जब पुष्कर सिंह धामी के आंदोलन ने हिला दिया था ND तिवारी सरकार को

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आज की पोलिटिकल स्टोरी मे बात उस आंदोलन की जिससे उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उभर कर आए. वैसे लंबे आंदोलन के बाद अगल राज्य बने उत्तराखंड को आंदोलनकारी प्रदेश भी कहा जाता है. राज्य बनने के बाद देखें तो यहां आंदोलनों का दौर लगातार जारी है… हालाँकि हर आंदोलन का सार्थक फल नहीं मिला … हर आंदोलन ऐतिहासिक भी नहीं हो सकता…और हर आंदोलन के बाद ऐसा नेता सामने नहीं आता जिसे बाद मे याद रखा जाये और वह ऐसे मुकाम पर पहुंच जाये जिसके बारे में शायद ही उसने सोचा हो… लेकिन जिस आंदोलन के बारे मे हम आपको बताने जा रहे हैं वो आज भी इतिहास के पन्नों मे दर्ज है. इस आंदोलन से उत्तराखंड के बेरोजगार युवकों को बड़ा लाभ मिलना शुरू हुआ और इस आंदोलन के बाद, आंदोलन का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बन गया…. हम बात कर रहे हैं आंदोलन से उभरे नेता, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की….पुष्कर सिंह धामी ने ऊच्च शिक्षा लखनऊ विश्वविद्याल ले प्राप्त की….यहां वे जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से…..यहां उन्हें समझ आ गया था कि आंदोलन के लिए कैसी रूप रेखा बनानी चाहिए…साथ ही वे अलग राज्य के लिए चल रहे आंदोलन में भी सक्रिय रहे…. उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में पुष्कर सिंह धामी भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने…नये बने प्रदेश में ये उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी….

जब पुष्कर सिंह धामी के आंदोलन ने हिला दिया था ND तिवारी सरकार को

2002 में पहले विधानसभा चुनाव के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी और एनडी तिवारी मुख्यमंत्री थे…इस दौरान भी प्रदेश में कई आंदोलन चल रहे थे…भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते पुष्कर सिंह धामी भी सक्रिय थे…लेकिन 11 जनवरी 2005 को पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक ऐसा आंदोलन हुआ जो नजीर बन गया…..दरअसल नये प्रदेश होने के कारण प्रदेश में नये उद्योगों की स्थापना हो रही थी….साथ ही एनडी तिवारी ने उत्तराखंड में सिडकुल जैसे औधोगिक क्षेत्र चिन्हीत कर दिये थे…लेकिन उनमें स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया था…बस, पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे को पकड़ लिया….और सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरु कर दिया….11 जनवरी 2005 को पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में महज 90 युवकों ने विधानसभा कूच कर दिया….ये युवा गिनती के 90 जरूर थे लेकिन इन्होंने उत्तराखंड की तिवारी सरकार को ऊपर से लेकर नीचे तक हिला दिया था….

पुलिस भी बमुश्किल से इन पर काबू कर पाई थी….आंदोलन की गरमाहट भाँपते हुए मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को तुरंत फैसला लेना पड़ा और उन्होंने उत्तराखंड के उद्योगों में 70 फिसदी उत्तराखंड के युवाओं रोजगार देने के निर्देश दे दिये….इस फैसले के कारण यह आंदोलन ऐतिहासिक हो गया…. बीजेपी ने भी पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व क्षमता को समझ लिया…. उन्हें एक बार नहीं दो बार युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया…. पुष्कर धामी के लिए भी यह आंदोलन चमत्कारी साबित हुआ…. आंदोलन के समय शायद उन्हें भी अनुमान नहीं रहा होगा कि यह आंदोलन उन्हें ऐसी छवि प्रदान कर देगा कि वे एक दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनेंगे….. जल्द मिलेंगे एक नई पॉल्टिकल स्टोरी के साथ….. तब तक आप इस वीडियो को शेर कर सकते हैं, लीके कर सकते हैं. चॅनेल को सबस्क्राइब भी कर सकते हैं, यदि आप चाहें तो. इस वीडियो के अंत तक मेरे साथ बने एआहने के लिए आपको अनेकों धन्यवाद.