चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की मौत का आंकड़ा 200 पार, बेजुबानों की मौतें भी उठा रही कई सवाल

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देहरादून/रुद्रप्रयाग/उत्तरकाशी, ब्यूरो। तीन मई 2022 से उत्तराखंड में शुरू हुई चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों के मौत आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे ज्यादा मौतें हार्ट अटैक से हो रही हैं। केदारनाथ और यमुनोत्री धामी में अभी तक सबसे अधिक तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। वहीं, गंगोत्री और बदरीनाथ में भी कुछ यात्री तीर्थयात्रा के दौरान हताहत हुए हैं। हालांकि उत्तराखंड सरकार की ओर से स्वस्थ्य होने के बाद ही यात्रियों को चारधाम की यात्रा पर भेजा जा रहा है फिर भी बदलता मौसम और तापमान में उतार चढ़ाव भी यात्रियों की मौत का कारण बन रहा है। इंसानों के साथ ही जानवरों की भी लगातार यात्रामार्ग पर मौत हो रही है। यमुनोत्री और केदारनाथ में बेजुबान घोड़े खच्चर ठंडे पानी के सेवन और कम भोजन के साथ ही अधिक काम लेने से भी मर रहे हैं।

उत्तराखंड राज्य आपतकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक चारधाम यात्रा में 201 तीर्थयात्री मौत के शिकार हो चुके हैं। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 95, बदरीनाथ में 51, गंगोत्री में 13 और यमुनोत्री में 42 तीर्थयात्री अभी तक यात्रा के दौरान मर चुके हैं। यात्रा मार्ग पर हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांचें भी की जा रही हैं, फिर भी यात्रियों की मौत का सिलसिला कम नहीं हो रहा है। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की ओर चारधाम यात्रा रूट्स पर 20 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यात्रा मार्ग पर 178 डॉक्टरों को तैनात किया गया। यह आंकड़ा कोरोना काल से पहले हुई चारधाम यात्रा 2019 के मुकाबले 66 प्रतिशत ज्यादा है। यात्रा मार्गों पर 119 एंबुलेंस 24 घंटे तैनात की गई हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. शैलजा भट्ट का कहना है कि चारधाम यात्रा मार्गों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही है। पहली बार विभाग ने यात्रियों की नौ स्थानों पर हेल्थ स्क्रीनिंग की जा रही है। यात्रियों की जागरूकता के लिए हेल्थ एडवाइजरी तैयार की गई। 12 डॉक्टरों को कार्डियोलॉजी का प्रशिक्षण देने के बाद चारधाम यात्रा में तैनात किया गया है। कहीं न कहीं यात्रा मार्ग पर लोग अपनी लापरवाही के कारण ही मौत के मुंह में ज्यादा जा रहे हैं। बीमार तीर्थयात्री केदारनाथ और यमुनोत्री में सबसे ज्यादा हांफ रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर घोड़े-खच्चरों की मौत का आंकड़ा भी इस बार कई सवाल खड़े कर रहा है। कुछ सवाल पशुपालकों पर तो कुछ प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी खड़े हो रहे हैं।

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