनडीए के सहयोगियों के साथ-साथ वाईएसआर कांग्रेस, सपा, आरजेडी और एआईएमआईएम जैसे गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर आम सहमति बनाने की कोशिश की है।

प्रस्ताव के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षित 273 सीटों के भीतर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं को उनके कोटे के हिसाब से आरक्षण मिलेगा। हालांकि, विपक्षी दल लगातार इसमें OBC महिलाओं के लिए अलग से उप-कोटा (Quota within Quota) की मांग कर रहे हैं, जो सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनी हुई है।
| वर्ष | महत्वपूर्ण पड़ाव |
| 1931 | सरोजिनी नायडू ने पहली बार महिलाओं की समान राजनीतिक स्थिति की मांग उठाई। |
| 1974 | स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की पहली आधिकारिक सिफारिश। |
| 1993 | 73वें और 74वें संशोधन के जरिए पंचायतों और नगरपालिकाओं में 33% आरक्षण लागू। |
| 2023 | संसद के दोनों सदनों से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संशोधन) पारित हुआ। |
| 2026 | जनगणना की शर्त हटाकर 2029 तक आरक्षण लागू करने की नई कवायद शुरू। |
LOK SABHA भारत की संसद का निचला सदन है और इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में गिना जाता है। LOK SABHA में देश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए सदस्य शामिल होते हैं, जो आम चुनाव के जरिए जनता द्वारा चुने जाते हैं। सरकार बनाने और गिराने की असली शक्ति लोकसभा के पास होती है। LOK SABHA का कार्यकाल सामान्यतः पांच वर्ष का होता है, लेकिन यदि किसी कारणवश सरकार बहुमत खो देती है, तो इसे पहले भी भंग किया जा सकता है।
LOK SABHA का मुख्य कार्य कानून बनाना, सरकार की नीतियों पर चर्चा करना और कार्यपालिका पर नियंत्रण रखना होता है। कोई भी महत्वपूर्ण विधेयक, विशेष रूप से वित्त से संबंधित विधेयक, पहले लोकसभा में ही पेश किया जाता है। बजट को पास करने का अधिकार भी मुख्य रूप से लोकसभा के पास होता है। लोकसभा का संचालन एक अध्यक्ष द्वारा किया जाता है, जिसे स्पीकर कहा जाता है। वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में लोकसभा देश की सरकार के गठन का आधार भी है, क्योंकि जिस दल या गठबंधन को यहां बहुमत मिलता है, वही सरकार बनाता है और उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है।
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