हरिद्वार ( अरूण कश्यप) :   पतंजलि योगपीठ ने कई स्थानीय लोगों के घरों पर कब्जा कर उन्हें पहली मंजिल तक जमीन के नीचे पहुंचा दिया है। सभी घरों के बिजली पानी और सीवर के कनेक्शन भी तबाह हो गए । यही नहीं लोगों के घर भी खंडहरों में तब्दील हो गए। ये कहना है उन पीड़ित लोगों का है जो पिछले लंबे समय से बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ नाम के साम्राज्य से पीड़ित हैं।

प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ित सतीश सेठी, नवीन शेट्टी ,केशव जुयाल और अनिल यादव आदि ने बताया कि हम लोग 2007 से यहां रह रहे हैं। इसके बाद यहां बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ और विश्वविद्यालय का निर्माण किया। और हम सबके घरों को जमींदोज कर दिया। उन्होंने बताया कि पतंजलि योगपीठ ग्राम बहादरपुर सैनी फेस 1 में एक हरी भरी कॉलोनी गीतांजलि रेजीडेंसी के नाम से हुआ करती थी। जिसके बराबर में पतंजलि विश्वविद्यालय का प्रवेश द्वार बनाया गया।

इस कॉलोनी में करीब 100 से ज्यादा मकान थे , पार्क, मंदिर ,क्लब हॉउस था। पीड़ित लोगों का कहना है कि गीतांजलि रेजीडेंसी को देहरादून के आकाशगंगा डवलपर ने 2005 से बनाना शुरू किया था, जोकी 2015 तक बनाया गया। लेकिन बाद में पतंजलि ग्रुप की इस सोसाइटी पर नजर पड़ी और पतंजलि ग्रुप ने बिल्डर के साथ सांठगांठ कर सारे घर खरीद लिए जो तब तक बिक नहीं पाए थे।

पीड़ितों की माने तो बिल्डर ने पतंजलि प्रबंधन के बहकावे में आकर रातों-रात यहां के निवासियों से चर्चा किए बिना सारी सोसाइटी पतंजलि ग्रुप के हाथों बेच दी । कुछ मकान मालिक यहां डटे रहे और घर छोड़कर नहीं गए तो उनके घरों की बिजली पानी और सीवर के कनेक्शन तक काट दिए गए। और उन मकान मालिकों और उनके किरायेदारों को भी डरा धमकाकर कर यहां से जाने के लिए मजबूर किया गया ।बहुत सारे मालिकों ने उन से डरकर औने पौने दाम पर उन्हें अपने घर भेज दिए। लेकिन अब भी 4 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने हार नहीं मानी है और वो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।इन परिवारों का कहना है कि वो हरिद्वार के डीएम, एसडीएम, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण और जिला कोर्ट से भी मदद की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक अभी तक किसी ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

प्रेस वार्ता कर रहे लोगों ने बताया कि हमारी शिकायत और मुहिम के बाद हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा 6 करोड़ 92 लाख रुपए की पेनल्टी भी पतंजलि योगपीठ पर लगाई गई थी। लेकिन अफसोस अभी तक हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण यह धनराशि जमा कराने में भी असमर्थ रहा है । पीड़ितों ने सीधे तौर पर पतंजलि की पूरी यूनिवर्सिटी को अवैध बताया है। उनका कहना है कि इसमें न तो प्राधिकरण द्वारा नक्शा पास है और न ही फायर विभाग से एनओसी है। वहीं पीड़ित लोगों ने कहा कि उन्हे कई तरह की धमकियां भी मिली हैं। और बहादराबाद थाने में सब इंस्पेक्टर के सामने उन्हे डराया धमकाया गया है क्योंकि वो सोशल मीडिया पर वीडियो डालने वाले थे।