Handheld GPS Tracker एक छोटा उपकरण है, जो पहाड़ों और जंगलों में बिना मोबाइल नेटवर्क के भी आपकी सटीक लोकेशन बताता है। ट्रेकिंग पर निकलने वाले कई लोग सिर्फ फोन के भरोसे रहते हैं। लेकिन ऊंचाई पर नेटवर्क गायब होते ही नक्शा रुक जाता है और बैटरी भी तेजी से खत्म होने लगती है। तो पहाड़ों में भरोसेमंद नेविगेशन कैसे मिले?
ट्रेकिंग में जीपीएस डिवाइस की जरूरत क्यों पड़ती है?
पहाड़ी इलाकों में मौसम कुछ ही मिनटों में बदल जाता है। घना कोहरा या बर्फबारी होने पर पगडंडी पहचानना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सही दिशा बताने वाला साधन आपकी सुरक्षा की पहली ढाल बनता है। हादसे के समय बचाव दल को सटीक कोऑर्डिनेट्स बताने में भी यह काम आता है।
Handheld GPS Tracker कैसे काम करता है?
यह डिवाइस सीधे उपग्रहों से सिग्नल लेता है, इसलिए इसे मोबाइल टावर या इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ती। नए मॉडल जीपीएस के साथ ग्लोनास और गैलिलियो जैसी प्रणालियों को भी सपोर्ट करते हैं। इससे गहरी घाटियों में भी लोकेशन ज्यादा सटीक मिलती है। चलते समय डिवाइस आपके रास्ते को ट्रैक के रूप में रिकॉर्ड करता है। वापसी में इसी ट्रैक पर चलकर आप सुरक्षित बेस कैंप तक लौट सकते हैं।
अच्छे डिवाइस में कौन से फीचर्स जरूरी हैं?
सबसे पहले बैटरी लाइफ देखें। अच्छे मॉडल 20 घंटे से लेकर कई दिनों तक चल जाते हैं। ऑफलाइन टोपो मैप का सपोर्ट भी जरूरी है, जिसमें पहाड़ों की ऊंचाई और कंटूर लाइनें साफ दिखें। बैरोमेट्रिक अल्टीमीटर और इलेक्ट्रॉनिक कंपास वाले मॉडल ऊंचाई और दिशा ज्यादा सही बताते हैं। कुछ प्रीमियम मॉडल में सैटेलाइट मैसेजिंग और एसओएस बटन भी मिलता है। वहीं आईपीएक्स7 रेटिंग वाली वाटरप्रूफ बॉडी बारिश में डिवाइस को सुरक्षित रखती है।
स्मार्टफोन के मुकाबले यह बेहतर क्यों है?
कड़ाके की ठंड में फोन की टच स्क्रीन धीमी पड़ जाती है। वहीं बटन वाले जीपीएस डिवाइस दस्ताने पहनकर भी आराम से चलते हैं। एक मजबूत Handheld GPS Tracker गिरने, धूल और पानी को आसानी से झेल लेता है। इसकी बैटरी भी फोन से कई गुना ज्यादा चलती है।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
शुरुआती ट्रेकर्स के लिए हल्का और आसान मेन्यू वाला मॉडल सही रहता है। गार्मिन की ईट्रेक्स सीरीज इस श्रेणी में काफी लोकप्रिय है। ऊंचे हिमालयी अभियानों के लिए गार्मिन जीपीएसमैप जैसी सीरीज बेहतर रहती है, जिसमें बड़ी स्क्रीन और मजबूत एंटीना मिलता है। सही Handheld GPS Tracker चुनने से पहले अपने ट्रेक की कठिनाई और बजट दोनों का आकलन करें। वारंटी और सर्विस सेंटर की जानकारी भी जरूर लें।

इस्तेमाल करने के आसान टिप्स
नया Handheld GPS Tracker लेने के बाद ट्रेक से पहले घर पर ही रूट लोड करें और उसे चलाने का अभ्यास कर लें। अतिरिक्त बैटरी साथ रखें। ठंड में बैटरी जल्दी खत्म होती है, इसलिए डिवाइस को जैकेट की अंदरूनी जेब में रखें। बेस कैंप और पानी के स्रोत जैसे ठिकानों को वेपॉइंट के रूप में सेव करें। साथ में कागजी नक्शा और साधारण कंपास भी रखें।
लोकेशन और नेविगेशन से जुड़ी अन्य जानकारी
लोकेशन तकनीक को गहराई से समझने के लिए गूगल मैप्स प्लस कोड और जीपीएस कोऑर्डिनेट्स का अंतर पढ़ें। आपात स्थिति में काम आने वाले सैटेलाइट कनेक्टिविटी वाले स्मार्टफोन के बारे में भी जानें। इसके अलावा स्विच ऑफ होने पर खोया फोन कैसे मिलता है, यह भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या Handheld GPS Tracker बिना मोबाइल नेटवर्क के काम करता है?
हां, यह सीधे उपग्रहों से सिग्नल लेता है, इसलिए दूरदराज के पहाड़ों में भी लोकेशन बता देता है।
2. ट्रेकिंग के लिए Handheld GPS Tracker की कीमत कितनी होती है?
भारत में शुरुआती मॉडल लगभग 15 से 20 हजार रुपये से शुरू होते हैं, जबकि सैटेलाइट मैसेजिंग वाले मॉडल 50 हजार रुपये से ऊपर जाते हैं। कीमतें विक्रेता के हिसाब से बदलती रहती हैं।
3. क्या Handheld GPS Tracker में भारत के नक्शे मिलते हैं?
हां, कई मॉडल में बेसिक मैप पहले से होते हैं और जरूरत पड़ने पर ऑफलाइन टोपो मैप भी डाले जा सकते हैं।
4. जीपीएस सिस्टम किसने बनाया और इसे कौन चलाता है?
जीपीएस सिस्टम अमेरिका ने विकसित किया है और इसका संचालन अमेरिकी सरकार करती है। इसकी आधिकारिक जानकारी सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

