स्कूल की किताब में छपे किसी चैप्टर को समझना कई बार सिर्फ पढ़ने से मुश्किल लगता है, लेकिन अगर उसी पेज पर एक वीडियो लिंक मिल जाए तो पूरी बात आसान हो जाती है। यही काम करता है DIKSHA Platform, जो अब देश के ज्यादातर स्कूलों तक पहुंच चुका है। आइए इसे पूरी गहराई से समझते हैं।
DIKSHA Platform क्या है
DIKSHA का पूरा नाम Digital Infrastructure for Knowledge Sharing है, जिसे 5 सितंबर 2017 को देश के तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने लॉन्च किया था। यह शिक्षा मंत्रालय की पहल है और NCERT के अंतर्गत आने वाले Central Institute of Educational Technology (CIET) द्वारा विकसित किया गया है। इसे “One Nation, One Digital Platform” के तौर पर डिजाइन किया गया है, और अब तक 36 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं ने इसे अपनाया है।
QR कोड वाली एनर्जाइज्ड टेक्स्टबुक्स कैसे काम करती हैं
DIKSHA Platform की सबसे खास बात इसकी QR कोड वाली एनर्जाइज्ड टेक्स्टबुक्स हैं। NCERT की हर किताब के हर चैप्टर पर एक यूनिक QR कोड छपा होता है, जिसे स्कैन करते ही उस टॉपिक से जुड़े वीडियो, वर्कशीट और अतिरिक्त पढ़ने की सामग्री खुल जाती है। हर QR कोड के पीछे एक छह अंकों की यूनिक पहचान होती है, जिससे सही कंटेंट सही किताब से जुड़ा रहता है, और छात्र सिर्फ किताब खोलकर स्कैन करते ही पूरी डिजिटल लाइब्रेरी तक पहुंच जाते हैं।
छात्रों के लिए क्या-क्या उपलब्ध है
प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के छात्रों के लिए DIKSHA Platform पर इंटरैक्टिव वीडियो, प्रैक्टिस वर्कशीट और क्विज मौजूद हैं, जो पढ़ाई को ज्यादा दिलचस्प बनाते हैं। छात्र इसी प्लेटफॉर्म पर टॉपिक दोहरा सकते हैं, परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं, और NCERT या अपने स्टेट बोर्ड के सिलेबस के हिसाब से सेल्फ-पेस्ड लर्निंग मॉड्यूल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुविधा दूरदराज या कम संसाधन वाले इलाकों के छात्रों के लिए खासतौर पर फायदेमंद साबित हो रही है।
शिक्षकों के लिए DIKSHA का इस्तेमाल
महामारी के दौरान DIKSHA Platform के जरिए ही NISHTHA नाम का बड़ा टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया था, जिसका मकसद स्कूल हेड और टीचर्स की समग्र क्षमता बढ़ाना था। शुरुआत में यह प्राइमरी कक्षाओं के लिए था, और अब इसके अगले वर्जन सेकेंडरी शिक्षा और फाउंडेशनल लिटरेसी व न्यूमरेसी पर केंद्रित हैं।
इसके अलावा शिक्षकों के लिए DIKSHA Platform पर लेसन प्लान, वर्कशीट और एक्टिविटी बैंक भी मौजूद हैं, साथ ही एक करियर मैपिंग टूल भी है जो शिक्षकों को नौकरी की शुरुआत से रिटायरमेंट तक अपनी प्रोफेशनल ग्रोथ प्लान करने में मदद करता है।

कितनी भाषाओं में उपलब्ध है और ऑफलाइन इस्तेमाल
DIKSHA Platform अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी, कन्नड़, असमिया, बंगाली, गुजराती और उर्दू समेत 18 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के छात्र अपनी मातृभाषा में सीख सकते हैं। इसके अलावा यह प्लेटफॉर्म ऑफलाइन इस्तेमाल की सुविधा भी देता है, यानी एक बार कंटेंट डाउनलोड करने के बाद बिना इंटरनेट के भी उसे देखा जा सकता है, जो कम नेटवर्क वाले ग्रामीण इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है।
DIKSHA का इस्तेमाल कैसे करें
DIKSHA को वेबसाइट के साथ-साथ मोबाइल ऐप के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो एंड्रॉइड फोन पर आसानी से डाउनलोड हो जाता है। इस्तेमाल शुरू करने के लिए बस अपनी भाषा और लोकेशन चुननी होती है, इसके बाद टेक्स्टबुक में छपे QR कोड को स्कैन करके सीधे उससे जुड़े कंटेंट तक पहुंचा जा सकता है, या फिर सर्च के जरिए किसी भी विषय का कंटेंट ढूंढा जा सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. DIKSHA Platform क्या है?
यह भारत सरकार का राष्ट्रीय डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है, जो स्कूली छात्रों और शिक्षकों को मुफ्त डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराता है।
2. QR कोड कैसे काम करता है?
हर टेक्स्टबुक चैप्टर पर छपे यूनिक QR कोड को स्कैन करते ही उस टॉपिक से जुड़े वीडियो और अतिरिक्त सामग्री खुल जाती है।
3. DIKSHA Platform कितनी भाषाओं में उपलब्ध है?
यह अंग्रेजी और हिंदी समेत 18 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
4. क्या DIKSHA Platform सिर्फ छात्रों के लिए है?
नहीं, इसमें शिक्षकों के लिए भी लेसन प्लान, ट्रेनिंग मॉड्यूल और करियर मैपिंग जैसे टूल्स मौजूद हैं।
5. क्या बिना इंटरनेट के भी DIKSHA इस्तेमाल हो सकता है?
हां, कंटेंट डाउनलोड करने के बाद बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी उसे ऑफलाइन देखा जा सकता है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

