Foreign Degree लेकर भारत लौटने वाले छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या उनकी डिग्री यहां नौकरी, आगे की पढ़ाई या सरकारी भर्ती के लिए मान्य होगी। विदेश में पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद अगर डिग्री को मान्यता न मिले, तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए साफ नियम और ऑनलाइन प्रक्रिया मौजूद है।
भारत में Foreign Degree को मान्यता कौन देता है?
पहले यह काम मुख्य रूप से एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) करता था। अप्रैल 2025 में यूजीसी ने विदेशी शैक्षणिक संस्थानों से मिली योग्यताओं की मान्यता और समकक्षता देने के लिए नए नियम अधिसूचित किए। इन नियमों के तहत अब यूजीसी खुद इक्विवेलेंस सर्टिफिकेट जारी करता है। इस सर्टिफिकेट से साबित होता है कि आपकी विदेशी डिग्री भारत की किसी डिग्री के बराबर है।
Foreign Degree को मान्यता मिलने की शर्तें
सबसे पहली शर्त यह है कि विदेशी यूनिवर्सिटी अपने देश के कानून के तहत मान्यता प्राप्त हो। बिना मान्यता वाले संस्थान या बिना एक्रेडिटेशन वाले कोर्स की डिग्री को समकक्षता नहीं मिलती। कोर्स में दाखिले की योग्यता भारत के उसी तरह के कोर्स से मिलती जुलती होनी चाहिए।
इसके अलावा कोर्स की अवधि, स्तर, क्रेडिट, पढ़ाई के घंटे और प्रोजेक्ट या इंटर्नशिप जैसी बातों की भी तुलना की जाती है। फ्रेंचाइजी व्यवस्था के जरिए ली गई डिग्री, जो भारतीय नियमों के खिलाफ हो, उसे मान्यता नहीं मिलती। इसलिए दाखिला लेने से पहले यह जरूर देख लें कि पढ़ाई कहां और किस व्यवस्था में होगी।
किन Foreign Degree पर ये नियम लागू नहीं होते?
मेडिकल, फार्मेसी, नर्सिंग, लॉ और आर्किटेक्चर जैसी प्रोफेशनल डिग्रियां यूजीसी के इन नियमों के दायरे में नहीं आतीं। इनके लिए संबंधित वैधानिक परिषद के अपने नियम लागू होते हैं। उदाहरण के लिए विदेश से MBBS करने वालों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के अनुसार भारत में प्रैक्टिस की अनुमति लेनी होती है। लॉ ग्रेजुएट के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम लागू होते हैं।
इक्विवेलेंस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदन यूजीसी के ऑनलाइन पोर्टल पर किया जाता है। इसमें डिग्री, मार्कशीट, ट्रांसक्रिप्ट और पासपोर्ट जैसे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं और तय फीस जमा करनी होती है। अगर दस्तावेज अंग्रेजी के अलावा किसी और भाषा में हैं, तो उनका प्रमाणित अंग्रेजी अनुवाद भी देना होता है। आवेदन का स्टेटस पोर्टल पर ही ट्रैक किया जा सकता है।
नियमों के अनुसार स्टैंडिंग कमेटी 10 कार्य दिवस में अपनी सिफारिश देती है और यूजीसी 15 कार्य दिवस में अंतिम फैसला करता है। आवेदन खारिज होने पर 30 कार्य दिवस के भीतर समीक्षा के लिए अपील की जा सकती है। दाखिले से पहले ही ऐसे करें जांच सबसे सुरक्षित तरीका है कि विदेश में दाखिला लेने से पहले ही यूनिवर्सिटी की मान्यता जांच लें।
उस देश के शिक्षा मंत्रालय या आधिकारिक मान्यता देने वाली संस्था की वेबसाइट पर यूनिवर्सिटी का नाम जरूर खोजें। सिर्फ एजेंट के दावों पर भरोसा न करें। कोर्स की अवधि, पढ़ाई का तरीका और यह देख लें कि कोर्स ऑनलाइन है या कैंपस में, क्योंकि इन सबका असर समकक्षता पर पड़ता है।

इक्विवेलेंस सर्टिफिकेट कहां काम आता है?
भारत की किसी यूनिवर्सिटी में आगे की पढ़ाई, जैसे मास्टर्स या पीएचडी में दाखिले के समय यह सर्टिफिकेट मांगा जाता है। कई सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी विदेशी डिग्री के साथ इसकी जरूरत पड़ती है। प्राइवेट कंपनियां भी अक्सर डिग्री की असलियत जांचती हैं। ऐसे में यह सर्टिफिकेट पहले से पास होने पर नौकरी की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Foreign Degree की समकक्षता अब कौन देता है?
अप्रैल 2025 में अधिसूचित नियमों के तहत अब यूजीसी विदेशी डिग्रियों के लिए इक्विवेलेंस सर्टिफिकेट जारी करता है।
2. क्या हर Foreign Degree को भारत में मान्यता मिल जाती है?
नहीं। यूनिवर्सिटी का अपने देश में मान्यता प्राप्त होना और कोर्स का भारतीय मानकों से मिलता जुलता होना जरूरी है। फ्रेंचाइजी से ली गई डिग्री को मान्यता नहीं मिलती।
3. विदेश से MBBS करने वालों पर कौन से नियम लागू होते हैं?
मेडिकल डिग्री पर यूजीसी के नियम लागू नहीं होते। इसके लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियम और परीक्षा पास करनी होती है।
4. Foreign Degree के नए नियमों की पूरी जानकारी कहां पढ़ें?
नियमों की शर्तें, समय सीमा और अपील की प्रक्रिया विस्तार से इस रिपोर्ट में दी गई है।
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उपरोक्त Foreign Degree की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

