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Form 15G और 15H क्या है? FD पर TDS कटने से कैसे बचाएं?

Form 15G 15H न भरने की वजह से हर साल लाखों लोग बेवजह TDS कटवा बैठते हैं, जबकि उनकी असल इनकम टैक्स के दायरे में आती ही नहीं। FY 2026-27 से एक बड़ा बदलाव भी हो रहा है — Form 15G और Form 15H की जगह अब एक नया Form 121 लेने वाला है। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि Form 15G 15H क्या हैं, FD पर TDS कब कटता है, और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।

Form 15G 15H क्या हैं?

Form 15G 15H असल में दो जुड़वां फॉर्म हैं, जो एक ही मकसद से बनाए गए हैं — बेवजह TDS कटने से बचाना।यह दोनों सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म हैं, जिन्हें बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करके यह बताया जाता है कि आपकी टैक्स देनदारी नहीं बनती।

Form 15G उन लोगों के लिए है जिनकी उम्र 60 साल से कम है, जबकि Form 15H सिर्फ सीनियर सिटीजन के लिए है। दोनों फॉर्म सिर्फ उसी वित्त वर्ष के लिए मान्य होते हैं, हर साल दोबारा जमा करना जरूरी है।

FD पर TDS कब कटता है?

Form 15G 15H जमा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर TDS कटना शुरू कब होता है। FY 2025-26 से बैंक और पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट पर TDS की सीमा सामान्य डिपॉजिटर के लिए ₹50,000 और सीनियर सिटीजन के लिए ₹1,00,000 सालाना कर दी गई है।

एक बार यह सीमा पार हो जाए, तो TDS सिर्फ अतिरिक्त रकम पर नहीं, बल्कि पूरी ब्याज राशि पर 10% की दर से कटता है। कंपनी या NBFC की FD पर यह सीमा बहुत कम है, सिर्फ ₹5,000 सालाना — इसलिए वहां सावधानी ज्यादा जरूरी है। टैक्स रिजीम के हिसाब से भी छूट में फर्क आता है — New vs Old Tax Regime गाइड में यह विस्तार से समझा जा सकता है।

Form 15G 15H के लिए कौन योग्य है?

Form 15G के लिए उम्र 60 साल से कम होनी चाहिए, और कुल इनकम Old Regime में ₹2.5 लाख या New Regime में ₹4 लाख की छूट सीमा से कम होनी चाहिए। Form 15H के लिए उम्र 60 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए, और कुल टैक्स देनदारी शून्य होनी चाहिए। 60 साल से ऊपर वालों के लिए छूट सीमा ₹3 लाख, और 80 साल से ऊपर सुपर सीनियर सिटीजन के लिए ₹5 लाख तक जाती है।

जरूरी बातें जो ज्यादातर लोग भूल जाते हैं

Form 15G 15H सही तरीके से भरने के बावजूद कुछ छोटी गलतियां पूरा फायदा बेकार कर सकती हैं। अगर एक से ज्यादा बैंक में FD है, तो हर बैंक में अलग-अलग Form 15G 15H जमा करना जरूरी है, एक फॉर्म सभी बैंकों को कवर नहीं करता।

PAN का Aadhaar से लिंक होना भी जरूरी है, वरना PAN इनऑपरेटिव माना जाकर 20% तक TDS कट सकता है। यह फॉर्म न भरने पर कोई पेनल्टी नहीं है, यह सिर्फ एक सुविधा है जिसे इस्तेमाल करना या छोड़ना आपकी मर्जी है। NRI इन फॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते, NRO डिपॉजिट पर TDS अलग और ज्यादा दर से कटता है।

2026 में बड़ा बदलाव — Form 121

FY 2026-27 से नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत Form 15G और Form 15H की जगह एक यूनिफाइड Form 121 आ रहा है। सबसे बड़ा फर्क यह है कि अब उम्र के आधार पर अलग फॉर्म नहीं चुनना होगा, सिर्फ यह देखा जाएगा कि टैक्स देनदारी शून्य है या नहीं।

HRA Exemption Calculation जैसे दूसरे टैक्स नियमों में भी हाल ही में कई बदलाव हुए हैं, उन्हें भी समझना फायदेमंद रहेगा।

अगर TDS पहले ही कट गया हो तो क्या करें?

अगर बैंक ने पहले ही TDS काट लिया है, तो सीधे बैंक से वापस नहीं मिलता। ऐसे में ITR फाइल करके इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से रिफंड क्लेम करना ही एकमात्र तरीका है। ज्यादा आधिकारिक जानकारी के लिए Income Tax Department की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. Form 15G और Form 15H में क्या फर्क है?
Form 15G 60 साल से कम उम्र वालों के लिए है, Form 15H सीनियर सिटीजन के लिए है।

2. FD पर TDS कब कटना शुरू होता है?
सामान्य डिपॉजिटर के लिए ₹50,000 और सीनियर सिटीजन के लिए ₹1,00,000 सालाना ब्याज पार करने पर।

3. क्या हर बैंक के लिए अलग फॉर्म भरना जरूरी है?
हां, हर बैंक में अलग-अलग Form 15G 15H जमा करना जरूरी है।

4. Form 121 क्या है?
यह एक नया यूनिफाइड फॉर्म है जो FY 2026-27 से Form 15G और Form 15H दोनों की जगह लेगा।

5. अगर TDS पहले ही कट गया हो तो क्या करें?
ITR फाइल करके इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से रिफंड क्लेम करना होगा।

उपरोक्त जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। सटीक टैक्स प्लानिंग के लिए किसी प्रमाणित चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह जरूर लें।

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