भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस अभियान का उद्देश्य देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है, जो खुद को CBI, पुलिस, ED, कस्टम्स और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे।
यह कार्रवाई ऑपरेशन चक्र-VI (Operation Chakra-VI) के तहत की गई, जिसमें लगभग 60 विशेष जांच टीमों ने हिस्सा लिया। जांच के दौरान दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए।
क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम साइबर अपराध का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, कस्टम्स या साइबर सेल का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल करते हैं। इसके बाद वे पीड़ित को डराते हैं कि उसका आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक खाता किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है और उसे तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है।
पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखा जाता है, जिसे अपराधी “डिजिटल अरेस्ट” बताते हैं। फिर जांच के नाम पर बैंक खातों की जानकारी मांगी जाती है और पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। असलियत में भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं है।
CBI की कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
CBI के अनुसार, जांच के दौरान यह पता चला कि अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलते-जुलते URL वाली फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इसी वेबसाइट और नकली दस्तावेजों का उपयोग करके लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह नेटवर्क देशभर में 200 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ा हुआ है। गिरफ्तार आरोपी कथित रूप से शेल कंपनियां बनाकर और म्यूल बैंक अकाउंट संचालित कर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजते थे।
CBI की 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी
CBI ने जिन राज्यों में कार्रवाई की उनमें पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा शामिल हैं।
देशभर में एक साथ हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को खत्म करना था। जांच के दौरान कई कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, बैंक दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे करता है लोगों को शिकार?
इस स्कैम में अपराधी सबसे पहले किसी व्यक्ति को फोन करते हैं और दावा करते हैं कि उसका मोबाइल नंबर, बैंक खाता या आधार कार्ड किसी अवैध गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उसे वीडियो कॉल पर आने के लिए मजबूर किया जाता है।
वीडियो कॉल में नकली पुलिस स्टेशन, कोर्ट या सरकारी कार्यालय का बैकग्राउंड दिखाया जाता है ताकि पीड़ित को विश्वास हो जाए कि कार्रवाई असली है। फिर उसे डराकर कहा जाता है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए जांच पूरी होने तक एक निश्चित राशि सरकारी खाते में जमा करनी होगी। डर और मानसिक दबाव के कारण कई लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा देते हैं।
आगे और समाचार पढ़े:
- Renault Kiger Turbo Gets More Affordable With New Evolution+ Variant
- राम मंदिर दान विवाद: VHP ने FIR की मांग तेज की, अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले पर बढ़ा दबाव
- अरुणाचल प्रदेश में बाढ़-भूस्खलन से तबाही: एक की मौत, कई लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी वायुसेना
लोग कैसे बच सकते हैं डिजिटल अरेस्ट स्कैम से?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल पर पैसे मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
ध्यान रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। किसी भी संदिग्ध कॉल की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से करें। यदि धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
साइबर अपराध के खिलाफ सरकार की सख्ती
पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसी को देखते हुए CBI, गृह मंत्रालय और अन्य एजेंसियां लगातार संयुक्त अभियान चला रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। सरकार का उद्देश्य ऐसे संगठित साइबर गिरोहों को समाप्त करना और नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निष्कर्ष
16 राज्यों में 80 स्थानों पर CBI की यह कार्रवाई भारत में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी मुहिमों में से एक मानी जा रही है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम ने हजारों लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में नागरिकों के लिए सतर्क रहना, किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करना और समय रहते शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है।
CBI की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कानून सख्त है और डिजिटल धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

