Identity Theft भारत में साइबर अपराध के सबसे तेजी से बढ़ते रूपों में से एक बन चुका है। 2025 में भारत ने साइबर क्राइम की वजह से ₹22,000 करोड़ से ज्यादा गंवाए, जो पिछले साल के मुकाबले 24% ज्यादा है। आइए विस्तार से समझते हैं Identity Theft क्या है, यह भारत में किस हद तक फैला है, और Identity Theft Prevention के लिए क्या-क्या किया जा सकता है।
Identity Theft क्या है?
Identity Theft तब होती है, जब कोई व्यक्ति आपकी निजी पहचान से जुड़ी जानकारी, जैसे आधार, PAN या बैंक डिटेल्स का इस्तेमाल बिना अनुमति के वित्तीय या व्यक्तिगत फायदे के लिए करता है। इस तरह की ID Theft अक्सर डेटा ब्रीच से शुरू होती है, यानी कोई कंपनी या संस्था आपकी जानकारी को सुरक्षित नहीं रख पाती, और वह डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंच जाता है।
भारत में Identity Theft कितनी फैली है?
2025 में भारत में करीब 8,500 Identity Theft और डेटा ब्रीच के मामले सामने आने का अनुमान है, जिसमें कर्नाटक (2,500 मामले), तेलंगाना (2,100), उत्तर प्रदेश (1,200) और महाराष्ट्र (1,000) सबसे आगे रहे। इसी साल भारत में 26.5 करोड़ से ज्यादा साइबर अटैक की कोशिशें दर्ज हुईं। CoWIN डेटा लीक, ICMR रिकॉर्ड्स की कथित सेंधमारी और टेलीकॉम डेटा एक्सपोजर जैसी घटनाओं ने लाखों भारतीयों की निजी जानकारी को जोखिम में डाल दिया है।
Identity Theft के खिलाफ भारत में क्या कानूनी सुरक्षा है?
IT Act की धारा 43, 66, 66C और 66D सीधे तौर पर अनऑथराइज्ड एक्सेस, पहचान की चोरी और प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी से निपटती हैं। इसके अलावा DPDP Act, 2023 के तहत भी किसी संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है, अगर वह आपका डेटा सुरक्षित रखने में नाकाम रही हो।
BNSS 2023 की धारा 173 के तहत, कोई भी पुलिस स्टेशन कॉग्निजेबल साइबर अपराध के लिए FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकता। KS पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था, जो आपकी निजी जानकारी पर नियंत्रण रखने के अधिकार की भी रक्षा करता है।
अगर पैसा गलत तरीके से निकल जाए तो क्या करें?
RBI के सर्कुलर के अनुसार, अगर कोई अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन थर्ड-पार्टी ब्रीच की वजह से होता है (आपकी गलती नहीं है) और इसकी सूचना 3 कार्य दिवसों के भीतर दी जाती है, तो आपकी देनदारी शून्य हो सकती है, और बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर पैसा वापस करना होता है।

4-7 दिनों के भीतर रिपोर्ट करने पर सीमित देनदारी लागू होती है, जबकि 7 दिनों के बाद यह बैंक की नीति पर निर्भर करता है, इसलिए समय पर सूचना देना बेहद जरूरी है। अगर आपको ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ी और जानकारी चाहिए, तो हमारी Online Shopping Scam गाइड भी देख सकते हैं।
Identity Theft Prevention के लिए क्या करें?
Identity Theft Prevention के लिए सबसे पहले अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट नियमित रूप से चेक करें, और हर ट्रांजैक्शन के लिए SMS या ऐप अलर्ट जरूर ऑन रखें। आधार और PAN जैसी संवेदनशील जानकारी बेवजह किसी के साथ शेयर न करें, और जहां संभव हो आधार मास्किंग का इस्तेमाल करें। हर अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें, साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर ऑन करें।
फिशिंग लिंक या फर्जी कॉल्स से सतर्क रहें, और कभी भी OTP या बैंकिंग डिटेल्स फोन पर किसी को न बताएं। समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना भी जरूरी है, ताकि किसी अनजान अकाउंट या लोन की पहचान जल्दी हो सके। अगर आप अपने डिजिटल अकाउंट्स को और सुरक्षित बनाना चाहते हैं, तो हमारी WhatsApp Privacy गाइड भी देख सकते हैं।
ID Theft की शिकायत कहां करें?
अगर आपको लगे कि आपकी पहचान की चोरी हुई है, तो तुरंत cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें। इसके साथ ही संबंधित बैंक को लिखित शिकायत, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और साइबरक्राइम पोर्टल की शिकायत संख्या के साथ जरूर भेजें, ताकि बैंक जांच शुरू कर सके और विवादित राशि अस्थायी रूप से वापस क्रेडिट कर सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Identity Theft क्या है, आसान शब्दों में समझाएं?
यह तब होता है जब कोई आपकी निजी जानकारी का इस्तेमाल बिना अनुमति के वित्तीय फायदे के लिए करता है।
2. Identity Theft Prevention के लिए सबसे जरूरी कदम क्या है?
बैंक स्टेटमेंट नियमित चेक करना, ट्रांजैक्शन अलर्ट ऑन रखना और संवेदनशील जानकारी सतर्कता से शेयर करना सबसे जरूरी है।
3. ID Theft की शिकायत कहां करें?
cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन या 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत दर्ज करें।
4. अगर पैसा गलत तरीके से निकल जाए तो कितने दिनों में रिपोर्ट करनी चाहिए?
3 कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट करने पर देनदारी शून्य हो सकती है।
उपरोक्त जानकारी Vakilsearch, LegalFirm, Security.org, Kaval और Dexpose जैसे विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। सटीकता की गारंटी नहीं है, किसी भी कानूनी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए Wikipedia पर Identity Theft से जुड़ा लेख भी देखा जा सकता है।
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