LGBTQ Community: इन संघर्षों से गुज़रकर मिली Homosexuality को भारत में पहचान।

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देहरादून ब्यूरो। भारत की population का 8 प्रतिशत भाग वो है जो LGBTQ Community से तालुक रखता है। ये वो समुदाय है जो आज खुलकर जी रहा है अब उनके ऊपर अपनी इच्छा से अपने पार्टनर के साथ रहने पर कोई Criminal case नही होता। हां मगर ये भी नकारा नही जा सकता की हमारे देश में अभी भी इस समुदाय को अलग नजरिए से देखा जाता है। ये नज़रिया घृणा से भरा होता है तानों से भरा होता है। मगर चलों राहत ये है कि संविधान में इनके अस्तित्व को एक पहचान मिली है जो 2018 से पहले नही थी। इस पहचान को हांसिल करने के लिए काफी महनत लगी है। LGBTQ Community की भी और एक महिला की भी जिसने निरंतर LGBTQ Community के  अस्तित्व को पहचान दिलाने पर काम किया है।

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इस महिला के बारे में बात करने से पहले ज़रा अच्छे से समझ लेते हैं क्या है LGBTQ Community और क्यों इसको नाम दिया गया LGBTQ। LGBTQ का फुल फॉर्म है।

L यानी की Lesbian, जब एक लड़की या फिर महिला का दूसरी लड़की की प्रति आकर्षण होता है तो उन्हें lesbian कहा जाता है।

G  का मतलब है gay. जब दो पुरुष एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं तो उन्हें कहा जाता है Gay.

B का मतलब है Bisexual. जब एक इन्सान महिला और पुरुष दोनों से आकर्षित हो तो उसे Bisexual कहा जाता है।

T का मतलब है Transgender. Transgender वो लोग होते हैं जो पैदाइशी कुछ और होते हैं और बड़े होकर उनकी फीलिग्स बदल जाती है। यानी की पैदाइशी कोई लड़का पैदा हुआ है और बड़े होकर अगर उसके अंदर लड़कियों जैसी भावनाएं जागृत होती है तो वो अपना लिंग भी परिवर्तित करा देते हैं ऐसे ही पैदाइशी अगर किसी लड़की के मन में लड़को जैसी भावनाएं आती हैं तो वो भी इसी category में आते हैं।

Q का मतलब होता है क्वीयर। ये वो लोग होते हैं जो न अपनी पहचान तय कर पाए हैं न ही शारीरिक चाहत। यानी की ये ऊपर की किसी भी श्रेणी में अपने आप को शामिल नही कर पाते हैं।

ये तो हुई बात की क्या है LGBTQ Community. अब बात कर लेते हैं कि LGBTQ Community को कैसे मिली समाज में अपनी एक जगह। LGBTQ Community को समाज में उनकी जगह दिलाने के लिए एक और औरत ने 18 साल तक कड़ी महनत की। इनका नाम है अंजली गोपालन।

1957 वो वर्ष था जब चेन्नई में उस बच्ची का जन्म हुआ जिसने LGBTQ Community की जिन्दगी ही बदल डाली यानी की अंजली गोपालन का। अंजली ने भारत और अमेरिका दोनों जगह पढ़ाई की। अंजली ने अमेरिका में एक Organization के साथ करीबन एक दशक तक काम करते हुए South East Asia के Migrants के लिए काफी काम किया और उनकी मदद की। लेकिन कैसे अंजली के मन में लोगों की मदद करने का भाव आया। दरअसल हर इन्सान की लाइफ में कोई न कोई ऐसा Incident जरूर होता है जिससे हमारी लाइफ में एक बड़ा बदलाव आता है। एक दिन अंजली और उनकी दोस्त नाना नानी के ऊपर बात कर रहे थे। तभी उनकी दोस्त ने पूछा तुम्हारे नाना नानी कहा हैं तो अंजली ने बताया कि मेरे नाना नानी इस दुनिया में नही रहे, तभी पास बैठी अंजली की मां कहती है कि मेरे मां बाप का कत्ल हुआ था भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय वो भी मेरे ही सामने। और ये बात सुनकर अंजली शॉक हो गई थी। उन्होंने अपनी मां से कहा कि आपने ये बात आजतक मुझे क्यों नही बताई। जिसके जवाब में उनकी मां कहती हैं कि ये कोई बताने वाली बात नही थी। अंजली ने अपने मां से कहा कि अगर मै आपकी जगह होती तो मेरे मन में ये बात हमेशा रहती की मेरे मां बाप को विभाजन के समय में मुसलमानों ने मार डाला। और बावजूद इसके कैसे आपके इतने सारे मुस्लिम फ्रैन्ड्स हैं। ये सुनने के बाद अंजली की मां कहती हैं कि मै उम्मीद करती हूं कि ये मै तुम्हारे मूंह से आखिरी बार सुन रही हूं। उन्होंने आगे कहा कि जिसने मेरी देखभाल की थी वो भी एक मुसलमान ही था। जो कुछ भी उस समय हुआ वो दो तरफा था इसमें किसी धर्म विषेश का कोई हाथ नही था। और ये बात अंजली के मन में घर कर गई जिसके बाद उन्होंने किसी भी कारण से लोगों को जज करना बंद कर दिया और ऐसा करते हुए उन्हें लगने लगा कि उनके अंदर इंसानियत बढ़ती जा रही है। जिसके बाद वो लग गई ज़रूरतमंदों की मदद करने में।

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फिर अंजली ने 1994 में Naz Foundation की स्थापना की। जिसमें वो HIV/AIDS के मरीजों की मदद करती थीं। दो साल की महनत के बाद 1996 में Naz Foundation की मदद से दिल्ली में पहला HIV क्लीनिक खोला गया। इसके बाद 2001 में homosexuality को अपराध मानने के खिलाफ अंजली गोपालन ने एक PIL दायर की। ये PIL थी उस कानून के खिलाफ जो भारत के ही कुछ नागरिकों को खुलकर सांस नही लेने दे रही थी। IPC Section 377 वो section था जो 1861 में Britishers  द्वारा लागू किया गया था। ये law था जिसमें कहा गया था की all sexual acts which are against the order of nature would be a criminal act. जिसका मतलब था कि वो सभी Sexual acts जो प्रकृति के आदेश के खिलाफ होंगे वो दंडनीय अपराध होंगे, यानी की Homosexuality।

असल में अंजली गोपालन 1996 से इस पर काम कर रहीं थी और इसी दौरान वो कई लोगों की काउंसलिंग भी किया करती थी। अंजली बताती हैं कि जब वो किसी परिवार की काउंसलिंग करती थी तो उस दौरान कई बच्चों के पैंरेट्स मुझे बोलते कि ठीक है हम अपने बच्चे को वो जैसा है वैसे ही अपना लेगें मगर इससे कहिए कि वो शादी करले और बच्चे पैदा करले। अपने बचे हुए समय में वो जो कुछ भी करना चाहे कर सकता है। इसी से आप लोगों की मानसिकता का अंदाजा लगा सकते हैं कि उनकी क्या सोच है Homosexuality को लेकर और शादी को लेकर।

इसके बाद अंजली के पास एक और केस आया जिसके बाद उन्हें लगा कि अब बहुत हुआ अब तो जरूरत है कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की। एक बच्चा अंजली के पास आया और उसने बताया कि उसके पैरेंट्स उसे एक बड़े हॉस्पिटल लेकर गए और उसे वहां शॉक ट्रीटमेंट दिया गया ताकी वो Straight हो जाए। जिसके बाद अंजली को समझ आ गया कि उन्हें इस तरह के अपराध के खिलाफ तो कदम उठाना पड़ेगा और साथ ही देश में हो रहे इसी तरह के अपराध के खिलाफ जिनके खिलाफ लोग आवाज़ नही उठा पा रहे हैं।

इसके बाद अंजली National Human Rights Commission के पास गईं और बाकी के समाज की तरह ही यहां से भी उन्हें  निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद 2001 में अंजली ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जो मुश्किलों से होने वाला भरा था। सबसे पहले उनके केस को High Court ने बाहर का रस्ता दिखाया। इसके बाद उन्होंने Supreme Court का दरवाज़ा खटखटाया। वहां से उन्हें फिरसे वापिस High Court जाने को कहा गया। इसके बाद 2009 में High Court में जब ये मुकदमा चल रहा था तो naz Foundation द्वारा Section 377 को पूरा पढ़े जाने की गुजारिश की गई जिसमें Child Abuse और animal abuse भी शामिल था। जिसके बाद साल 2012 में POCSO Act 2012 आया और Child Abuse के खिलाफ एक अलग ऐक्ट बना। इन सबके बाद 2009 में Delhi High Court ने Homosexuality को मान्यता देते हुए उन सभी लोगों के चहरों पर खुशी दी जिसकी वजह से लोग समाज में खुलकर अपनी Sexuality को अपना नही सकते थे। अंजली गोपालन की महनत रंग लाई और उन्होंने वो कर दिखाया जो भारत में होना नामुमकिन सा दिखाई दे रहा था। लेकिन 2013 में Supreme Court ने उन सभी के चहरों की रंगत  उड़ा दी जो Delhi High Court के 2009 के फैसले से खुश थे। 2013 में Supreme Court ने ये कहते हुए Delhi High Court के फैसला को खारिज कर दिया कि जिन LGBTQ के बारे में बात हो रही है वो तादात में इतने कम हैं या फिर न के बराबर है वो हैं कहां और साथ ही ये हमारे Moral Values के खिलाफ है। इसके बाद वो हुआ जो आजतक न हुआ था। देश के अलग अलग कोनों से अंजली गोपालन के साथ खड़े दिखाई दिए कई gay और lesbian Couples। अब तक अंजली गोपालन के साथ बहुत कम ऐसे लोग खड़े होकर लड़ाई लड़ रहे थे। मगर Supreme Court के इस justification के बाद पूरे देश से LGBTQ Community के लोग अंजली के साथ सड़कों पर उतर गए और उन्होंने Supreme Court के साथ साथ पूरे देश को ये संदेश दिया कि “हम भी हैं”। जिसके बाद Supreme court को Homosexuality के समर्धन में फैसला सुनाना पड़ा। और 6 सितंबर 2018 को Supreme court ने अपना जजमेंट सुनाते हुए Homosexuality को Decriminalize करते हुए मान्यता देदी। जिसके बाद आखिरकार अंजली गोपालन की महनत सही माएने में रंग लाई और 2018 से लेकर आजतक LGBTQ Community को हमारे देश में एक अलग पहचान मिली और हक मिला अपनी जिंदगी को खुद की शर्तों पर जीने का।